एत्मादपुर में तेंदुआ होने की अफवाह के बाद वन विभाग की जांच और एआई से बनी फर्जी सीसीटीवी तस्वीर

तेंदुए से ज्यादा खतरनाक निकला एआई, एत्मादपुर में मची अफरा-तफरी, वायरल सीसीटीवी फोटो निकला फर्जी

आगरा समाचार

Sunday, 04 January 2026, 10:14:00 AM. Agra, Uttar Pradesh

शनिवार सुबह आगरा जिले के एत्मादपुर क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव में तेंदुआ देखे जाने की सूचना तेजी से फैल गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुपों में एक फोटो वायरल की गई, जिसे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज बताया गया। तस्वीर में तेंदुए जैसा जानवर साफ नजर आ रहा था, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए।

सुबह-सुबह फैली इस सूचना ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके का माहौल बदल दिया। खेतों पर जाने वाले किसान रुक गए, बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज किया गया और कई परिवारों ने घरों के दरवाजे बंद कर लिए। भय का आलम यह रहा कि लोग खुले स्थानों पर निकलने से भी बचने लगे।

वायरल फोटो ने बढ़ाया डर, सीसीटीवी फुटेज बताकर किया गया शेयर

ग्रामीणों के अनुसार, वायरल फोटो इतनी वास्तविक लग रही थी कि किसी को उस पर संदेह करने का अवसर ही नहीं मिला। जानवर की आंखों की चमक, शरीर पर बने धब्बे और चाल-ढाल बिल्कुल तेंदुए जैसी प्रतीत हो रही थी। कई लोगों ने इसे आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज बताकर आगे साझा किया, जिससे अफवाह और तेजी से फैलती चली गई।

सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस हरकत में

ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए एहतियातन इलाके में तेंदुआ पकड़ने का पिंजरा लगाया गया। खेतों, झाड़ियों और आबादी वाले क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की अपील की।

तकनीकी जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

कुछ घंटों की तलाश के बाद जब तेंदुए की मौजूदगी का कोई भौतिक प्रमाण नहीं मिला, तब वन विभाग ने वायरल फोटो की तकनीकी जांच कराई। विशेषज्ञों ने तस्वीर की रोशनी, शैडो, बैकग्राउंड और पिक्सल स्ट्रक्चर का विश्लेषण किया।

जांच में पाया गया कि तस्वीर में लाइटिंग और एंगल ऐसे हैं, जो किसी सामान्य सीसीटीवी कैमरे से मेल नहीं खाते। इमेज की स्पष्टता और डिटेलिंग भी संदिग्ध पाई गई।

एआई से बनाई गई थी फर्जी तस्वीर

तकनीकी पड़ताल के बाद यह साफ हो गया कि वायरल फोटो किसी तेंदुए की वास्तविक तस्वीर नहीं, बल्कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जनरेट की गई फर्जी इमेज थी। अधिकारियों के मुताबिक आधुनिक एआई टूल्स की मदद से ऐसी तस्वीरें कुछ ही सेकंड में तैयार की जा सकती हैं, जो आम लोगों को पूरी तरह असली लगती हैं।

राहत की सांस लेते ग्रामीण

जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि तेंदुए की सूचना फर्जी है, ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। पिंजरा हटाया गया और सर्च ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया। हालांकि कुछ घंटों तक गांव में डर और तनाव का माहौल बना रहा, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

अफवाह फैलाने वाले की तलाश

फर्जी सूचना सामने आने के बाद पुलिस और वन विभाग ने अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति की पहचान और तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठी जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी फोटो या वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी आपात या संदिग्ध सूचना की पुष्टि संबंधित विभाग से करने के बाद ही उसे साझा करें, ताकि एआई के दुरुपयोग से फैलने वाली अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।

✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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