सिटी/हेल्थ डेस्क, Taj News | Updated: Thursday, 22 Jan 2026 03:30 PM IST
आगरा: ताजनगरी आगरा में सड़कों पर सफर करना और पैदल चलना जानलेवा साबित हो रहा है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले साल के मुकाबले 31% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है । इन भयावह आंकड़ों को देखते हुए जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य और आईएमए (IMA) ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विशेषज्ञों ने तत्काल प्रभाव से जिले में ‘पैदल यात्री सुरक्षा ऑडिट’ और यमुना एक्सप्रेसवे पर ट्रामा सुविधाओं को अपग्रेड करने की मांग की है।

Timeline: आगरा में हादसों और लापरवाही का घटनाक्रम
- 19 नवंबर 2025: मंडल सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एम्बुलेंस की तैनाती और ट्रामा सेंटर की तैयारियों को लेकर निर्देश जारी किए गए ।
- 16 दिसंबर 2025: यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा। 19 लोगों की मौत और 92 घायल। एम्बुलेंस पहुंचने में 21 मिनट की देरी हुई ।
- 19 दिसंबर 2025: डीजीपी उत्तर प्रदेश ने कोहरे को लेकर एडवाइजरी जारी की और मेडिकल तैयारियों पर जोर दिया ।
- 21 जनवरी 2026: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने मंडल आयुक्त को पत्र लिखकर ट्रामा सेवाओं में सुधार और कैशलेस इलाज की मांग की ।
- 22 जनवरी 2026: डॉ. संजय चतुर्वेदी ने जिले भर में ‘पैदल यात्री सुरक्षा अवसंरचना ऑडिट’ (Pedestrian Infrastructure Audit) के लिए औपचारिक प्रस्ताव सौंपा ।
पैदल यात्रियों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बना आगरा

वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ और जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने समिति के अध्यक्ष को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इसमें बताया गया है कि 2025 में जिले में 684 सड़क मौतें हुईं । सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि असुरक्षित बुनियादी ढांचा पैदल यात्रियों की मौत का सबसे बड़ा कारण है ।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि नेशनल हाईवे-2, एनएच-44 और आगरा बाईपास पर करोड़ों की लागत से बने फुट ओवरब्रिज (FOB) और अंडरपास ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गए हैं ।
- समस्या: इनमें लिफ्ट, रैंप और लाइटिंग की व्यवस्था नहीं है।
- असर: बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मरीज और दिव्यांग इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते और सड़क पार करते समय हादसों का शिकार हो रहे हैं ।
- मांग: जिले भर में तत्काल एक ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए और आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 (RPWD Act) के तहत सुगम रास्ता सुनिश्चित किया जाए ।
यमुना एक्सप्रेसवे: 21 मिनट की देरी और 19 लाशें
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) आगरा शाखा ने 16 दिसंबर 2025 को यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दिल दहला देने वाले हादसे का हवाला देते हुए प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई थी । IMA के अध्यक्ष डॉ. पंकज नगायच और सचिव डॉ. रजनीश मिश्रा द्वारा सौंपे गए पत्र में खुलासा हुआ है कि हादसे के वक्त एम्बुलेंस पहुंचने में 21 मिनट लग गए थे, जो ‘गोल्डन ऑवर’ के सिद्धांतों के खिलाफ है ।
IMA ने रखीं ये 4 बड़ी शर्तें
मेडिकल बॉडी ने भविष्य में जान बचाने के लिए प्रशासन के सामने ठोस प्रस्ताव रखे हैं:
- ALS एम्बुलेंस: आगरा-मथुरा खंड (80 किमी) के हर टोल प्लाजा पर ‘एडवांस लाइफ सपोर्ट’ (ALS) एम्बुलेंस तैनात हों, जिनका रिस्पांस टाइम 5-10 मिनट हो ।
- ट्रामा सेंटर: मथुरा जिला अस्पताल या सीएचसी बलदेव को तत्काल ‘ट्रामा सेंटर’ घोषित किया जाए ।
- कैशलेस इलाज: एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए 2 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज (पहले 7 दिन के लिए) अनिवार्य किया जाए, ताकि पैसों की कमी से किसी की जान न जाए ।
- मास कैजुअल्टी प्रोटोकॉल: ज्यादा मौतों वाले हादसों के लिए ‘कलर कोडेड ट्राइएज’ (Triage) सिस्टम लागू हो ।
हिट-एंड-रन मुआवजा: कागजों में सिमटी योजना
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि प्रशासन ‘हिट-एंड-रन’ (Hit-and-Run) के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में भी विफल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक आगरा जिले में मुआवजे के केवल 2 मामले ही प्रोसेस किए गए हैं । विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इन सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले समय में मौतों का आंकड़ा और बढ़ेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी ।
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