Political Desk, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Published on: Friday, 23 January 2026, 06:48 PM IST
प्रयागराज: संगम नगरी में चल रहे माघ मेले का माहौल गंभीर हो गया है। ज्योतिष पीठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का स्वास्थ्य शुक्रवार को अचानक बिगड़ गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पिछले छह दिनों से मेला प्रशासन के विरोध में अपनी पालकी पर ही धरने पर बैठे हैं। लगातार खुले आसमान के नीचे बैठे रहने और ठंड के कारण उन्हें तेज बुखार हो गया है। उनके प्रवक्ता ने बताया कि स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद, अपनी मांगें न माने जाने तक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी रहेगा।

शंकराचार्य को आया तेज बुखार, चिकित्सक चिंतित
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि महाराज जी की तबीयत शुक्रवार दोपहर से नासाज है। उन्हें तेज बुखार आया है और चिकित्सकों ने उनकी जांच की है। योगीराज ने कहा, “छह दिनों से लगातार खुले में रहने और कड़ाके की ठंड का असर हुआ है। डॉक्टरों ने विश्राम की सलाह दी है।” हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन से सार्वजनिक माफी और सम्मानपूर्ण स्नान की मांग पूरी होने तक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपना आंदोलन जारी रखेंगे। इस दौरान शंकराचार्य ने लोगों से मुलाकात करना भी स्थगित कर दिया है।
मौनी अमावस्या की घटना से शुरू हुआ था विवाद
पूरा विवाद 18 जनवरी, मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जब पारंपरिक पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तो मेला प्रशासन ने उनकी पालकी रोककर वापस लौटा दिया। शिष्यों और संतों का गंभीर आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शंकराचार्य सहित कई साधुओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की। उनका आरोप है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की शिखा पकड़कर उन्हें पटका गया और उनके धार्मिक दंड छीन लिए गए। इस घटना के विरोध में ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर ही धरना शुरू कर दिया था।
सार्वजनिक माफी और सम्मानसूचक स्नान की मांग
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मांग स्पष्ट और अडिग है। वे चाहते हैं कि मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना के लिए माफी मांगे और उन्हें पूरे सम्मान के साथ संगम स्नान कराकर वापस शिविर में ले जाए। उनका कहना है कि जब तक यह दोनों शर्तें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी पालकी से नहीं उठेंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं होने से स्थिति और तनावपूर्ण बनी हुई है। मेला अधिकारियों का कहना है कि वे बातचीत के माध्यम से समाधान की कोशिश कर रहे हैं।
संत समाज में आक्रोश, प्रशासन पर जिम्मेदारी
इस पूरे प्रकरण ने माघ मेले में पहुंचे संत समाज और श्रद्धालुओं को आक्रोशित कर दिया है। अखिल भारतीय संत समिति सहित कई संगठनों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए व्यवहार की कड़ी निंदा की है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एक शंकराचार्य के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है, तो आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। संत समाज के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह घटना न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि संवैधानिक मूल्यों पर भी चोट है। प्रशासन को तुरंत संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।”
राजनीतिक दलों ने उठाए सवाल, मांगी निष्पक्ष जांच
इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने मेला प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और एक धार्मिक गुरु के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। वहीं, सत्तापक्ष के कुछ नेताओं ने कहा है कि मेले की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और वे मामले को शीघ्र सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच, जिला प्रशासन ने संत समाज के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी रखी है।
स्वास्थ्य स्थिति पर नजर, लेकिन धरना जारी रखने का संकल्प
चिकित्सकों की एक टीम ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उन्हें गर्म कपड़े पहनने तथा पर्याप्त विश्राम की सलाह दी। हालांकि, शंकराचार्य का रुख स्पष्ट है। उनके करीबी स्रोतों ने बताया कि महाराज जी का मनोबल अभी भी दृढ़ है और वे प्रशासन के रवैये से आहत जरूर हैं, लेकिन अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेंगे। मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन ने शांति बनाए रखने का भरोसा दिलाया है। सभी की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है, क्योंकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बिगड़ते स्वास्थ्य के साथ समय सीमा सिकुड़ती जा रही है।
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