Reported by: Taj News Bureau | Edited by: Pawan Singh | tajnews.in | 15 March 2026, 07:15 PM IST
आगरा (Agra): डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। आगरा विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को छिपाने का एक गंभीर आरोप विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगा है। पिछले तीन वर्षों में हुई वित्तीय अनियमितताओं, संदिग्ध निविदाओं और नियुक्तियों के विवरण को लेकर मांगी गई आरटीआई (RTI) के जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया है। इस अपारदर्शी रवैये के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) अलीगढ़ के छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हिमांक अरोरा ने अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील दायर करने का सख्त निर्णय लिया है।
आगरा विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार: जन सूचना अधिकारी ने ‘तृतीय पक्ष’ बताकर किया खारिज
दरअसल, 25 फरवरी 2026 को आरटीआई के माध्यम से विश्वविद्यालय से वर्ष 2022-23 से लेकर 2024-25 के बीच हुई समस्त निविदाओं, चयनित फर्मों के नाम, भुगतान विवरण, ऑडिट आपत्तियों और नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया से संबंधित प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं। इसके जवाब में विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी (PIO) ने 11 मार्च 2026 को अपना जवाब देते हुए सूचना देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि मांगी गई जानकारी ‘धारा 8(1)(j)’ के तहत आती है और यह ‘तृतीय पक्ष’ की व्यक्तिगत जानकारी है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना, सार्वजनिक धन का विवरण निजी कैसे?
छात्र नेता हिमांक अरोरा ने विश्वविद्यालय के इस जवाब को पूरी तरह से विधि-विरुद्ध और हास्यास्पद बताया है। उन्होंने तर्क दिया है कि निविदाएं, ऑडिट रिपोर्ट और नियुक्तियां सरकारी धन और लोक नीति से जुड़ी होती हैं। इन्हें ‘व्यक्तिगत जानकारी’ बताकर छिपाना स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन है। ‘सीबीएसई बनाम आदित्य बंदोपाध्याय’ मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि सार्वजनिक निकायों की पारदर्शिता ‘लोक नीति’ का अहम हिस्सा है। हिमांक ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर सूचना न देकर भ्रष्टाचार की शिकायतों और वित्तीय गड़बड़ियों को दबाने का प्रयास कर रहा है।
राज्य सूचना आयोग तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी, जवाबदेही तय करना प्राथमिकता
अपनी भावी रणनीति स्पष्ट करते हुए हिमांक अरोरा ने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना का गला घोंट रहा है। हम प्रथम अपील दायर कर रहे हैं। यदि वहां से भी न्यायपूर्ण विवरण प्राप्त नहीं होता है, तो हम इस मामले को राज्य सूचना आयोग तक ले जाएंगे और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित कराएंगे।” डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU) में एक छात्र नेता और सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते पारदर्शिता लाना उनकी प्राथमिकता है। अब देखना यह है कि आगरा विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के इन आरोपों और आरटीआई विवाद पर आगे क्या प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।
Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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