
सिटी डेस्क, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sunday, 08 Feb 2026 09:30 AM IST
आगरा (Agra News): ताजनगरी आगरा में बढ़ते वायु प्रदूषण और गिरते भूजल स्तर ने अब एक गंभीर चिंता का रूप ले लिया है। विशेष रूप से राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी आंधियां और सूक्ष्म कण (Particulate Matter) न केवल विश्व धरोहर ताजमहल की चमक फीकी कर रहे हैं, बल्कि आम जनता की सेहत के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आगरा जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने एक बड़ी पहल की है। उन्होंने ‘टीटीजेड के गेटवे’ यानी फतेहपुर सीकरी और आस-पास के क्षेत्रों में जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हम हवा में जहर घोलने वाले कणों को सीमा पर ही नहीं रोकेंगे, तब तक आगरा की हवा साफ नहीं होगी। इसके लिए उन्होंने ऐतिहासिक तेरह मोरी और खनुआ बांध की मरम्मत और उनमें जल भराव को अनिवार्य बताया है।

हवा और पानी की जंग में ऐतिहासिक धरोहरों का सहारा
फतेहपुर सीकरी बना धूल का ‘प्रवेश द्वार’ आगरा जनपद का फतेहपुर सीकरी विकास खंड भौगोलिक रूप से ऐसी स्थिति में है जिसे हम राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली हवाओं का ‘गेटवे’ कह सकते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर की तरफ से चलने वाली तेज हवाएं अपने साथ भारी मात्रा में अति सूक्ष्म धूलीय कण (Suspended Particulate Matter – SPM) लेकर आती हैं।
ये कण इतने बारीक (2.5 माइक्रोन या उससे कम) होते हैं कि ये आसानी से सांस के जरिए फेफड़ों में घुस जाते हैं। इसका सीधा असर फतेहपुर सीकरी, अछनेरा और अकोला ब्लॉक के ग्रामीणों की सेहत पर पड़ रहा है। साथ ही, जब ये हवाएं आगे बढ़ती हैं, तो आगरा शहर पहुंचकर ताजमहल के सफेद संगमरमर को पीला करने और उस पर खरोंच डालने (Abrasion) का काम करती हैं। डॉ. भदौरिया का मानना है कि यदि बीमारी को उसके प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाए, तो इलाज आसान हो जाता है।
सिंचाई मंत्री और टीटीजेड चेयरमैन से हस्तक्षेप की मांग समस्या की गंभीरता को देखते हुए, जिला पंचायत अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के जल शक्ति एवं सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को एक विस्तृत पत्र लिखा है। 3 फरवरी 2026 को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि सिंचाई विभाग को तुरंत प्रभाव से सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने ताज ट्रिपेजियम जोन (TTZ) अथॉरिटी के अध्यक्ष (मंडलायुक्त आगरा) से भी आग्रह किया है कि वे इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएं।
उनका तर्क स्पष्ट है: यदि हम राजस्थान से आने वाली धूल को रोकना चाहते हैं, तो हमें अपनी ज़मीन में नमी लानी होगी। सूखी धरती धूल उड़ने का सबसे बड़ा कारण है, जबकि गीली मिट्टी और जल संरचनाएं धूल को बांधकर रखती हैं।
तेरह मोरी बांध: 13 वर्ग किमी का प्राकृतिक फिल्टर सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के साथ चर्चा के दौरान डॉ. भदौरिया ने ‘तेरह मोरी बांध’ का विशेष उल्लेख किया। यह ऐतिहासिक बांध खारी नदी पर बना है और वर्ल्ड हेरिटेज साइट फतेहपुर सीकरी का एक अभिन्न अंग है। मुगल काल और उससे पहले भी यह संरचना 13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जल संचय का काम करती थी।
विडंबना यह है कि आज यह बांध अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसके गेट टूटे हुए हैं और मूल संरचना क्षतिग्रस्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस बांध की मरम्मत करवाकर इसमें मानसून के पानी को रोका जाए, तो यह एक विशाल ‘नेचुरल एयर प्यूरीफायर’ का काम करेगा। जब तक यह बांध संचालित था, पूरे ब्लॉक में हैंडपंपों का जलस्तर कभी नीचे नहीं गया और पेड़ों के पनपने की दर भी मौजूदा समय से कहीं अधिक थी। पानी की सतह हवा में मौजूद धूल के कणों को सोखने की क्षमता रखती है।
खनुआ बांध और उटंगन नदी का अस्तित्व संकट में बैठक में केवल तेरह मोरी ही नहीं, बल्कि जनपद की एक और महत्वपूर्ण जल संरचना ‘खनुआ बांध’ का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। 22 वर्ग किलोमीटर में फैला यह बांध उटंगन नदी का मुख्य स्रोत है। यह टीटीजेड क्षेत्र की सबसे बड़ी जल संचय संरचनाओं में से एक है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि राजस्थान के सिंचाई विभाग द्वारा नदी का प्रवाह रोके जाने के कारण यह बांध सूखने की कगार पर है और इसे खारिज करने जैसी स्थिति बना दी गई है। उन्होंने मंडलायुक्त से अनुरोध किया है कि इस बांध में न्यूनतम जलस्तर (Minimum Water Level) बनाए रखने के लिए राजस्थान सरकार के साथ समन्वय स्थापित किया जाए और मौके पर निरीक्षण कर उचित कार्यवाही की जाए।
सिविल सोसायटी और एएसआई का रुख सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि टीटीजेड अथॉरिटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश (M. C. Mehta v. Union of India, 1996) पर हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य ताजमहल को प्रदूषण से बचाना है। टीटीजेड का क्षेत्र 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
अनिल शर्मा ने जानकारी दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भी तेरह मोरी बांध के ऐतिहासिक महत्व को समझता है और इसके अनुरक्षण (Repair) कार्य के लिए अनुमति देने को तैयार है। लेकिन समस्या क्रियान्वयन के स्तर पर है। भारी बारिश के बावजूद यदि आगरा का भूजल स्तर नहीं सुधर रहा, तो इसका सीधा मतलब है कि हमारी जल संचय प्रणालियां (Water Harvesting Systems) ठप पड़ी हैं। प्रतिनिधि मंडल में शामिल राजीव सक्सेना और असलम सलीमी ने भी इस बात पर जोर दिया कि बिना पानी के हरियाली की कल्पना करना बेमानी है, और बिना हरियाली के धूल को रोकना असंभव।
भविष्य की रणनीति जिला पंचायत अध्यक्ष ने आश्वस्त किया है कि वह इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगी। वह जल्द ही इस पूरे विषय को, वैज्ञानिक तथ्यों और पुराने नक्शों के साथ, ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी की अगली बैठक में रखेंगी। यदि टीटीजेड के ‘गेट वे’ पर ही धूल को पानी और हरियाली की दीवार से रोक दिया जाए, तो आगरा शहर को सांस लेने के लिए साफ हवा मिल सकेगी।
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