इंटरनेशनल डेस्क, Taj News | Updated: Wednesday, 21 Jan 2026 04:10 PM IST
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपनी ‘अनप्रे डिक्टेबल’ (जिसकी भविष्यवाणी न की जा सके) कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बीते 24 घंटों में उन्होंने जो किया, उसने वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) में भूचाल ला दिया है। एक ही दिन में ट्रंप ने पांच ऐसे दांव खेले हैं, जिन्होंने यूरोप से लेकर एशिया और हिंद महासागर तक तनाव पैदा कर दिया है। फ्रांस पर 200% टैरिफ लगाना हो, ग्रीनलैंड को खरीदने की पुरानी जिद हो, या फिर नोबेल कमेटी को धमकाना—ट्रंप के इन फैसलों ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर व्हाइट हाउस में चल क्या रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने एक ही दिन में पांच अलग-अलग मोर्चों पर ‘बम’ फोड़े हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये पांच कांड क्या हैं और दुनिया पर इनका क्या असर होने वाला है।
1. ग्रीनलैंड खरीदने की जिद और ‘AI मैप’
ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला कदम ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर रहा। अपने पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने डेनमार्क से इस विशाल द्वीप को खरीदने की इच्छा जताई थी, जिसे तब मजाक में उड़ा दिया गया था। लेकिन इस बार ट्रंप ने इसे अगले स्तर पर पहुंचा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का एक AI जनरेटेड मैप शेयर किया, जिसमें वहां बड़े-बड़े अमेरिकी ट्रम्प टावर और अमेरिकी झंडा लहराते हुए दिखाया गया है।
ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है और वहां मौजूद दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) पर चीन का कब्जा नहीं होने दिया जा सकता। खबर है कि ट्रंप प्रशासन ने डेनमार्क को एक नई और भारी-भरकम धनराशि का प्रस्ताव भेजा है। डेनमार्क ने इसे फिर से खारिज किया तो कूटनीतिक रिश्ते बिगड़ने तय हैं।
2. फ्रांस पर 200% टैरिफ का हंटर
यूरोप के साथ व्यापार युद्ध (Trade War) का आगाज करते हुए ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि अगर फ्रांस अमेरिकी टेक कंपनियों (जैसे गूगल, फेसबुक) पर डिजिटल टैक्स नहीं हटाता, तो अमेरिका फ्रांस से आने वाली वाइन, चीज़ (Cheese) और लग्जरी हैंडबैग्स पर 200% आयात शुल्क (Tariff) लगाएगा।
इस फैसले से यूरोपीय यूनियन (EU) में हड़कंप मच गया है। 200% टैरिफ का मतलब है कि अमेरिकी बाजार में फ्रेंच सामान तीन गुना महंगा हो जाएगा, जिससे फ्रांस की अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। ट्रंप का साफ संदेश है—”अमेरिका फर्स्ट, बाकी सब बाद में।”
3. नोबेल कमेटी को लिखी धमकी भरी चिट्ठी
तीसरा बड़ा विवाद नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) को लेकर है। ट्रंप ने नॉर्वे की नोबेल कमेटी को एक सख्त पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मांग की है कि ओबामा को मिले शांति पुरस्कार के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और यह बताया जाए कि उन्हें (ट्रंप को) अब तक यह पुरस्कार क्यों नहीं मिला, जबकि उन्होंने मध्य-पूर्व में ‘अब्राहम अकॉर्ड’ जैसे ऐतिहासिक समझौते कराए थे।
ट्रंप ने परोक्ष रूप से चेतावनी दी है कि अगर कमेटी में पारदर्शिता नहीं आई, तो अमेरिका नॉर्वे के साथ अपने संबंधों और फंडिंग पर पुनर्विचार कर सकता है। किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एक स्वतंत्र पुरस्कार समिति को इस तरह धमकाना इतिहास में पहली बार देखा गया है।
4. डिएगो गार्सिया डील पर लगाया वीटो
हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक द्वीप डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच जो समझौता हुआ था, ट्रंप ने उसे मानने से इनकार कर दिया है। ब्रिटेन ने यह द्वीप मॉरीशस को सौंपने का फैसला किया था, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वहां स्थित अमेरिकी सैन्य बेस की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
ट्रंप का कहना है कि अगर यह द्वीप मॉरीशस के पास गया, तो चीन वहां अपनी पैठ बना सकता है। ट्रंप के इस वीटो से ब्रिटेन की सरकार मुश्किल में आ गई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अदालत पहले ही मॉरीशस के पक्ष में फैसला दे चुकी है। यह कदम हिंद महासागर में भारत के लिए भी मायने रखता है, क्योंकि डिएगो गार्सिया चीन पर नजर रखने के लिए अहम है।
5. कनाडा और मैक्सिको बॉर्डर पर नई दीवार का नक्शा
पांचवां फैसला इमिग्रेशन और बॉर्डर को लेकर है। ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको, दोनों सीमाओं के लिए एक नई और ‘स्मार्ट वॉल’ (Smart Wall) का खाका पेश किया है। इसमें केवल कंक्रीट की दीवार नहीं, बल्कि ड्रोन, सेंसर और AI निगरानी तंत्र शामिल होगा। ट्रंप ने कहा है कि इसका पूरा खर्च पड़ोसी देशों से ट्रेड टैरिफ के जरिए वसूला जाएगा। इससे अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों (कनाडा और मैक्सिको) के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं।
क्या है ट्रंप की रणनीति?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ‘केओस थ्योरी’ (Chaos Theory) पर काम कर रहे हैं। वे एक साथ कई मोर्चों पर संकट पैदा करते हैं ताकि सामने वाला पक्ष बातचीत की टेबल पर दबाव में आए। ग्रीनलैंड हो या टैरिफ, हर फैसला एक ‘सौदा’ (Deal) हासिल करने के लिए है। ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके राज में अमेरिका पारंपरिक कूटनीति के नियमों से नहीं बंधेगा। अगले कुछ हफ्ते दुनिया के लिए काफी उथल-पुथल भरे हो सकते हैं।
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