Agra Smart City negligence water pipeline inside sewer line Tajganj area Jal Kal department refused handover

Published: Thursday, 08 January 2026, 09:15 AM IST | Agra

आगरा में सीवर लाइन में पानी की पाइपलाइन (Water pipeline inside sewer line in Agra) डालकर स्मार्ट सिटी कंपनी ने हजारों लोगों की जान को खतरे में डाल दिया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में हुए जल संकट की चर्चाओं के बीच, आगरा के ताजगंज इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 143 करोड़ की लागत से हुए काम में बड़ी धांधली करते हुए सीवर के मैनहोल के बीच से ही पानी की लाइन गुजार दी गई है। अगर यह लाइन लीक होती है, तो सीधे घरों में सीवर का पानी पहुंचेगा।

🔥 खबर की मुख्य बातें (Highlights):
  • लापरवाही: ताजगंज में सीवर के मैनहोल के अंदर से बिछा दी पानी की लाइन।
  • खतरा: लीकेज हुआ तो घरों में पहुंचेगा जहरीला पानी, जलकल ने हैंडओवर लेने से किया इनकार।
  • इतिहास: 1993 में ऐसी ही गलती से खटीकपाड़ा में गई थी 21 लोगों की जान।
Agra Smart City negligence water pipeline inside sewer line Tajganj area Jal Kal department refused handover

आगरा में सीवर लाइन में पानी की पाइपलाइन: एलाइनमेंट बचाने का खेल

ताजगंज के नवादा और नंदा बाजार इलाके में स्मार्ट सिटी कंपनी ने 350 एमएम व्यास की पानी की पाइपलाइन बिछाई है। हैरानी की बात यह है कि एलाइनमेंट का खर्च बचाने और जल्दबाजी के चक्कर में कंपनी ने आगरा में सीवर लाइन में पानी की पाइपलाइन डाल दी। एक ही कंपनी ने दोनों लाइनें बिछाईं, जिसका खामियाजा अब जनता को भुगतना पड़ सकता है। नवादा में जब सीवर उफना, तब सफाई के दौरान यह राज खुला कि मैनहोल के अंदर पानी की लाइन पड़ी है।

जलकल महाप्रबंधक ने जताई नाराजगी, हैंडओवर से इनकार

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जलकल विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। महाप्रबंधक अरूणेंद्र राजपूत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक आगरा में सीवर लाइन में पानी की पाइपलाइन वाली खामियों को दूर नहीं किया जाता, विभाग इस प्रोजेक्ट को हैंडओवर नहीं लेगा। पार्षदों के साथ हुई बैठक में दूषित जलापूर्ति को लेकर भारी हंगामा हुआ। लोहामंडी, कमला नगर, और सिकंदरा जैसे इलाकों से भी गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं।

33 साल बाद भी न्याय का इंतजार

आगरा के लोग 1993 की उस काली तारीख को नहीं भूले हैं, जब खटीकपाड़ा में गंदा पानी पीने से 21 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग बीमार हुए थे। 33 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है। अब स्मार्ट सिटी की यह नई गलती उसी इतिहास को दोहराने जैसा काम कर रही है। पीड़ितों ने अब न्याय के लिए हाई कोर्ट की शरण ली है, जिसकी सुनवाई मार्च में होनी है।

✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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By Thakur Pawan Singh

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