Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri resignation poster protest UGC bill Shankaracharya assault news 2026

स्टेट डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Monday, 26 Jan 2026 08:15 PM IST

बरेली (Bareilly): उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Bareilly City Magistrate Alankar Agnihotri) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। गणतंत्र दिवस के दिन एक पीसीएस अधिकारी का इस तरह बागी तेवर अपनाना प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता और केंद्र सरकार के नए यूजीसी बिल (UGC Bill) को अपने इस्तीफे की मुख्य वजह बताया है। उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे ‘ब्राह्मण विरोधी’ करार दिया है।

HIGHLIGHTS
  1. बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा, हाथ में पोस्टर लेकर किया प्रदर्शन।
  2. प्रयागराज में शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई और शिखा पकड़कर घसीटने से थे आहत।
  3. नए UGC बिल को बताया ‘काला कानून’, कहा- सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ है साजिश।
  4. सरकार पर लगाया ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का आरोप, ब्राह्मण नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल।

हाथ में पोस्टर लेकर आवास के बाहर प्रदर्शन

सोमवार को बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गई। इस तस्वीर में वह अपने सरकारी आवास के बाहर एक पोस्टर लेकर खड़े हैं। पोस्टर पर लिखा है- “#UGC_Roll_Back… काला कानून वापस लो। संतों का यह अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” इसके साथ ही उन्होंने भाजपा विरोधी नारे भी लिखे हैं। 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा जिलाधिकारी, राज्यपाल और चुनाव आयोग को ईमेल के जरिए भेज दिया है। एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर रहते हुए सरकार के खिलाफ ऐसा खुला मोर्चा खोलना एक बड़ी घटना मानी जा रही है।

शंकराचार्य और बटुकों के अपमान से आहत

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में प्रयागराज माघ मेले की घटना का विस्तार से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, “वर्ष 2026 के प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या (18 जनवरी) के स्नान के दौरान स्थानीय प्रशासन ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य बटुक ब्राह्मणों के साथ मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को धक्का दिया गया और बटुकों की शिखा (चोटी) पकड़कर उन्हें घसीटा गया।” अग्निहोत्री ने कहा कि शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की संस्कृति का प्रतीक है। प्रशासन द्वारा किया गया यह कृत्य न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि यह एक ‘देशव्यापी ब्राह्मण अपमान’ है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देती हैं।

यूजीसी बिल: ‘सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ साजिश’

इस्तीफे का दूसरा बड़ा कारण उन्होंने 13 जनवरी 2026 को जारी यूजीसी के नए गजट नोटिफिकेशन को बताया है। बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि भारत का राजपत्र संख्या 50/सी.बी.डी. एल-अ-13012026-269317 सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ एक साजिश है। उन्होंने कहा, “इस गजट के पैरा 2, 5, 6 और 7 में जो प्रावधान किए गए हैं, वे भेदभावपूर्ण हैं। इसमें सामान्य वर्ग (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार) के छात्रों को एक ‘स्वघोषित अपराधी’ की तरह देखा गया है।” अग्निहोत्री ने आशंका जताई कि इस कानून के तहत बनने वाली ‘समता समिति’ (Equality Committee) का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या या द्वेष के कारण सामान्य वर्ग के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के खिलाफ फर्जी शिकायतें की जा सकती हैं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए वापस लेने की मांग की है।

‘ब्राह्मण सांसदों और विधायकों की चुप्पी शर्मनाक’

मीडिया से बात करते हुए बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी ही सरकार और सत्ताधारी दल के ब्राह्मण नेताओं को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार में एक सुनियोजित ‘ब्राह्मण विरोधी अभियान’ चल रहा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “जो ब्राह्मण सांसद और विधायक समाज के नाम पर वोट मांगते हैं और मंत्रालय हासिल करते हैं, वे आज चुप क्यों हैं? प्रयागराज में संतों पर लाठियां बरसाई गईं, लेकिन किसी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। कल तक जिनकी चरण वंदना की जाती थी, आज उनकी ही सत्ता में उनकी उपेक्षा हो रही है।”

आईआईटी बीएचयू से पढ़े हैं अलंकार अग्निहोत्री

बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की पृष्ठभूमि भी काफी प्रभावशाली रही है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के आईआईटी (IIT) से शिक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। वे महामना मदन मोहन मालवीय जी के आदर्शों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि बीएचयू की स्थापना जिन मूल्यों पर हुई थी और जिस आत्मबल के साथ मालवीय जी ने काम किया था, उसी प्रेरणा से वे आज यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे अपनी संस्कृति और समाज के अपमान को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकते।

प्रशासन में खलबली, इस्तीफे पर निर्णय बाकी

सिटी मजिस्ट्रेट के इस कदम से बरेली से लेकर लखनऊ तक प्रशासन में खलबली मच गई है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन एक वरिष्ठ अधिकारी का इस्तीफा देना सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। फिलहाल, जिला प्रशासन या शासन की ओर से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने या खारिज करने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि उन पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई भी हो सकती है।

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