आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सफल बाईपास सर्जरी के बाद मरीज राजेंद्र शर्मा के साथ।

आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में कमाल: मौत के मुंह से लौटा कोसी का राजेंद्र, छोटी आंत की नस में था 99% ब्लॉकेज, डॉक्टरों ने की जटिल बाईपास सर्जरी

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Agra News Desk, tajnews.in | Thursday, March 19, 2026, 02:01:31 AM IST

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आगरा: ताजनगरी के एसएन मेडिकल कॉलेज के सुपरस्पेशियलिटी विंग ने एक बार फिर अपनी चिकित्सा कुशलता का लोहा मनवाया है। रिपोर्ट के अनुसार, छाता कोसी (मथुरा) निवासी 38 वर्षीय राजेंद्र शर्मा को डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल सर्जरी के जरिए नई जिंदगी दी है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, पिछले दो वर्षों से असहनीय पेट दर्द और 30 किलो वजन घटने से जूझ रहे राजेंद्र की छोटी आंत को खून पहुँचाने वाली मुख्य नली (SMA) में 99 प्रतिशत खतरनाक ब्लॉकेज था। कार्डिओथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने इस जानलेवा स्थिति को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। परिणामस्वरूप, सफल ‘Ilio-SMA Bypass’ सर्जरी के बाद अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और लंबे समय बाद बिना दर्द के सामान्य भोजन कर पा रहा है।

HIGHLIGHTS
  • असाध्य रोग का समाधान: दो साल से पेट दर्द से बेहाल मरीज का वजन 30 किलो तक घट गया था।
  • जटिल बाईपास सर्जरी: पैर की नली से कृत्रिम नस (ePTFE) के जरिए आंतों में रक्त प्रवाह बहाल किया गया।
  • दोहरी चुनौती: ब्लॉकेज के साथ मरीज लीवर संक्रमण से भी पीड़ित था, जिससे ऑपरेशन और जोखिम भरा था।
  • आगरा में ही इलाज: प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा- अब गंभीर ऑपरेशन के लिए दिल्ली-जयपुर जाने की जरूरत नहीं।

3-4 लाख खर्च और दर-दर की ठोकरें: जब सीटी एंजियोग्राफी ने खोला राज

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, राजेंद्र शर्मा सड़क किनारे ठेला लगाकर अपना जीवन यापन करते थे। असहनीय पेट दर्द के कारण उन्होंने मथुरा, आगरा और दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे। संक्षेप में कहें तो, इस दौरान उन्होंने करीब 3-4 लाख रुपये खर्च कर दिए, लेकिन बीमारी का असली कारण सामने नहीं आया। स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि कुछ भी खाते ही उनके पेट में तेज दर्द शुरू हो जाता था। परिणामस्वरूप, उन्होंने खाना ही छोड़ दिया था। आखिरकार आगरा में कराई गई पेट की सीटी एंजियोग्राफी ने असली कारण स्पष्ट किया कि उनकी सुपीरियर मेसेन्टेरिक आर्टरी (SMA) पूरी तरह बंद होने के कगार पर थी।

नतीजतन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह पर मरीज को एसएन मेडिकल कॉलेज के CTVS विभाग में भेजा गया। तुलनात्मक रूप से देखें तो यह स्थिति इतनी जानलेवा थी कि कभी भी आंतों में गैंग्रीन बन सकता था, जिससे मरीज की जान जा सकती थी। इसी तरह, जांच के दौरान यह भी पता चला कि मरीज लीवर संक्रमण की चपेट में था। परिणामस्वरूप, सर्जरी की जटिलता कई गुना बढ़ गई थी। इसके बावजूद, डॉक्टरों की टीम ने हार नहीं मानी और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।

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सफलता की कहानी: इन योद्धा डॉक्टरों ने राजेंद्र को दी नई जिंदगी

आगरा के चिकित्सा इतिहास में इस सफल सर्जरी को दर्ज कराने वाली टीम में कई अनुभवी नाम शामिल रहे। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, सर्जरी टीम का नेतृत्व प्रख्यात कार्डिओथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल (MCh CTVS) ने किया। उनके साथ ही डॉ. शिव और डॉ. शुभांशु अग्रवाल ने उच्च कौशल का परिचय देते हुए ऑपरेशन को अंजाम दिया। डॉक्टरों ने पैर की नली (इलियक आर्टरी) से कृत्रिम नस (ePTFE 6mm) जोड़कर सीधा रास्ता बनाया, जिससे छोटी आंतों में रक्त का प्रवाह फिर से शुरू हो गया।

इसके अतिरिक्त, एनेस्थीसिया टीम की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। इस टीम में डॉ. अपूर्व मित्तल, डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. प्रभा, डॉ. साइमा और डॉ. जसलीन शामिल रहे। इन विशेषज्ञों की देखरेख में मरीज को सुरक्षित तरीके से इस जटिल प्रक्रिया से गुजारा गया। परिणामस्वरूप, ऑपरेशन के बाद राजेंद्र शर्मा के चेहरे पर वह मुस्कान लौट आई जो पिछले दो वर्षों से गायब थी। प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। संक्षेप में कहें तो, डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अब आगरा के मरीजों को दिल्ली या जयपुर भागने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अत्याधुनिक इलाज अब एसएन मेडिकल कॉलेज में ही सुलभ है।

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Pawan Singh

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