Pratik Sharma Hansraj College student presenting research paper at ISRO URSC conference Bengaluru.

एजुकेशन डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sunday, 08 Feb 2026 09:15 PM ISTनई दिल्ली/बेंगलुरु (Taj News):

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के तकनीकी मंच पर पहली बार साहित्य और विज्ञान की सीमाओं को टूटते हुए देखा गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज के हिंदी विभाग (द्वितीय वर्ष) के छात्र प्रतीक शर्मा ने यह करिश्मा कर दिखाया है। बेंगलुरु स्थित इसरो के यू.आर. राव उपग्रह केंद्र (URSC) में आयोजित प्रतिष्ठित ‘अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन’ में प्रतीक ने अपना शोध-पत्र प्रस्तुत कर न केवल दिल्ली विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया, बल्कि साहित्य के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाएं भी खोल दी हैं।

Pratik Sharma Hansraj College student presenting research paper at ISRO URSC conference Bengaluru.

साहित्य और विज्ञान की जुगलबंदी: वैज्ञानिकों के बीच ‘हिंदी’ का विद्यार्थी

आईआईटी और डीआरडीओ के दिग्गजों के बीच एकमात्र साहित्यिक चेहरा 5 और 6 फरवरी को आयोजित इस उच्च-स्तरीय तकनीकी सम्मेलन में देश के शीर्ष संस्थानों—आईआईटी (IIT), आईआईएसटी (IIST), डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) के वरिष्ठ वैज्ञानिक और शोधार्थी शामिल हुए थे। इस गंभीर वैज्ञानिक जमावड़े में प्रतीक शर्मा न केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के एकमात्र प्रतिनिधि थे, बल्कि पूरे सम्मेलन में ‘साहित्यिक पृष्ठभूमि’ से आने वाले एकमात्र प्रतिभागी भी थे। जहां चारों तरफ तकनीकी और इंजीनियरिंग के विद्वान थे, वहां हिंदी साहित्य के एक छात्र की उपस्थिति ने सभी को चौंका दिया।

शोध का विषय: प्राचीन ज्ञान से आधुनिक विज्ञान तक प्रतीक शर्मा के शोध-पत्र का विषय अत्यंत मौलिक और विचारोत्तेजक था— “अंतरिक्ष यान प्रणालियों के लिए स्वदेशीकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: भारतीय ज्ञान-परंपरा के आलोक में एक वैज्ञानिक एवं संस्थागत विवेचन”। उन्होंने अपने प्रस्तुतीकरण में इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा केवल दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी स्वदेशीकरण (Indigenization) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक मजबूत आधार बन सकती है। उनके इस अनूठे दृष्टिकोण और गहन विश्लेषण की वहां मौजूद वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने मुक्त कंठ से सराहना की। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उनके शोध-पत्र को सम्मेलन की आधिकारिक शोध-पत्रिका में प्रकाशित भी किया गया है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर मिलेगा सम्मान प्रतीक की इस असाधारण उपलब्धि ने उन्हें एक और सम्मान का हकदार बना दिया है। सचिव उत्कर्ष मिश्रा ने घोषणा की है कि प्रतीक को ‘नमस्कार-अंतरिक्ष विद्यार्थी पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें आगामी 23 अगस्त (राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस) के अवसर पर लखनऊ में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में दिया जाएगा। पुरस्कार स्वरूप उन्हें स्मृति चिन्ह और 21,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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