Akhilesh Yadav press conference addressing media regarding US-India Trade Deal and Make in India failure.

स्टेट ब्यूरो, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Monday, 09 Feb 2026 01:25 PM IST

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों, ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और कृषि क्षेत्र की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े किए। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिस ‘मेक इन इंडिया’ का शेर दहाड़ रहा था, अब लगता है कि उसे जंग लग गई है और वह खामोश हो गया है।

Akhilesh Yadav
📌 मुख्य बिंदु (Highlights)
  • मेक इन इंडिया पर तंज: अखिलेश यादव ने कहा, सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ वाले शेर को अब जंग लग गई है, विनिर्माण क्षेत्र ठप पड़ा है।
  • 500 अरब डॉलर का बाजार: सपा प्रमुख का आरोप, भाजपा सरकार ने भारत का विशाल बाजार अमेरिका को प्लेट में सजाकर सौंप दिया।
  • मिलेट्स नीति पर सवाल: एक तरफ मोटे अनाज का प्रचार, दूसरी तरफ विदेशों से आयात; इसे किसानों के साथ धोखा बताया।
  • सामाजिक न्याय का मुद्दा: दूध उत्पादन से जुड़े पिछड़े और दलित समाज के हितों की अनदेखी कर विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप।
  • ध्यान भटकाने की राजनीति: अखिलेश ने कहा, आर्थिक नाकामी छिपाने के लिए भाजपा बार-बार सावरकर जैसे मुद्दों का सहारा लेती है।

500 अरब डॉलर का बाजार सौंपने का आरोप सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने बिना किसी दूरदर्शी सोच के भारत का 500 अरब डॉलर का विशाल उपभोक्ता बाजार अमेरिका को थाली में सजाकर सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता घरेलू उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। अखिलेश यादव ने कहा, “सरकार जिसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रही है, वह असल में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। हमने अपने दरवाजे विदेशी कंपनियों के लिए इस तरह खोल दिए हैं कि हमारे अपने उत्पादक और एमएसएमई (MSME) सेक्टर उनके सामने टिक नहीं पाएंगे।”

‘मेक इन इंडिया’ के शेर पर कसा तंज केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ पर कटाक्ष करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि 10 साल पहले जिस जोर-शोर से इस अभियान की शुरुआत हुई थी, आज उसकी हकीकत सबके सामने है। उन्होंने कहा, “सरकार ने जगह-जगह लोहे के शेर के होर्डिंग और स्टैच्यू लगवाए थे, जो मेक इन इंडिया का प्रतीक थे। लेकिन आज विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की हालत देखकर लगता है कि उस शेर को जंग लग गई है। न तो फैक्ट्रियां लग रही हैं और न ही युवाओं को रोजगार मिल रहा है। विदेशी निवेश के नाम पर सिर्फ एमओयू (MoU) साइन हो रहे हैं, धरातल पर कुछ नहीं उतर रहा।”

मिलेट्स (मोटा अनाज) और विरोधाभास अखिलेश यादव ने सरकार की ‘श्री अन्न’ (Millets) नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जी-20 से लेकर संसद तक, सरकार मोटे अनाज का प्रचार कर रही है। हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर मिलेट्स के बड़े-बड़े विज्ञापन लगाए गए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि उसी मोटे अनाज और पशु चारे का आयात विदेशों से किया जा रहा है।

उन्होंने झांसी स्थित ‘भारतीय चारे और घास अनुसंधान संस्थान’ (IGFRI) का हवाला देते हुए कहा, “हमारे देश में विश्व स्तरीय अनुसंधान संस्थान हैं, हमारे किसान मेहनती हैं, फिर भी हमें पशु आहार और चारा बाहर से क्यों मंगाना पड़ रहा है? यह सरकार की कृषि नीति की विफलता है। स्थानीय प्रयासों को बर्बाद कर विदेशी कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने का यह खेल अब जनता समझ चुकी है।”

पशुपालकों और पिछड़े वर्ग की अनदेखी सपा अध्यक्ष ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि भारत में दूध उत्पादन और पशुपालन का काम मुख्य रूप से ग्रामीण भारत के पिछड़े, दलित और गरीब वर्ग के लोग करते हैं। यह उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। अगर पशु आहार और डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ाया जाएगा, तो इसका सीधा असर इन वर्गों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है जिससे गरीब और गरीब हो, और विदेशी कंपनियां मालामाल हों। यह सीधे तौर पर हमारे ‘दुग्ध क्रांति’ के नायकों यानी किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है।”

सावरकर के नाम पर ध्यान भटकाने का आरोप अखिलेश यादव ने कहा कि जब भी विपक्ष रोजगार, महंगाई, व्यापार घाटे और आर्थिक नीतियों पर सवाल पूछता है, तो भाजपा इतिहास के पन्नों को पलटकर विवादित मुद्दे सामने ले आती है। उन्होंने कहा, “बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ये लोग कभी सावरकर को ले आते हैं, तो कभी कोई और भावनात्मक मुद्दा उछाल देते हैं। मकसद सिर्फ एक है—जनता को असली सवालों से दूर रखना। लेकिन अब काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ेगी। जनता देख रही है कि कैसे देश की संपदा और बाजार को गिरवी रखा जा रहा है।”

सपा सड़क से संसद तक करेगी विरोध अखिलेश यादव ने ऐलान किया कि समाजवादी पार्टी इस व्यापार समझौते और कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों और नौजवानों को बताएं कि कैसे केंद्र की नीतियां उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में जनता भाजपा की इन नीतियों का करारा जवाब देगी।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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