
Friday, 02 January 2026, 6:27 PM. Varanasi, Uttar Pradesh
वाराणसी में गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासनिक आदेशों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आधी सर्दी बीत जाने तक गोवंश को ठंड से बचाने के लिए बोरे तक उपलब्ध नहीं कराए गए। यह चौंकाने वाली स्थिति तब सामने आई, जब जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गुरुवार देर रात काशी विद्यापीठ ब्लॉक के बंदेपुर गांव स्थित वृहद गोवंश आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण में खुली व्यवस्था की पोल
जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान आश्रय स्थल पर कुल 194 गोवंश मौजूद पाए गए, लेकिन ठंड से बचाव की मूल व्यवस्था नदारद थी। न तो गोवंश को बोरे ओढ़ाए गए थे और न ही पर्याप्त अलाव की व्यवस्था दिखाई दी। जबकि इससे पहले जिला आपूर्ति अधिकारी को निर्देश दिए जा चुके थे कि कोटे की दुकानों से बोरे उपलब्ध कराकर उन्हें गोवंश आश्रय स्थलों तक भिजवाया जाए।
आदेश कागजों में रहे, जमीन पर नहीं
निरीक्षण के दौरान जब जिलाधिकारी ने बोरे न होने का कारण पूछा तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही नाराजगी जताई और तत्काल बोरे मंगवाने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बोरे गोवंश आश्रय स्थल पर पहुंचाए गए।
बीमार गोवंश मिलने पर पशु चिकित्सक से स्पष्टीकरण
निरीक्षण के दौरान एक गोवंश बीमार अवस्था में पाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा और स्पष्ट किया कि गोवंश के स्वास्थ्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीमार पशु के त्वरित उपचार और निगरानी के निर्देश भी दिए।
साफ-सफाई पर जताई सख्त नाराजगी
गोवंश आश्रय स्थल की साफ-सफाई व्यवस्था भी जिलाधिकारी को संतोषजनक नहीं लगी। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वच्छता व्यवस्था में तुरंत सुधार किया जाए, ताकि गोवंश को संक्रमण और बीमारियों से बचाया जा सके।
रात में निगरानी और वीडियोग्राफी के निर्देश
बीडीओ राजेश यादव को निर्देश दिया गया कि रात्रिकालीन निगरानी सुनिश्चित की जाए और नियमित रूप से वीडियोग्राफी कराकर उसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेजी जाए। साथ ही भूंसा, पेयजल और अन्य आवश्यक संसाधनों की भी जांच की गई।
प्रशासन ने दी चेतावनी
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने दो टूक कहा कि गोवंश की देखभाल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की मंशा गोवंश संरक्षण को लेकर पूरी तरह गंभीर है और जमीनी स्तर पर इसका पालन अनिवार्य है।
आधी सर्दी गुजरने के बाद जागा सिस्टम
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जिलाधिकारी स्वयं निरीक्षण पर न आते, तो शायद बोरे सर्दी निकलने के बाद ही पहुंचते। यह घटना सरकारी योजनाओं और आदेशों के क्रियान्वयन पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
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