
Friday, 02 January 2026, 6:32:00 AM. Dhaka, Bangladesh
S. Jaishankar और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर Sardar Ayaz Sadiq के बीच ढाका में हुई एक संक्षिप्त मुलाकात को लेकर पाकिस्तान में सियासी हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तानी स्पीकर सादिक ने दावा किया है कि भारत के विदेश मंत्री ने जानबूझकर उनसे हाथ मिलाने की पहल की। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब मई में दोनों देशों के बीच चार दिन तक चली सैन्य तनातनी के बाद संबंध बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

ढाका में किस मौके पर हुई मुलाकात
यह कथित हैंडशेक बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के अंतिम संस्कार के दौरान हुआ। इस कार्यक्रम में कई देशों के वरिष्ठ नेता और राजनयिक मौजूद थे। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न सिर्फ शोक समारोह में हिस्सा लिया, बल्कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से संवेदना पत्र भी सौंपा।
पाकिस्तानी स्पीकर का दावा, भारत की चुप्पी
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, स्पीकर सादिक ने कहा कि जयशंकर ने उन्हें देखकर खुद आगे बढ़कर हाथ मिलाया। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। नई दिल्ली लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि भारत-पाक संबंधों में किसी भी तरह की पहल ठोस कूटनीतिक आधार पर ही होती है, न कि प्रतीकात्मक इशारों से।
मई की सैन्य झड़प और ऑपरेशन सिंदूर
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव की पृष्ठभूमि मई 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने Operation Sindoor के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक सीमित लेकिन तीव्र सैन्य टकराव चला।
तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से भारत का इनकार
भारत ने बार-बार यह दोहराया है कि संघर्षविराम किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं, बल्कि दोनों देशों के DGMO-to-DGMO सैन्य संवाद के जरिए हुआ। भारत के अनुसार भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया, जिसके बाद 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
क्या हैंडशेक का कोई कूटनीतिक मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम संस्कार जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में औपचारिक शिष्टाचार सामान्य प्रक्रिया होती है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा इसे “जानबूझकर की गई पहल” बताना घरेलू राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है। भारत की नीति फिलहाल स्पष्ट है—आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
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