
Crime Desk, Taj News | ठाकुर पवन सिंह | Friday, 6 February 2026, 06:30 AM IST
आगरा के न्यू आगरा थाना क्षेत्र में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश करके स्वयं को मृत घोषित करवा दिया और कोर्ट से अपना मुकदमा बंद करा लिया। 12 वर्षों तक कानूनी तौर पर ‘मृत’ माने जाने वाले इस शख्स को वादी ने नवंबर 2025 में सड़क पर स्कूटर चलाते हुए देखा, जिसके बाद पुलिस जाँच में उसके जीवित होने की पुष्टि हुई। यह मामला दस्तावेजी धोखाधड़ी और व्यवस्था में चूक की गंभीर झलक पेश करता है।

क्या था पूरा मामला? दस्तावेजी धोखाधड़ी का आरोप
मूल मामला वर्ष 1999 का है, जब थाना हरीपर्वत में राजकुमार वर्मा बनाम विद्या देवी एवं अन्य के बीच कूटरचित दस्तावेज के आरोप में एक मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें एक आरोपी तारा चंद्र शर्मा थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान, गिरफ्तारी से बचने के इरादे से, आरोपी की तरफ से वर्ष 2013 में कोर्ट में एक मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिसमें उनकी मृत्यु 1998 में दर्शाई गई थी। थाना हरीपर्वत पुलिस ने भी पड़ोसियों से हस्ताक्षर कराकर इसकी पुष्टि कर दी। इस आधार पर कोर्ट ने 20 सितंबर 2013 को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दी।
12 साल बाद वादी की नज़र में आया ‘मृत’ आरोपी
पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब वादी राजकुमार वर्मा को 5 नवंबर 2025 को आरोपी तारा चंद्र शर्मा गांधी नगर इलाके में स्कूटर चलाते हुए दिखाई दिए। वादी ने सतर्कता दिखाते हुए तस्वीरें खींचीं और स्कूटर के रजिस्ट्रेशन नंबर से आरटीओ कार्यालय में जाँच करवाई। हैरानी की बात यह थी कि जिस व्यक्ति को 1998 में मृत बताया गया था, उसी के नाम पर जुलाई 2016 में यह स्कूटर पंजीकृत थी। इसके अलावा यह भी पता चला कि आरोपी सक्रिय रूप से बैंक खाते और मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहा था।
पुलिस जाँच ने किया जिंदा होने का खुलासा
वादी द्वारा कोर्ट में सबूत पेश किए जाने के बाद, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने थाना न्यू आगरा से जाँच रिपोर्ट माँगी। पुलिस जाँच, एसआई मधुर कुशवाह की अगुवाई में हुई, जिसमें आरोपी तारा चंद्र शर्मा को उनके घर पर जीवित पाया गया। जाँच में आरोपी के पुत्र आशुतोष शर्मा ने भी बयान दिया कि उनके पिता वृद्धावस्था के कारण घर पर ही रहते हैं और कभी-कभार स्कूटर चला लेते हैं। पुलिस ने आरोपी और उनके पुत्र की तस्वीरें भी लीं, जिन्हें सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया गया है।
कानूनी प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
यह मामला न्यायिक और पुलिस प्रक्रिया में गंभीर चूक की ओर इशारा करता है। एक फर्जी दस्तावेज के आधार पर, बिना ठोस पड़ताल के, एक व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस द्वारा दी गई ‘मृत होने’ की आख्या और कोर्ट द्वारा मुकदमा बंद करने के फैसले ने आरोपी को लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई से बचने का रास्ता दे दिया। अब जबकि आरोपी के जीवित होने की पुष्टि हो चुकी है, कोर्ट के सामने यह सवाल है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश करने और न्यायिक प्रक्रिया को धोखा देने के लिए आरोपी के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उस पुलिस अधिकारी के विरुद्ध भी कार्रवाई की माँग उठने की संभावना है, जिसने बिना ठीक से जाँच किए आख्या दी थी।
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1 thought on “12 साल पहले कोर्ट ने माना था मृत, अब स्कूटर चलाते हुए जिंदा मिला आरोपी; फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र का खुलासा”