Sambhal illegal ultrasound center raid City Magistrate fake patient action 2026

संभल डेस्क, Taj News | Updated: Tuesday, 20 Jan 2026 10:30 PM IST

संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में स्वास्थ्य माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका ताजा उदाहरण मंगलवार को देखने को मिला। यहाँ के सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सोनी ने फिल्मी अंदाज में एक अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर का भंडाफोड़ किया। उन्होंने खुद मरीज बनकर फोन किया और फिर छापेमारी कर ‘यूनिक अल्ट्रासाउंड एंड एक्स-रे सेंटर’ (Unique Ultrasound Center) की हकीकत सामने ला दी। जांच में पता चला कि यह सेंटर बिना किसी रेडियोलॉजिस्ट के धड़ल्ले से चल रहा था और सरकारी ‘आशा कार्यकर्ताएं’ (Asha Workers) यहाँ कमीशन के लिए मरीजों की दलाली कर रही थीं।

HIGHLIGHTS
  1. सिटी मजिस्ट्रेट ने मरीज बनकर मारा छापा, बिना रेडियोलॉजिस्ट चल रहा था सेंटर।
  2. आशा कार्यकर्ता फोन पर कर रही थी सेंटर की दलाली, ऑडियो सबूत बना आधार।
  3. डायरी में मिले 30 आशाओं के नाम और कमीशन का पूरा हिसाब-किताब।
  4. स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर को किया सील, दोबारा खुलने पर उठे सवाल।

‘हेलो, मुझे अल्ट्रासाउंड कराना है…’ और खुल गया राज

सिटी मजिस्ट्रेट ने सेंटर से मिली एक डायरी में दर्ज नंबर पर सहारनपुर गांव की आशा कार्यकर्ता लता को फोन मिलाया। उन्होंने मरीज बनकर पूछा, “हेलो, मुझे अल्ट्रासाउंड कराना है, कहां करवाऊं?” उधर से आशा ने तुरंत जवाब दिया, “यूनिक अल्ट्रासाउंड सेंटर चले जाओ, वहां एमबीबीएस डॉक्टर बैठते हैं और अच्छे से करते हैं। वहां जाकर मेरी बात करा देना।” यह बातचीत इस बात का पुख्ता सबूत थी कि कैसे सरकारी तंत्र का हिस्सा होने के बावजूद आशाएं अवैध सेंटरों की एजेंट बनी हुई हैं।

कमीशनखोरी का काला चिट्ठा: डायरी में मिले 30 आशाओं के नाम

छापेमारी के दौरान रिसेप्शन से बरामद रजिस्टरों और डायरी ने कमीशनखोरी की पूरी पोल खोल दी।

  • रेट लिस्ट और कमीशन: डायरी में दर्ज था कि प्रति मरीज 600 रुपये वसूले जाते थे। यदि मरीज किसी आशा या झोलाछाप डॉक्टर के जरिए आता, तो उसके नाम के आगे 100, 200, 300 से लेकर 350 रुपये तक का कमीशन दर्ज था।
  • 30 आशाओं के नाम: मौके से मिली डायरी में लगभग 30 आशा कार्यकर्ताओं के नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं।
  • फर्जीवाड़ा: कंप्यूटर रिकॉर्ड में 20 जनवरी तक 11 रिपोर्ट दर्ज थीं, जबकि रजिस्टर में 13 मरीजों की एंट्री थी, जो टैक्स चोरी और डेटा में हेराफेरी को दर्शाता है।

बिना डॉक्टर के टेक्नीशियन कर रहा था जांच

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि सेंटर पर कोई रेडियोलॉजिस्ट (Radiologist) मौजूद ही नहीं था। रिसेप्शन पर बैठी इफरा और लायवा ने बताया कि जितेंद्र नामक व्यक्ति अल्ट्रासाउंड करता है, जो कि एक अयोग्य टेक्नीशियन है। संचालक माजिद ने दावा किया कि डॉ. हरेंद्र अत्री अधिकृत डॉक्टर हैं, लेकिन वे मौके पर नदारद थे।

पहले भी हो चुका है सील, फिर भी जारी था खेल

यह पहली बार नहीं है जब इस सेंटर पर कार्रवाई हुई है। 17 नवंबर 2025 को भी सिटी मजिस्ट्रेट ने ही इसे सील कराया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत या ढिलाई के कारण यह दोबारा खुल गया। इस बार सिटी मजिस्ट्रेट ने नोडल अधिकारी डॉ. मनोज चौधरी को सख्त निर्देश दिए हैं कि सेंटर को सील कर FIR दर्ज कराई जाए और दोषी आशाओं के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई हो।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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