
Saturday, 03 January 2026, 02:00 AM. Agra, Uttar Pradesh
आगरा में पुलिस और जांच एजेंसियों की गंभीर लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
एक जैसे नाम के कारण 73 वर्षीय बुजुर्ग किसान को 12 साल तक बिजली चोरी के मामले में आरोपी बनाकर अदालतों के चक्कर कटवाए गए।
अब विशेष न्यायालय ने बुजुर्ग को पूरी तरह निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- एक जैसे नाम के चलते निर्दोष व्यक्ति को बना दिया गया आरोपी
- 12 साल तक अदालत, पुलिस और विभागों के चक्कर काटे
- विशेष न्यायाधीश ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल
- 73 साल की उम्र में बुजुर्ग को मिली राहत
एक जैसी पहचान ने बिगाड़ दी ज़िंदगी
अछनेरा क्षेत्र के गांव साही निवासी तुहीराम पुत्र मोहन (73 वर्ष) को बिजली चोरी के मामले में 12 वर्षों तक आरोपी बनाए रखा गया।
जबकि असल में बिजली चोरी करते पकड़ा गया व्यक्ति तुहीराम पुत्र मोना राम था।
पुलिस ने बिना सही सत्यापन किए गलत व्यक्ति को आरोपी बनाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
2012 में शुरू हुआ मामला
22 नवंबर 2012 को बिजली विभाग की टीम ने गांव साही में बकाया बिल के चलते कनेक्शन काटे थे।
29 नवंबर को चेकिंग के दौरान कुछ ग्रामीणों को कटिया डालकर बिजली चोरी करते हुए पकड़ा गया।
इसके बाद अछनेरा थाने में बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ।
जांच के दौरान पुलिस ने गलती से तुहीराम पुत्र मोहन को आरोपी बना दिया, जबकि बिजली विभाग की रिपोर्ट में नाम तुहीराम पुत्र मोना राम दर्ज था।
12 साल तक न्याय के लिए संघर्ष
तुहीराम ने बताया कि 2014 में जब अदालत से नोटिस आया, तब उन्हें पहली बार इस मुकदमे की जानकारी हुई।
उन्होंने बिजली विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बार-बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
12 वर्षों तक उन्हें अदालत के चक्कर लगाने पड़े, जिसमें समय, पैसा और सामाजिक सम्मान — तीनों की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
समाज में लगी चोरी की बदनामी
तुहीराम का कहना है कि पुलिस की लापरवाही ने उनकी सामाजिक छवि को बुरी तरह प्रभावित किया।
लोगों की नजर में वे ‘बिजली चोर’ बन गए, जबकि उनका उस मामले से कोई लेना-देना नहीं था।
उन्होंने बताया कि 2007 में ही उन्होंने अपना बिजली कनेक्शन कटवाकर बेटे कृष्णा के नाम से नया कनेक्शन ले लिया था।
अदालत ने क्या कहा
विशेष न्यायाधीश (आर्थिक अपराध) ज्ञानेंद्र राव ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा कि
- अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा
- गलत व्यक्ति को आरोपी बनाया गया
- तुहीराम पुत्र मोहन को पूरी तरह निर्दोष घोषित किया जाता है
हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि बिजली विभाग वास्तविक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।
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