श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: कान्हा के सिर सजेगा मुस्लिम कारीगरों के हाथों बना मुकुट, रेशम के धागे और जरी का काम लगाएंगे ‘चार चांद’

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: कान्हा के सिर सजेगा मुस्लिम कारीगरों के हाथों बना मुकुट, रेशम के धागे और जरी का काम लगाएंगे ‘चार चांद’

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को एक सप्ताह बचा है। इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। कन्हैया का जन्म होने के बाद शृंगार के लिए मुकुट बनाया जा रहा है। करीब 16 इंच के मुकुट को तैयार करने में मुस्लिम कारीगर जुटे हैं। लाला के सिर पर पगड़ी और मुकुट को सजाने में कोई कमी न रह जाए, रात दिन काम हो रहा है। खास बात यह है कि मुकुट को तैयार करने में किसी मशीन का प्रयोग नहीं बल्कि हाथ से ही सजाया जा रहा है। हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की एक मिसाल भी है। बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त को मनाया जाएगा। दरअसल, इस बार मंडी रामदास में पप्पू मुकुट वाले के पास कन्हैया का मुकुट बनाने का ऑर्डर एक माह पहले मिला था। चूंकि यही मुकुट जन्मदिन पर कृष्ण के सिर सजेगा, इसलिए उसको करीने से बनाने का काम चल रहा है।
मुकुट में पगड़ी, नगीने, कांच, मोती, माला, चूड़ी, वंशी, बुंदे, हार, मोरपंख समेत अन्य सामान से सजाया जा रहा है। इसमें किसी भी तरह की मशीन की मदद नहीं ली जा रही है, रेशम के धागे से छोटी-छोटी सुइयों से जरी का काम किया जा रहा है। मुकुट इतना सुंदर होगा कि जब कान्हा के सिर पर सजेगा और रात में रोशनी पड़ेगी तो नजर नहीं टिकेगी।

आठ साल से कर रहे काम
पप्पू मुकुट वाले ने बताया कि पिछले 8 साल से मुकुट बनाने का काम कर रहे हैं। छोटे बड़े हर तरह के मुकुट तैयार होते हैं। इनकी कीमत 20 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक होती है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कन्हैया के सिर पर सजने वाले 16 इंच के मुकुट बनाने का ऑर्डर मिला है। कारीगर दिन के अलावा रात में भी काम कर रहे हैं। इकराम, मो. इकरार, शाकिर, शकील, अबरार, मुन्ना समेत कई पुराने कारीगर हुनर वाले हैं, सभी कुछ न कुछ इसमें साज शृंगार कर रहे हैं।

इस बार मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में तीन दिन 29, 30 व 31 अगस्त को श्रीकृष्णोत्सव-2021 का आयोजन होगा। श्रीकृष्णोत्सव-2021 को भव्य और दिव्य बनाने के लिए प्रशासन और नगर निगम तैयारियों में जुटा हुआ है।
नंदगाव में जन्मोत्सव की तैयारियां हो रही हैं। नंदीश्वर पहाड़ी पर स्थित नंदबाबा मंदिर में पूर्णिमा से श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयों का दौर शुरू हो गया। पूर्णिमा की रात्रि से नंदभवन में बधाई गायन कर जन्मोत्सव का श्रीगणेश किया गया। इसके बाद सामूहिक रूप से ‘बोलो री नाहिंन की बिटिया नगर बुलावौ देय एवं आज बधायौ ब्रजराज कें रानी जायौ मोहन पूत’ आदि पदों का गायन हुआ। इधर, मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।

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