Opinion: वर्दी का डर या भरोसे का हाथ? लोकतंत्र में पुलिस की नई परिभाषा की तलाश; बृज खंडेलवाल का विशेष आलेख
Opinion Desk, Taj News आलेख: बृज खंडेलवाल | Reported by: Thakur Pawan Singh | Updated: Sun, 15 Feb 2026 08:15 AM IST “क्या हमारे थाने इंसाफ़ के दरवाज़े हैं, या डर की दहलीज़? जब एक आम आदमी किसी मुसीबत में थाने की ओर बढ़ता है, तो क्या उसके कदमों में भरोसा होता है या दिल […]
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