Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 25 Feb 2026, 04:30 pm IST
Taj News International Desk
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वाशिंगटन डीसी (Washington DC): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) और भारत-पाक संघर्ष को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने पूरी दुनिया की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने बुधवार को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के सामने अपने वार्षिक ‘स्टेट ऑफ द यूनियन एड्रेस 2026’ (State of the Union 2026) के दौरान कहा कि अगर उन्होंने सही समय पर हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो भारत और पाकिस्तान के बीच एक विनाशकारी परमाणु युद्ध छिड़ जाता। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि ट्रंप ने खुले मंच से दावा किया कि इस भारत-पाक संघर्ष के दौरान उनके दखल के कारण ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) की जान बच पाई।
स्टेट ऑफ द यूनियन में ट्रंप ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक बयानबाजी और खुद को एक ‘पीसमेकर’ (Peacemaker) के रूप में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। बुधवार को यूएस कांग्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाईं। इसी दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया में हुए भीषण भारत-पाक संघर्ष का जिक्र छेड़ दिया। ट्रंप ने कहा, “हालात पूरी तरह से न्यूक्लियर वॉर (Nuclear War) में बदल सकते थे। पाकिस्तान और भारत एक भयानक न्यूक्लियर वॉर के मुहाने पर खड़े थे। मेरे दखल से दोनों देशों के बीच संभावित न्यूक्लियर टकराव टल गया। 35 मिलियन लोगों ने कहा कि अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मर जाते।”
ट्रंप का यह बयान सोशल मीडिया और वैश्विक समाचार एजेंसियों पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने खुद को एक ऐसे वैश्विक नेता के रूप में पेश किया है, जिसके एक इशारे पर दुनिया के दो बड़े परमाणु संपन्न देशों के बीच शांति स्थापित हो गई।
#WATCH | Addressing the 2026 State of the Union, United States President Donald Trump says, "… In my first 10 months, I ended eight wars… Pakistan and India would have had a nuclear war. 35 million people said the Prime Minister of Pakistan would have died if it were not for… pic.twitter.com/GnrgJKtjID
— ANI (@ANI) February 25, 2026
मई 2025 का पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’
डोनाल्ड ट्रंप अपने संबोधन में जिस भीषण भारत-पाक संघर्ष की बात कर रहे थे, उसकी जड़ें मई 2025 में हुए एक दर्दनाक आतंकी हमले से जुड़ी हैं। मई 2025 में कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने एक कायराना हमला किया था, जिसमें 26 बेगुनाह आम नागरिकों की जान चली गई थी। इस नरसंहार के बाद पूरे भारत में भारी आक्रोश था और भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि आतंकियों के आकाओं को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) लॉन्च किया था। भारत ने एलओसी (LoC) पार करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी लॉन्च पैड्स और ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए थे। इस सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की कमर तोड़ कर रख दी थी। भारतीय वायुसेना और थल सेना के इस संयुक्त ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया था और दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर आमने-सामने आ गई थीं। यह भारत-पाक संघर्ष इतना भयंकर था कि पूरी दुनिया को डर सताने लगा था कि कहीं यह युद्ध परमाणु हमले (Nuclear Escalation) में तब्दील न हो जाए।
शहबाज शरीफ की जान और 35 मिलियन लोगों का दावा
ट्रंप ने अपने भाषण में विशेष रूप से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का जिक्र किया। जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर आतंकियों को नेस्तनाबूद किया, तो पाकिस्तानी सत्ता और सेना में भारी खलबली मच गई थी। ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत का पलटवार इतना प्रचंड था कि अगर अमेरिका बीच में आकर कूटनीतिक दबाव नहीं बनाता, तो पाकिस्तान का पूरा नेतृत्व खतरे में पड़ जाता। हालांकि, ट्रंप ने जो “35 मिलियन” (साढ़े तीन करोड़) लोगों का आंकड़ा दिया है, वह किस संदर्भ में है, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन उनका सीधा इशारा इस बात पर था कि भारत-पाक संघर्ष को रोकने में उनकी भूमिका एक ‘मसीहा’ जैसी रही है।
80 बार एक ही बात: ट्रंप का सियासी ‘नैरेटिव’
यह कोई पहला मौका नहीं है जब रिपब्लिकन प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सांसदों और जनता के सामने इस भारत-पाक संघर्ष में सीजफायर (Ceasefire) कराने का क्रेडिट (Credit) लिया हो। वाशिंगटन के राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल के महीनों में ट्रंप ने 80 से ज्यादा बार यह दावा किया है कि इस खूनी लड़ाई को रोकने के लिए वे और केवल वे ही जिम्मेदार थे। ट्रंप अक्सर अपनी रैलियों और साक्षात्कारों में अलग-अलग मौकों पर, इस भारत-पाक संघर्ष के दौरान गिराए गए लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) के बारे में अलग-अलग आंकड़े भी पेश करते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कभी भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे किस देश (भारत या पाकिस्तान) के एयरक्राफ्ट के गिरने की बात कर रहे थे।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इस भारत-पाक संघर्ष का जिक्र अपनी घरेलू राजनीति को चमकाने के लिए कर रहे हैं। वे अमेरिकी जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने दुनिया भर के युद्धों को रोका है, जबकि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के समय में दुनिया युद्ध की आग में झुलस रही थी। ट्रंप खुद को एक ‘डील-मेकर’ (Deal-maker) साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
क्या सच में न्यूक्लियर युद्ध के मुहाने पर था दक्षिण एशिया?
जब भी भारत-पाक संघर्ष बढ़ता है, तो दुनिया भर के देशों, खासकर अमेरिका और रूस की चिंताएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि दोनों ही देश घोषित परमाणु शक्तियां हैं। मई 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान निश्चित रूप से तनाव अपने चरम पर था। भारतीय सेना किसी भी हद तक जाने को तैयार थी। ऐसे में बैक-चैनल डिप्लोमेसी (Back-channel diplomacy) के जरिए अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बनाया था कि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाए ताकि भारत को अपना सैन्य अभियान रोकने पर विचार करने का मौका मिले। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा यही स्पष्ट किया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है और आतंकवाद के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति किसी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होती।
फिलहाल, ट्रंप के इस अतिशयोक्तिपूर्ण (Exaggerated) बयान ने एक बार फिर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को वैश्विक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब देखना यह है कि ट्रंप के इस सनसनीखेज दावे पर भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों की तरफ से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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