सिटी डेस्क, Taj News | Updated: Thursday, 22 Jan 2026 08:50 PM IST
आगरा: ताजनगरी आगरा (Agra) में बंदरों का आतंक अब जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन की अनदेखी और बंदरों की बढ़ती तादाद ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। ताजा मामला शहर के शाहगंज (Shahganj) थाना क्षेत्र का है, जहां बुधवार दोपहर बंदरों के झुंड के हमले से बचने के प्रयास में एक बुजुर्ग महिला तीसरी मंजिल से नीचे गिर गईं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

कपड़े लेने गई थीं, मौत बनकर टूट पड़े बंदर
घटना वेस्ट अर्जुन नगर (West Arjun Nagar) की है। मृतका की पहचान विरमा देवी के रूप में हुई है। परिवार की बहू क्षमा देवी ने रोते हुए बताया कि बुधवार दोपहर उनकी सास छत पर सूख रहे कपड़े उतारने के लिए गई थीं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि वहां मौत उनका इंतजार कर रही है। छत पर पहले से ही 15 से 20 खूंखार बंदरों का झुंड मौजूद था। विरमा देवी को देखते ही बंदरों ने उन पर हमला बोल दिया और झपट्टा मारा। अचानक हुए इस हमले से विरमा देवी बुरी तरह घबरा गईं।
बचने के लिए पीछे हटीं और…
जान बचाने के लिए विरमा देवी ने भागने की कोशिश की और पीछे हटीं। इसी आपाधापी में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे तीसरी मंजिल की छत से नीचे, पड़ोसी के मकान की छत पर जा गिरीं। तेज धमाके की आवाज सुनकर पड़ोसी छत की तरफ दौड़े। वहां का नजारा देख उनके होश उड़ गए। विरमा देवी खून से लथपथ पड़ी थीं। पड़ोसियों ने तुरंत शोर मचाया और परिजनों को सूचना दी।
अस्पताल में तोड़ा दम
आनन-फानन में परिजन और पड़ोसी उन्हें गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सिर में गहरी चोट और अधिक खून बह जाने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया है।
एक साल में दूसरी मौत, दहशत में लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि वेस्ट अर्जुन नगर में यह कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक साल पहले भी इसी तरह बंदरों के हमले के कारण एक और महिला की छत से गिरकर मौत हो गई थी। इलाके के लोगों ने बताया कि:
- बच्चों का निकलना बंद: बंदरों के डर से बच्चों ने छतों पर खेलना और गली में निकलना बंद कर दिया है।
- घरों में कैद: महिलाएं कपड़े सुखाने या पानी की टंकी देखने के लिए भी छत पर जाने से कतराती हैं। लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं।
- अनसुनी शिकायतें: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम और प्रशासन से कई बार बंदरों को पकड़ने की गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, जबकि बंदरों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासन पर सवाल
आगरा में बंदरों का उत्पात एक बड़ी समस्या बन चुका है, लेकिन प्रशासन के पास इसका कोई ठोस समाधान नहीं है। आए दिन लोग बंदरों के काटने या उनके कारण होने वाले हादसों का शिकार हो रहे हैं। विरमा देवी की मौत ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
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