Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 03 March 2026, 02:20 pm IST
Taj News National & Politics Desk
देश की बड़ी खबरें, राजनीति और कूटनीतिक हलचल
नई दिल्ली (New Delhi): सोनिया गांधी का केंद्र पर हमला भारतीय राजनीति में एक नया भूचाल ले आया है। दरअसल, कांग्रेस नेता ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर सवाल उठाए हैं। ताज न्यूज़ (Taj News) की पॉलिटिक्स डेस्क के अनुसार, उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर मोदी सरकार की ‘चुप्पी’ को खतरनाक बताया है। इसके परिणामस्वरूप, विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनिया ने कहा कि इस तरह शांत रहना भारत की वैश्विक भूमिका से पीछे हटने जैसा है। इसलिए, उन्होंने इस पूरे मामले पर संसद में एक विस्तृत बहस की जोरदार मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन और विदेश नीति पर सवाल
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में एक बेहद तीखा लेख लिखा है। सबसे पहले, उन्होंने किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का सीधा हवाला दिया। यह अनुच्छेद किसी भी स्वतंत्र देश की राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग को पूरी तरह रोकता है। इसके अलावा, उन्होंने भारत सरकार के स्पष्ट बयान न देने पर भारी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि यह चुप्पी हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गहरे संदेह पैदा करती है। अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ऐसे ही चुप रहेगा, तो अंतरराष्ट्रीय नियम बहुत आसानी से टूट जाएंगे।
पीएम मोदी के इजरायल दौरे की टाइमिंग पर उठा बड़ा शक
अपने लेख में सोनिया गांधी ने अमेरिकी-इजरायली हमलों की टाइमिंग को भी बहुत अजीब बताया है। दरअसल, इस भयंकर हत्या से बमुश्किल 48 घंटे पहले ही प्रधानमंत्री मोदी इजरायल के दौरे से लौटे थे। वहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को अपना पूरा और स्पष्ट समर्थन दोहराया था। दूसरी ओर, गाजा संघर्ष में लगातार निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है। इनमें ज्यादातर असहाय महिलाएं और छोटे बच्चे शामिल हैं। अतः, भारत का यह बिना नैतिक स्पष्टता वाला राजनीतिक समर्थन देश के लिए एक बहुत ही चिंताजनक कदम है। उन्होंने ब्रिक्स देशों का उदाहरण देकर भारत की अलग-थलग पड़ती स्थिति को भी उजागर किया।
अटल बिहारी वाजपेयी के दौर की याद और भारत की साख
कांग्रेस (Congress) नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ऐतिहासिक ईरान दौरे को भी याद किया। वाजपेयी ने अप्रैल 2001 में तेहरान जाकर भारत और ईरान के गहरे संबंधों की मजबूती से पुष्टि की थी। हालांकि, सोनिया ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के लिए उन पुराने संबंधों का कोई महत्व नहीं बचा है। मुख्य रूप से, भारत की असली ताकत उसकी स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति में ही हमेशा से निहित रही है। इसलिए, शक्तिशाली देशों की सैन्य कार्रवाई पर चुप रहना हमारी उस महान विरासत का पूरी तरह से त्याग है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश अब भारत पर कैसे भरोसा करेंगे।
खाड़ी देशों में रहने वाले 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा
सोनिया गांधी ने खाड़ी देशों में काम करने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। दरअसल, इन नागरिकों की सुरक्षा सीधे तौर पर भारत की एक स्वतंत्र देश वाली छवि पर निर्भर करती है। अगर भारत किसी महाशक्ति के प्रॉक्सी (Proxy) के रूप में काम करेगा, तो इन भारतीयों की जान खतरे में पड़ जाएगी। इसलिए, भारत को अपनी नैतिक ताकत वापस पानी होगी और अपनी बात बहुत स्पष्टता से रखनी होगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों की बात केवल सुविधाजनक समय पर ही नहीं होनी चाहिए। बल्कि, मुश्किल समय में भी भारत को खुलकर अपनी बेबाक राय रखनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब: शांति और कूटनीति की अपील
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य पूर्व के मौजूदा हालात पर अपनी गहरी चिंता जताई। साथ ही, पीएम मोदी ने सभी विवादों को कूटनीति और आपसी बातचीत के जरिए सुलझाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने साफ कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया भर में शांति और स्थिरता का मजबूती से समर्थन किया है। अंततः, उन्होंने पश्चिम एशिया में फंसे सभी भारतीय नागरिकों की पूरी सुरक्षा भी सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। सरकार वहां के स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में बनी हुई है।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
अपनी खबर सीधे WhatsApp पर भेजें:
7579990777









