Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 02:45 pm IST
Taj News Health & City Desk
शहर की स्वास्थ्य सेवाएं, मेडिकल अपडेट्स और जागरूकता
आगरा (Agra): एसएन मेडिकल कॉलेज (Sarojini Naidu Medical College) प्रशासन ने अपनी छात्राओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद सराहनीय और सकारात्मक पहल की शुरुआत की है। मेडिकल की पढ़ाई का तनाव और छात्रावास (Hostel) का जीवन अक्सर छात्रों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। दूसरों का इलाज करने वाले भावी डॉक्टर खुद स्वस्थ रहें, इसी दूरदर्शी उद्देश्य के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज के महिला छात्रावास में एक विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर (Health Camp) का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण शिविर के दौरान एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम की 60 छात्राओं के हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) स्तर की जांच की गई और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। एसएन मेडिकल कॉलेज का यह कदम न केवल मेडिकल छात्राओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाएगा, बल्कि ‘एनीमिया मुक्त भारत’ (Anemia Mukt Bharat) अभियान को भी एक नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।
एसएन मेडिकल कॉलेज की अनूठी पहल: दवाओं का वितरण और परामर्श
मेडिकल की पढ़ाई (Medical Studies) दुनिया के सबसे कठिन पाठ्यक्रमों में से एक मानी जाती है। लंबी कक्षाएं, क्लीनिकल ड्यूटी, रात-रात भर की पढ़ाई और परीक्षाओं का भारी दबाव— इन सबके बीच मेडिकल छात्र अक्सर अपने स्वयं के खान-पान और पोषण (Nutrition) को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी समस्या को गंभीरता से लेते हुए एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने यह विशेष शिविर आयोजित किया।
▲ एसएन मेडिकल कॉलेज के महिला छात्रावास में छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण का दृश्य।
शिविर के दौरान पेशेवर तरीके से 60 एमबीबीएस छात्राओं के रक्त के नमूने लेकर उनके हीमोग्लोबिन (Hemoglobin Level) की सटीक जांच की गई। मेडिकल साइंस के अनुसार, महिलाओं में हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर 12 से 15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर (g/dL) के बीच होना चाहिए। इसकी कमी से थकान, कमजोरी, चक्कर आना और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो एक मेडिकल छात्रा के करियर और पढ़ाई के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। हीमोग्लोबिन की जांच के उपरांत, जिन छात्राओं को इसकी आवश्यकता थी, उन्हें कॉलेज प्रशासन की ओर से आयरन की टैबलेट्स (Iron Tablets) नि:शुल्क वितरित की गईं। साथ ही उन्हें यह भी स्पष्ट रूप से समझाया गया कि इन टैबलेट्स का नियमित सेवन उनके शरीर में खून की कमी को कैसे दूर करेगा और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कैसे बढ़ाएगा।
▲ छात्राओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए एसएन मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी।
डॉ. रुचिका गर्ग का प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र: पोषण पर खुला संवाद
इस पूरे कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और ज्ञानवर्धक हिस्सा वह रहा, जब स्त्री रोग विभाग (Gynecology Department) की सीनियर प्रोफेसर एवं महिला छात्रावास की वार्डन डॉ. रुचिका गर्ग ने छात्राओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने छात्राओं के साथ एक बेहद इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र आयोजित किया। एसएन मेडिकल कॉलेज की छात्राओं ने अपने स्वास्थ्य, डाइट और दिनचर्या से जुड़े कई सवाल डॉ. गर्ग के सामने रखे, जिनका उन्होंने वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से जवाब दिया।
▲ डॉ. रुचिका गर्ग द्वारा एमबीबीएस छात्राओं को प्राकृतिक पोषण की जानकारी देते हुए।
डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि भारत में महिलाओं के बीच एनीमिया (Anemia) एक बहुत बड़ी और खामोश महामारी है। उन्होंने छात्राओं को गोलियों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, आहार में आयरन के प्राकृतिक स्रोतों (Natural sources of Iron) को शामिल करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, बथुआ, इसके अलावा गुड़, चना, खजूर, अनार, चुकंदर और सेब जैसे फल हीमोग्लोबिन बढ़ाने के सबसे उत्तम प्राकृतिक स्रोत हैं। डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि, “हमारा लक्ष्य सिर्फ आज बीमार होने पर इलाज करना नहीं है, बल्कि एसएन मेडिकल कॉलेज की इन होनहार छात्राओं को शारीरिक और मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाना है कि वे आजीवन एनीमिया से मुक्त रह सकें। एक स्वस्थ महिला डॉक्टर ही एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकती है।”
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का विजन: हर सोमवार चलेगा विशेष स्वास्थ्य अभियान
इस पूरे स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता का पूर्ण समर्थन और मार्गदर्शन प्राप्त है। इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. प्रशांत गुप्ता ने स्पष्ट किया कि कॉलेज प्रशासन अपने छात्रों, विशेषकर महिला छात्राओं के बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा और उचित पोषण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में एक छात्र को शारीरिक रूप से बेहद सक्रिय रहना पड़ता है, ऐसे में उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी उनके भविष्य के लिए बाधक बन सकती है।
▲ स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कतार में खड़ीं एसएन मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्राएं।
इसी दूरदर्शी विजन को आगे बढ़ाते हुए कॉलेज प्रशासन ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब से एसएन मेडिकल कॉलेज के महिला छात्रावास में छात्राओं के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी के लिए एक स्थाई व्यवस्था लागू कर दी गई है। डॉ. रुचिका गर्ग ने जानकारी दी कि अब प्रत्येक सोमवार को नियम से 60 छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच (Regular Checkup) और हीमोग्लोबिन परीक्षण किया जाएगा। यह रोटेशन के आधार पर होगा ताकि छात्रावास की हर एक छात्रा का स्वास्थ्य रिकॉर्ड मेंटेन किया जा सके। एसएन मेडिकल कॉलेज का यह ‘हर सोमवार-स्वास्थ्य वार’ अभियान पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के लिए एक बेहतरीन नजीर (Example) पेश कर रहा है कि कैसे पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की सेहत की भी फिक्र की जानी चाहिए।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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