Taj Mahotsav 2026 Akhil Bharatiya Kavi Sammelan concluded at Tata Ground Agra, anger over missing Mushaira and Urdu poets continues

ताज महोत्सव 2026: टाटा ग्राउंड में संपन्न हुआ कवि सम्मेलन, लेकिन ‘मुशायरा’ न होने की टीस बरकरार; सोशल मीडिया पर फूटा उर्दू प्रेमियों का दर्द

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 20 Feb 2026, 10:45 am IST

आगरा: ताजनगरी आगरा में इन दिनों कला, संस्कृति और शिल्प का सबसे बड़ा मेला ‘ताज महोत्सव 2026’ (Taj Mahotsav 2026) पूरी रौनक के साथ चल रहा है। इस महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण हमेशा से यहाँ होने वाले साहित्यिक कार्यक्रम रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार, 19 फरवरी 2026 की शाम 8:30 बजे आगरा के टाटा ग्राउंड में ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न तो हो गया, लेकिन यह अपने पीछे आगरा के साहित्यकारों और उर्दू शायरी से मोहब्बत करने वालों के दिलों में एक गहरी टीस छोड़ गया। वर्षों से चली आ रही ‘ऑल इंडिया मुशायरा’ की परंपरा को इस बार दरकिनार किए जाने से शहर के प्रबुद्ध जनों में जो रोष था, वह कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर खुलकर छलक रहा है।

Taj Mahotsav 2026 controversy as Mushaira missing from Akhil Bharatiya Kavi Sammelan card, anger among Urdu lovers in Agra
HIGHLIGHTS
  1. कवि सम्मेलन संपन्न: 19 फरवरी 2026 को आगरा के टाटा ग्राउंड में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का सफलतापूर्वक हुआ आयोजन।
  2. दिग्गज हुए शामिल: ‘वंदे मातरम्’ थीम पर सजे मंच पर डॉ. हरिओम पंवार और डॉ. विष्णु सक्सेना सहित कई नामचीन कवियों ने की शिरकत।
  3. उर्दू प्रेमियों को निराशा: मुशायरे को अलग से जगह न मिलने और सूची में केवल मदन मोहन दानिश का नाम होने से उर्दू अदब के मुरीद हैं आहत।
  4. सोशल मीडिया पर विरोध: वर्षों पुरानी परंपरा टूटने से नाराज साहित्यकार और स्थानीय नागरिक फेसबुक के जरिए जता रहे हैं कड़ा विरोध।

‘वंदे मातरम्’ की थीम पर सज़ा था मंच, जुटे दिग्गज कवि आयोजन समिति द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पोस्टर के अनुसार, इस वर्ष के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की थीम ‘वंदे मातरम् – परंपरा एवं राष्ट्र का गौरव’ रखी गई थी। इस मंच पर देश के कई दिग्गज और ख्याति प्राप्त कवियों ने शिरकत की। वीर रस के विख्यात कवि डॉ. हरिओम पंवार, गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, हास्य कवि सरदार प्रताप फौजदार, अनिल अग्रवंशी, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, गौरव चौहान, हेमंत पांडे, पदम गौतम, सचिन सारंग, डॉ. मुकेश मणिकांचन, मारुति नंदन, दान बहादुर सिंह वाराणसी, श्वेता सिंह, शशांक प्रभाकर और सुशील सरित जैसे बड़े नामों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

मुशायरा नदारद, केवल एक शायर को मिली जगह हालाँकि, इस पूरे आयोजन में जिस एक चीज़ की कमी सबसे ज्यादा खली, वह थी उर्दू शायरी की मिठास और मुशायरे का वह पारंपरिक रंग जो कभी ताज महोत्सव की जान हुआ करता था। इतिहास गवाह है कि ताज महोत्सव में हर साल एक रात हिंदी कवि सम्मेलन के लिए और एक अलग रात मुशायरे के लिए तय होती थी। लेकिन इस बार ‘मिला-जुला’ कार्यक्रम बताकर मुशायरे को निमंत्रण कार्ड से ही गायब कर दिया गया।

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हैरानी की बात यह रही कि 19 फरवरी के इस तथाकथित ‘मिले-जुले’ कवि सम्मेलन के मंच पर इतने सारे कवियों की भीड़ में उर्दू शायरी का प्रतिनिधित्व करने के लिए केवल एक ही नाम मौजूद था – श्री मदन मोहन दानिश। आगरा जैसे शहर में, जिसे मीर और गालिब की सरज़मीं कहा जाता है, मुशायरे को इस तरह दरकिनार करना उर्दू अदब के चाहने वालों को एक सोची-समझी बेरुखी लग रही है।

सोशल मीडिया पर फूट रहा है लोगों का गुस्सा इस अफ़सोसनाक रवैये के खिलाफ अब आगरा के नागरिकों और साहित्यकारों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है। गंगा-जमुनी तहजीब को मानने वाले लोग फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज करा रहे हैं।

(नीचे दी गई फेसबुक पोस्ट में आप शहरवासियों के इसी दर्द और विरोध की झलक देख सकते हैं:)

प्रशासन की मंशा पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल कवि सम्मेलन भले ही 19 फरवरी को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया हो, लेकिन यह आयोजन प्रशासन और ताज महोत्सव आयोजन समिति की मंशा पर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है। क्या आगरा की समावेशी संस्कृति में अब उर्दू मुशायरे के लिए कोई जगह नहीं बची है? क्या कला और संस्कृति के इतने बड़े मंच को भी अब भेदभाव के चश्मे से देखा जाने लगा है? शहर के प्रबुद्ध जनों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि वर्षों पुरानी इस परंपरा को यूं ही खत्म कर दिया गया, तो यह आगरा के साहित्यिक इतिहास का एक बहुत बड़ा नुकसान होगा, जिसकी भरपाई भविष्य में कभी नहीं की जा सकेगी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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