
क्राइम डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Friday, 06 Feb 2026 10:30 AM IST
आगरा (Agra): ‘प्यार और जंग में सब जायज है’—यह कहावत अक्सर सुनी जाती है, लेकिन जब प्यार नफरत में बदलता है, तो इंसान किस हद तक गिर सकता है, इसका खौफनाक उदाहरण आगरा में देखने को मिला। थाना हरी पर्वत क्षेत्र में एक महिला ने अपने प्रेमी को धोखे से घर बुलाया, नशीली चाय पिलाई और फिर उसके ऊपर तेजाब (Acid) उड़ेल दिया। 5 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार कोर्ट ने इंसाफ की मुहर लगाते हुए आरोपी महिला को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है।

क्या था 24 मार्च 2021 का वो खौफनाक मंजर?
मामला करीब 5 साल पुराना है। मृतक देवेंद्र शास्त्री (Devendra Shastri) आगरा के पुरम खंदारी में किराए पर रहते थे और पुष्पांजलि अस्पताल में नौकरी करते थे। उनकी दोस्ती सोनम पांडेय (Sonam Pandey) से थी, जो करीब 4 साल पुरानी थी।
- साजिश की शुरुआत: 24 मार्च 2021 को सोनम ने देवेंद्र को फोन किया। उसने बहाना बनाया कि उसके घर का पंखा खराब हो गया है, जिसे ठीक करने के लिए उसने देवेंद्र को बुलाया।
- विश्वासघात: देवेंद्र को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिसे वह दोस्त मानता है, वह उसकी जान लेने पर उतारू है। घर पहुंचने पर सोनम ने उसे चाय पिलाई। चाय में नशीला पदार्थ मिला हुआ था, जिससे देवेंद्र बेहोश हो गया।
- तेजाब से हमला: जैसे ही देवेंद्र अचेत हुआ, सोनम ने उसके ऊपर तेजाब डाल दिया। तेजाब से बुरी तरह झुलसने के कारण देवेंद्र तड़प उठा। उसे पहले पुष्पांजलि और फिर दिल्ली रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
11 गवाह और अभियोजन की दलीलें
घटना के बाद मृतक के मित्र शिवम पांडेय ने देवेंद्र की मां कुसमा देवी को जानकारी दी, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और मामला कोर्ट पहुंचा।
- अदालत का फैसला: विशेष न्यायाधीश एस.सी. की अदालत में अभियोजन पक्ष ने 11 गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने सोनम पांडेय को हत्या और तेजाब फेंकने का दोषी माना।
- सजा: कोर्ट ने सोनम को आजीवन कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि हत्या और अंग-भंग की सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
👁️🗨️ ताज न्यूज़ का विश्लेषण (Expert View)
यह मामला अपराध की दुनिया में एक ‘दुर्लभ श्रेणी’ (Rare Category) का है। भारत में आमतौर पर तेजाब हमलों में महिलाएं पीड़ित होती हैं और पुरुष आरोपी। लेकिन यहां एक महिला ने जिस क्रूरता से इस घटना को अंजाम दिया, वह यह साबित करता है कि अपराध का कोई जेंडर नहीं होता। मनोवैज्ञानिक पहलू: यह ‘प्रतिशोध’ (Revenge) का चरम रूप है। निजी मतभेदों के चलते किसी को धोखे से बुलाकर मार डालना यह दर्शाता है कि आरोपी महिला मानसिक रूप से कितनी अस्थिर और हिंसक हो चुकी थी। कोर्ट का यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देगा कि तेजाब का इस्तेमाल करने वालों के लिए कानून में कोई रियायत नहीं है, चाहे आरोपी पुरुष हो या महिला।
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