Raja Ki Mandi Labhchand Market Encroachment Supreme Court Agra

City Desk, Taj News Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Tue, 10 Feb 2026 08:15 PM IST

Raja Ki Mandi Labhchand Market Encroachment Supreme Court Agra

आगरा: शहर के सबसे व्यस्त राजा की मंडी बाजार (Raja Ki Mandi Market) में मंगलवार को एक अजीबोगरीब वाकया हुआ। पुलिस और पीएसी के पहरे में अधिकारियों की टीम ‘सड़क’ ढूंढने निकली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विवादित लाभचंद मार्केट (Labhchand Market) की एक-एक इंच जमीन नापी गई।

करीब तीन घंटे चली इस कार्रवाई के दौरान बाजार में हड़कंप मचा रहा। जांच में जो सच सामने आया, उसने प्रशासन को भी चौंका दिया है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां फुटपाथ और प्याऊ होना चाहिए था, वहां आज आलीशान धर्मलोक और चंद्रलोक होटल सीना ताने खड़े हैं।

Brief Investigation Highlights

  • Action: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर DM की संयुक्त टीम ने 3 घंटे तक की पैमाइश।
  • Big Reveal: जहां 8 फीट चौड़ा फुटपाथ और प्याऊ होना था, वहां खड़े हो गए दो होटल।
  • Violation: 1947 के पट्टे की शर्तों का उल्लंघन, आवासीय जमीन पर बना कमर्शियल कॉम्प्लेक्स।
  • Status: प्रथम दृष्टया अवैध निर्माण की पुष्टि, कोर्ट में दाखिल होगी रिपोर्ट।

डीएम के हलफनामे ने खोली पोल

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल डीएम अरविंद बंगारी के हलफनामे से चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है।

  • 1947 का पट्टा: 78 साल पहले यह जमीन ‘निवास’ (Residential) या कार्यालय के लिए लीज पर दी गई थी।
  • शर्तें: जनहित में आवंटित भूमि के सामने 8 फीट चौड़ा कंक्रीट का फुटपाथ, पशु प्याऊ और एक पार्क विकसित किया जाना था।
  • हकीकत: राजस्व विभाग की जांच में पाया गया कि फुटपाथ और प्याऊ तो गायब हैं, उनकी जगह बहुमंजिला होटल और दुकानें बना दी गई हैं।

बाजार बंद, व्यापारियों में खलबली

मंगलवार सुबह 11 बजे एडीएम नागरिक आपूर्ति अजय नारायण और एडीएम प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी के नेतृत्व में टीम पहुंची। एमजी रोड से आगरा कॉलेज की चहारदीवारी तक फीता डालकर नापजोख की गई। कार्रवाई के डर से बाजार बंद रहा। जांच टीम को प्रथम दृष्टया अवैध निर्माण और अतिक्रमण मिला है।

“निर्माण से पहले ली थीं अनुमतियां”

दूसरी ओर, पट्टाधारक प्रदीप जैन का कहना है कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा, “नगर पालिका से पट्टे का उस समय डेढ़ गुना राशि से भुगतान हुआ था। सभी निर्माण स्वीकृतियों के बाद हुए हैं और हम 1947 से टैक्स दे रहे हैं। हमारे खिलाफ झूठी याचिका दायर की गई है।”

अब सबकी निगाहें प्रशासन की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं। अगर कोर्ट ने इसे सड़क माना, तो राजा की मंडी के इस हिस्से का भूगोल बदल सकता है।

Hotel Dharmlabh
Raza ki Mandi Market, Agra

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