Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 19 Feb 2026, 6:53 pm IST
सिद्धार्थनगर/लखनऊ: आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में जिंदगी की डोर इतनी कच्ची हो गई है कि यह कब, कहां और किस मोड़ पर इंसान का साथ छोड़ दे, कोई नहीं जानता। हंसते-मुस्कुराते, नाचते-गाते, खेलते-कूदते या अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाते युवाओं की अचानक होने वाली मौतें आज पूरे समाज, चिकित्सा जगत और नीति-निर्माताओं के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी बन गई हैं। ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ (Sudden Cardiac Arrest) और हार्ट अटैक (Heart Attack) अब केवल बुजुर्गों या बीमार लोगों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह युवाओं और किशोरों को भी अपना निवाला बना रही है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक ऐसी ही अत्यंत हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इस चिंता को और भी गहरा कर दिया है। यहां यूपी बोर्ड की परीक्षा (UP Board Exam) देने पहुंचे महज 17 साल के एक होनहार छात्र की परीक्षा केंद्र के गेट पर ही संदिग्ध रूप से हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है और शिक्षा व्यवस्था से लेकर बच्चों के स्वास्थ्य तक कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परीक्षा केंद्र के गेट पर बेसुध होकर गिरा रवि प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना सिद्धार्थनगर जिले के चिल्हिया थाना क्षेत्र की है। इसी इलाके का रहने वाला 12वीं कक्षा का होनहार छात्र रवि यादव (उम्र 17 वर्ष) बुधवार (18 फरवरी) को बड़े उत्साह और उम्मीदों के साथ अपने भविष्य की नींव मजबूत करने के लिए परीक्षा देने निकला था। रवि का परीक्षा केंद्र गायत्री पब्लिक स्कूल (Gayatri Public School) में पड़ा था। बुधवार को दूसरी पाली (Second Shift) में इंटरमीडिएट (12वीं) का हिंदी का महत्वपूर्ण पेपर था। रवि पूरी तैयारी के साथ सेंटर पर पहुंचा था, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
चश्मदीदों और स्कूल प्रशासन के मुताबिक, जैसे ही रवि ने परीक्षा केंद्र के मुख्य गेट पर अपना कदम रखा और अंदर प्रवेश करने लगा, अचानक उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे सांस लेने में तकलीफ हुई, सीने में भारीपन महसूस हुआ और पलक झपकते ही वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। वहां मौजूद शिक्षकों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य छात्रों में हड़कंप मच गया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक स्वस्थ दिखने वाले किशोर को अचानक क्या हो गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित, मातम में बदला परिवार आनंद-फानन में स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से रवि को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल (District Hospital) रेफर कर दिया। एंबुलेंस के जरिए रवि को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आपातकालीन वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद ही रवि को मृत घोषित कर दिया।
शुरुआती मेडिकल जांच और लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि रवि की मौत का कारण ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ या गंभीर हार्ट अटैक (Heart Attack) हो सकता है। जवान बेटे की अचानक मौत की खबर जैसे ही रवि के परिवार वालों तक पहुंची, उनके घर में कोहराम मच गया। जिस बेटे को सुबह उन्होंने परीक्षा देकर अच्छे नंबर लाने के आशीर्वाद के साथ विदा किया था, कुछ ही घंटों बाद उसकी लाश उनके सामने थी। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गहरे सदमे में डूबे रवि के परिजनों ने पुलिस या प्रशासन से बिना पोस्टमार्टम (Post-mortem) कराए ही शव को अपने कब्जे में ले लिया और भारी मन से उसका अंतिम संस्कार कर दिया। पोस्टमार्टम न होने के कारण मौत के वास्तविक कारणों की 100% आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हो सकी, लेकिन यह घटना अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल जरूर छोड़ गई है।
क्या परीक्षा का तनाव (Exam Stress) बन रहा है जानलेवा? रवि की मौत के बाद शिक्षाविदों और बाल मनोवैज्ञानिकों में भी एक नई बहस छिड़ गई है। फरवरी और मार्च का महीना पूरे देश में बोर्ड परीक्षाओं का होता है। इस दौरान बच्चों पर अच्छे अंक लाने, करियर बनाने और माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का भारी मानसिक दबाव (Mental Pressure) होता है। कई बार बच्चे इस तनाव के कारण रात-रात भर नहीं सोते, ठीक से खाना नहीं खाते और लगातार एंग्जायटी (Anxiety) में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक मानसिक तनाव शरीर में ‘कॉर्टिसोल’ और ‘एड्रेनालाईन’ जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की गति अनियमित हो सकती है। अगर किसी बच्चे में पहले से कोई छिपी हुई (साइलेंट) हृदय संबंधी समस्या है, तो यह अत्यधिक तनाव एक बड़े हार्ट अटैक का ट्रिगर बन सकता है।
देशभर से आ रहे हैं डराने वाले मामले: शादियों और खेल के मैदानों में भी मौत का साया सिद्धार्थनगर की यह घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। हार्ट अटैक का यह जानलेवा सिलसिला केवल परीक्षा केंद्रों या अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खुशियों के आयोजनों और खेल के मैदानों में भी मौत बनकर नाच रहा है। हाल ही में मध्य प्रदेश के खरगोन (Khargone, MP) से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वहां एक परिवार में शादी की खुशियां चल रही थीं। 42 वर्षीय घनश्याम यादव अपने भांजे की शादी में बेहद खुश थे। मेहंदी की रस्म के दौरान वह अपनी पत्नी के साथ डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। नाचते-नाचते घनश्याम अचानक लड़खड़ाए और धड़ाम से जमीन पर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों को लगा कि वे शायद चक्कर खाकर गिरे हैं। परिजनों ने तुरंत उन्हें सीपीआर (CPR – Cardiopulmonary Resuscitation) देकर उनकी जान बचाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। एक पल में शादी का जश्न मातम में तब्दील हो गया।
इसी तरह का एक और दुखद मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर (Raipur, CG) से सामने आया। वहां एक प्रतिष्ठित कारोबारी अमृत बजाज अपने दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेल रहे थे। खेल के मैदान में पूरी तरह से फिट और सक्रिय दिख रहे अमृत अचानक बैडमिंटन कोर्ट पर ही गिर पड़े। उन्हें संभलने या किसी से मदद मांगने का मौका तक नहीं मिला। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने बताया कि यह भी ‘सडन कार्डियक अरेस्ट’ का स्पष्ट मामला था।
क्या कहते हैं हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologists)? युवाओं और स्वस्थ दिखने वाले लोगों में अचानक हो रही इन मौतों पर देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं:
- बदलती और अनहेल्दी जीवनशैली: आज के युवाओं का लाइफस्टाइल बेहद खराब हो चुका है। जंक फूड का अत्यधिक सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना मोटापे और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ा रहा है।
- अत्यधिक तनाव (Stress): चाहे वह पढ़ाई का हो, नौकरी का हो या निजी जीवन का, अत्यधिक तनाव सीधे दिल पर असर डालता है।
- साइलेंट हार्ट डिजीज: कई युवाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें जन्मजात या जेनेटिक रूप से हृदय की कोई समस्या है (जैसे Hypertrophic Cardiomyopathy)। जब वे अचानक कोई भारी कसरत करते हैं या भारी तनाव में आते हैं, तो यह समस्या जानलेवा रूप ले लेती है।
- नींद की कमी और नशा: कम नींद लेना और कम उम्र में ही धूम्रपान, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन युवाओं की नसों को कमजोर कर रहा है।
समय की मांग: नियमित चेकअप और CPR की ट्रेनिंग इन लगातार होती दुखद घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मौत अब किसी उम्र, स्थान या वक्त की मोहताज नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों की सख्त सलाह है कि 30 वर्ष की आयु के बाद, और खेलकूद या जिम जाने वाले युवाओं को नियमित रूप से अपना फुल बॉडी चेकअप और ‘इकोकार्डियोग्राम’ (ECHO) एवं ईसीजी (ECG) जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर हर आम नागरिक को ‘सीपीआर’ (CPR) देने की बेसिक ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। कई मामलों में देखा गया है कि अगर कार्डियक अरेस्ट के पहले 3 से 5 मिनट के भीतर मरीज को सही तरीके से सीपीआर मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना 50 से 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
सिद्धार्थनगर के रवि यादव का परिवार आज जिस दर्द से गुजर रहा है, उसकी भरपाई दुनिया की कोई ताकत नहीं कर सकती। लेकिन इस घटना से सबक लेकर माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव न डालें और उनके मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को हमेशा प्राथमिकता दें। जिंदगी रहेगी, तो परीक्षाएं और मौके जीवन में बार-बार आते रहेंगे।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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