आरोग्य वन: अब हाईवे सिर्फ सड़क नहीं, दवा भी देंगे! NHAI की नई पहल पर बृज खंडेलवाल का विशेष आलेख

आर्टिकल Desk, Taj News | Thursday, April 09, 2026, 03:48:06 PM IST

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Brij Khandelwal Writer
बृज खंडेलवाल
वरिष्ठ पत्रकार
एवं पर्यावरण विश्लेषक
वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक बृज खंडेलवाल ने अपने इस बेहद शानदार आलेख में ‘भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण’ (NHAI) की नई ‘आरोग्य वन’ पहल का गहरा विश्लेषण किया है। दरअसल, उन्होंने बताया है कि कैसे अब हाईवे के किनारे सिर्फ धूल नहीं उड़ेगी, बल्कि औषधीय पेड़ों के रूप में लोगों को ‘सेहत का पैगाम’ भी मिलेगा। इसके अलावा, उन्होंने विकास की अंधी दौड़ में कटते जंगलों और पर्यावरण बचाने की इस अहम कोशिश पर भी सटीक टिप्पणी की है। इसलिए, बिना किसी देरी के पढ़िए यह विचारोत्तेजक आलेख:
HIGHLIGHTS
  1. NHAI ने 9 अप्रैल 2026 को पूरे देश में ‘आरोग्य वन’ पहल की शानदार शुरुआत की है, जिसके तहत हाईवे के किनारे औषधीय पेड़ लगाए जाएंगे।
  2. पहले चरण में 11 राज्यों की 62.8 हेक्टेयर ज़मीन पर नीम, आंवला और जामुन जैसे 67,462 ‘इलाज वाले’ पेड़ लगाए जाने की पूरी तैयारी है।
  3. दरअसल, विकास और नई सड़कों की दौड़ में प्रकृति बहुत तेज़ी से हांफने लगी थी, जिसे अब ‘थीमैटिक मेडिसिनल ट्री प्लांटेशन’ के ज़रिए वापस ज़िंदा किया जा रहा है।
  4. हकीकत में, सरकार का मकसद अब सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि आयुर्वेद को बढ़ावा देना और हाईवे को ‘लाइफ कॉरिडोर’ (Life Corridor) बनाना है।

आरोग्य वन
अब हाईवे सिर्फ़ सड़क नहीं, दवा भी देंगे。
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बृज खंडेलवाल
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9 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत ने ‘आरोग्य वन’ पहल शुरू की। राजमार्गों के किनारे अब औषधीय पेड़ों के जंगल उगेंगे। सफ़र होगा, और साथ में सेहत का पैग़ाम भी मिलेगा。
सड़कें दौड़ती थीं। अब पेड़ भी साथ दौड़ेंगे। हवा में सिर्फ़ धूल नहीं, शिफ़ा की ख़ुशबू भी होगी。
National Highways Authority of India यानी NHAI, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत एक अहम संस्था है। 1995 में बनी। आज देश के लगभग 1,32,500 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों में से 92,000 किलोमीटर से ज़्यादा इसकी निगरानी में हैं。
पिछले साल 2025-26 में 5,313 किलोमीटर नई सड़कें बनीं। लक्ष्य से 15 फ़ीसदी ज़्यादा। काग़ज़ पर यह तरक़्क़ी है। ज़मीनी हक़ीक़त में? कुछ सवाल भी हैं। सड़क बनी, तो जंगल कटा। वहां बढ़े, तो धुआँ बढ़ा। रफ़्तार आई, तो ख़ामोशी भागी। यही कसक ‘आरोग्य वन’ की वजह बनी। विकास की दौड़ में प्रकृति हाँफने लगी थी। अब उसे थोड़ा सहारा दिया जा रहा है।

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योजना क्या है? सरल लफ़्ज़ों में, जहाँ हाईवे के किनारे खाली ज़मीन है, वहाँ औषधीय पेड़ लगाए जाएंगे। इसे थीमैटिक मेडिसिनल ट्री प्लांटेशन कहा गया है। पहले चरण में 11 राज्यों की 62.8 हेक्टेयर ज़मीन पर 67,462 पेड़ लगाए जाएंगे। मानसून 2026 में असली इम्तिहान होगा। बारिश आई, तो पौधे भी मुस्कुराएँगे। कौन से पेड़ लगेंगे? नीम होगा, कड़वा, मगर कारगर। आँवला होगा, खट्टा, मगर फ़ायदेमंद। जामुन होगा, मीठा, मगर शुगर का दुश्मन। कुल 36 तरह के पेड़ चुने गए हैं।
हाईवे अब ‘ग्रीन कॉरिडोर’ ही नहीं, ‘लाइफ़ कॉरिडोर’ बन सकते हैं। यह पहल सिर्फ़ पेड़ लगाने की नहीं। यह एक पैग़ाम है; “तरक़्क़ी और तबीयत, दोनों साथ चल सकते हैं।” आरोग्य वन एक तरह का खुला मदरसा होंगे; जहाँ पेड़ किताब हैं, और छाँव उनका सबक। Green Highways Policy 2015 पहले से ही हरित गलियारों की बात करती है। ‘आरोग्य वन’ उसी क़दम को आगे बढ़ाता है। पेड़ लगाना आसान है। उन्हें बचाना, असल इम्तिहान है। सड़कें बनाना हुनर है। प्रकृति बचाना ज़िम्मेदारी।

Pawan Singh

Pawan Singh

Chief Editor, Taj News
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