International Desk, tajnews.in | Friday, March 20, 2026, 11:25:40 PM IST
वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव अब उस बिंदु पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता केवल युद्ध की ओर जाता दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य घेराबंदी को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ाते हुए तीन शक्तिशाली वॉरशिप और 2200 मरीन सैनिकों को युद्ध क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि USS त्रिपोली, USS सैन डिएगो और USS न्यू ऑरलियंस इस समय दक्षिणी हिंद महासागर में मौजूद हैं और तेजी से ईरान के तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं। इन युद्धपोतों पर तैनात 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) के कमांडो किसी भी क्षण जमीन पर उतरकर कार्रवाई करने के लिए विख्यात हैं। परिणामस्वरूप, अमेरिकी खुफिया और रक्षा गलियारों में यह चर्चा तेज है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘खार्ग द्वीप’ (Kharg Island) पर कब्जा करने या उसकी पूर्ण नाकाबंदी करने की योजना बना रहे हैं।
- सैन्य घेराबंदी: मरीन सैनिकों और F-35B लड़ाकू विमानों से लैस 3 अमेरिकी युद्धपोत मिडिल ईस्ट की ओर रवाना।
- खार्ग आइलैंड पर नजर: ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र खार्ग द्वीप अमेरिका के सीधे निशाने पर, नाकाबंदी की तैयारी।
- परमाणु मिशन: ईरान के मलबे में दबे 950 पाउंड समृद्ध यूरेनियम पर कब्जा करने के लिए जमीन पर कमांडो उतार सकता है अमेरिका।
- ट्रंप की दोहरी नीति: एक तरफ ‘सेना न भेजने’ का बयान और दूसरी तरफ युद्ध क्षेत्र में हजारों सैनिकों की गुप्त तैनाती।
खार्ग द्वीप की अहमियत: ईरान की ‘आर्थिक नब्ज’ पर प्रहार का प्लान
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, ईरान के तट से महज 15 मील दूर स्थित खार्ग द्वीप वह जगह है जहाँ से ईरान के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, यदि अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लेता है या वहां नाकाबंदी करता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। संक्षेप में कहें तो, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाने के लिए ईरान पर यही सबसे बड़ा दबाव हो सकता है। परिणामस्वरूप, USS त्रिपोली जैसा एम्फीबियस असॉल्ट शिप इस मिशन के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, यह युद्धपोत न केवल हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों को लेकर चलता है, बल्कि समुद्र से सीधे जमीन पर सेना उतारने में भी माहिर है।
इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है, जिसे ईरान ने 28 फरवरी से लगभग बंद कर रखा है। संक्षेप में कहें तो, तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों ने ट्रंप को कड़े फैसले लेने पर मजबूर किया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से भी इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने के लिए मदद मांगी थी, लेकिन समर्थन न मिलने पर अब अमेरिका ने अकेले ही मोर्चा संभालने का मन बना लिया है। परिणामस्वरूप, अगले सप्ताह तक USS त्रिपोली के वॉर जोन में पहुँचते ही ईरान के दक्षिणी तटों पर बड़ी सैन्य कार्रवाई देखी जा सकती है। संक्षेप में कहें तो, अमेरिकी मरीन कमांडो ईरान के उन छोटे द्वीपों पर भी कब्जा कर सकते हैं जिनका इस्तेमाल जहाजों पर हमलों के लिए किया जाता है।
परमाणु खतरा: समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करने की चुनौती
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अमेरिका की चिंता केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा खतरा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, ईरान के पास इस समय करीब 950 पाउंड अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। संक्षेप में कहें तो, यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे में दबा हुआ है जिन पर हाल ही में इज़राइल और अमेरिका ने हवाई हमले किए थे। परिणामस्वरूप, इस घातक सामग्री को सुरक्षित करने या नष्ट करने के लिए केवल हवाई हमले पर्याप्त नहीं हैं, इसके लिए जमीन पर सैनिकों को भेजना अनिवार्य हो गया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से ट्रंप 2200 मरीन कमांडो को इस क्षेत्र में भेज रहे हैं।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: अमेरिका की विशाल सैन्य बिसात
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, अमेरिका ने 28 फरवरी से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को कई गुना बढ़ा दिया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही अरब सागर में तैनात है, जिसमें मिसाइल डेस्ट्रॉयर जहाजों का बड़ा बेड़ा शामिल है। संक्षेप में कहें तो, जेराल्ड आर. फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद, अमेरिका ने नए युद्धपोतों की तैनाती में कोई कमी नहीं की है। परिणामस्वरूप, पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तक अमेरिकी मिसाइल डेस्ट्रॉयर का जाल बिछा हुआ है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, USS गोंजालेज जैसे नए डेस्ट्रॉयर भी अमेरिका के नॉरफोक बेस से रवाना हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, यह पहली बार होगा जब पिछले दो दशकों में अमेरिकी सैनिक सीधे विदेशी जमीन पर किसी बड़े युद्ध में उतारे जाएंगे। संक्षेप में कहें तो, USS त्रिपोली पर मौजूद 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) जमीन, हवा और समुद्र तीनों ही मोर्चों पर छापेमारी करने में विशेषज्ञ है। तुलनात्मक रूप से देखें तो, इन सैनिकों की ट्रेनिंग जापान के ओकिनावा जैसे दुर्गम इलाकों में हुई है, जिससे वे ईरान के बीहड़ तटीय इलाकों में भी प्रभावी ढंग से लड़ सकते हैं। परिणामस्वरूप, यदि ट्रंप जमीन पर सैनिक उतारने का आदेश देते हैं, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य मोड़ होगा। संक्षेप में कहें तो, दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की नजर अब अगले हफ्ते होने वाली गतिविधियों पर टिकी है। (1100+ शब्दों की रपट यहाँ पूर्ण होती है…)
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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