Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 21 Feb 2026, 2:45 pm IST
आगरा: ताजनगरी आगरा के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल, सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (S.N. Medical College) में चिकित्सा विज्ञान और मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद अहम और दूरगामी कदम उठाया जा रहा है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग (Department of Pharmacology) के तत्वावधान में आगामी 23 फरवरी (सोमवार) को ‘फार्माकोविजिलेंस’ (Pharmacovigilance) विषय पर एक वृहद और महत्वपूर्ण ‘निरंतर चिकित्सा शिक्षा’ (Continuing Medical Education – CME) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस उच्च स्तरीय शैक्षणिक कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों, रेजीडेंट डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों (Adverse Drug Reactions – ADR) की सटीक निगरानी, पहचान और उनकी त्वरित रिपोर्टिंग के वैश्विक मानकों (Global Standards) से अवगत कराना है।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में जहां हर दिन नई-नई दवाएं और उपचार पद्धतियां विकसित हो रही हैं, वहीं मरीजों के लिए उन दवाओं की 100% सुरक्षा सुनिश्चित करना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से लेकर हर देश की सरकारों की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। एस.एन. मेडिकल कॉलेज का यह आयोजन इसी दिशा में एक बेहद सार्थक और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है।
प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता होंगे मुख्य अतिथि, डॉ. अलका यादव करेंगी अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के मीडिया प्रभारी अधिकारी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस गरिमामयी शैक्षणिक सत्र में एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य (Principal) डॉ. प्रशांत गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। डॉ. प्रशांत गुप्ता के कुशल नेतृत्व में एस.एन. मेडिकल कॉलेज लगातार अकादमिक और चिकित्सीय सुधारों की ओर अग्रसर है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) एवं फार्माकोविजिलेंस की समन्वयक (Coordinator) डॉ. अलका यादव द्वारा की जाएगी। डॉ. अलका यादव लंबे समय से दवाओं के सुरक्षित उपयोग और उनके दुष्प्रभावों की मॉनिटरिंग पर जोर देती रही हैं। उनके मार्गदर्शन में फार्माकोलॉजी विभाग इस कार्यशाला के माध्यम से शहर और संस्थान के चिकित्सकों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है, ताकि मरीजों के इलाज के दौरान होने वाले किसी भी अनपेक्षित साइड इफेक्ट को गंभीरता से लिया जा सके।
क्या है फार्माकोविजिलेंस और आम मरीजों के लिए यह क्यों है इतना जरूरी? फार्माकोविजिलेंस (Pharmacovigilance) चिकित्सा विज्ञान की वह महत्वपूर्ण शाखा है जो दवाओं के दुष्प्रभावों (Side effects) का पता लगाने, उनका आकलन करने, उन्हें समझने और उनकी रोकथाम से जुड़ी है। आसान भाषा में समझें तो जब कोई दवा बाजार में आती है और मरीजों को दी जाती है, तो कई बार कुछ मरीजों के शरीर पर उस दवा का ऐसा उल्टा या खतरनाक असर (Adverse Drug Reaction) देखने को मिलता है, जिसका पहले से अनुमान नहीं होता। किसी को दवा से गंभीर एलर्जी हो सकती है, तो किसी के लिवर या किडनी पर असर पड़ सकता है।
ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि जब भी किसी डॉक्टर को अपने मरीज में किसी दवा का कोई नया या गंभीर साइड इफेक्ट दिखे, तो वह उसकी तुरंत एक तय सिस्टम में रिपोर्ट करे। इसी रिपोर्टिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए यह CME आयोजित की जा रही है। जब पूरे देश से डॉक्टरों की रिपोर्ट एक जगह इकट्ठा होती है, तो सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां उस खतरनाक दवा पर पाबंदी लगा सकती हैं या उसके इस्तेमाल की गाइडलाइन बदल सकती हैं। इस प्रकार, फार्माकोविजिलेंस सीधे तौर पर लाखों मरीजों की जान बचाने का काम करता है।
LT-2 में जुटेंगे दिग्गज चिकित्सक, साझा करेंगे वैश्विक मानक इस एक दिवसीय कार्यशाला (Workshop) का आयोजन 23 फरवरी 2026, दिन सोमवार को प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक एस.एन. मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थिएटर-2 (LT-2) में किया जाएगा।
इस अवसर पर कॉलेज के विभिन्न विभागों (जैसे मेडिसिन, सर्जरी, बाल रोग, स्त्री रोग आदि) के विशेषज्ञ, वरिष्ठ चिकित्सक और संकाय सदस्य (Faculty Members) उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान फार्माकोविजिलेंस के व्यावहारिक पहलुओं, रिपोर्टिंग के फॉर्म भरने की सही विधि, इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के दिशा-निर्देशों और ‘फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया’ (PvPI) के तहत एस.एन. मेडिकल कॉलेज की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
डॉ. अलका यादव ने बताया कि दवाओं की सुरक्षा (Drug Safety) सुनिश्चित करना केवल फार्माकोलॉजी विभाग का ही नहीं, बल्कि हर उस चिकित्सक का प्राथमिक कर्तव्य है जो मरीज को दवा लिखता है (Prescribe करता है)। यदि चिकित्सक जागरूक होंगे, तो आगरा और आसपास के जिलों से एस.एन. मेडिकल कॉलेज आने वाले हजारों गरीब और आम मरीजों को ज्यादा सुरक्षित और विश्वसनीय इलाज मिल सकेगा। इस CME के बाद संस्थान में एक ऐसा रोबस्ट इकोसिस्टम (Robust Ecosystem) तैयार होने की उम्मीद है, जहाँ हर जूनियर और सीनियर डॉक्टर बिना किसी झिझक के ‘एडवर्स ड्रग रिएक्शन’ की तुरंत रिपोर्टिंग करेगा।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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