Agra News Desk, tajnews.in | Monday, March 30, 2026, 08:45:20 PM IST

आगरा: ताजनगरी की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में अपना परचम लहराया है। दरअसल, सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) के ईएनटी विभाग ने एक नया इतिहास रच दिया है। गौरतलब है कि, यहां के अनुभवी सर्जनों ने अपनी बेजोड़ कार्यकुशलता का शानदार परिचय दिया है। इसी कड़ी में, उन्होंने एक 35 वर्षीय महिला की बेहद जटिल ‘सीएसएफ राइनोरिया’ (CSF Rhinorrhea) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। बता दें कि, इस बेहद संवेदनशील ऑपरेशन को आधुनिक दूरबीन विधि (एंडोस्कोपी) के जरिए पूरा किया गया है। नतीजतन, मरीज को अब पूरी तरह से एक नया और स्वस्थ जीवन मिल गया है। आगरा की रहने वाली यह पीड़ित महिला पिछले एक साल से एक अजीबोगरीब और बेहद कष्टदायक बीमारी से जूझ रही थी। दरअसल, उसकी नाक से लगातार साफ पानी जैसा स्राव होता रहता था। इसके अलावा, उसे हर समय भयंकर सिरदर्द की शिकायत भी रहती थी।
- ईएनटी विभाग का कमाल: एसएन मेडिकल कॉलेज में 35 वर्षीय महिला के मस्तिष्क से टपक रहे पानी का सफल ऑपरेशन हुआ।
- बिना चीरा, बिना निशान: डॉ. धर्मेंद्र कुमार की टीम ने आधुनिक दूरबीन (एंडोस्कोप) की मदद से यह बेहद जटिल सर्जरी पूरी की।
- दुर्लभ और खतरनाक बीमारी: मरीज को पूर्व में न कोई चोट लगी थी न कोई सर्जरी हुई थी, फिर भी मस्तिष्क की हड्डी में छेद हो गया था।
- प्रिंसिपल ने दी बधाई: डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा- हमारा कॉलेज अब अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ सर्जनों से पूरी तरह लैस है।
एक साल की लंबी पीड़ा: सर्दी-जुकाम नहीं, दिमाग से टपक रहा था पानी
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, यह मामला चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से काफी दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण था। गौरतलब है कि, शुरुआत में महिला और उसके परिजनों ने इस समस्या को सामान्य सर्दी-जुकाम ही समझा था। लेकिन, जब भी वह महिला नीचे की ओर झुकती थी या उसे खांसी आती थी, तो यह स्राव अचानक बहुत तेज हो जाता था। नतीजतन, इस गंभीर समस्या के कारण महिला को अपने घर के दैनिक कार्यों को करने में भी भारी कठिनाई हो रही थी। सबसे हैरानी की बात तो यह थी कि इस महिला को पूर्व में न तो सिर पर कोई चोट लगी थी। इसके अलावा, उसकी पहले कभी कोई बड़ी सर्जरी या एक्सीडेंट भी नहीं हुआ था। ऐसे में, बिना किसी बाहरी कारण के नाक से पानी आना एक बेहद दुर्लभ मामला बन गया था। परेशान होकर जब महिला एसएन मेडिकल कॉलेज की ईएनटी ओपीडी में पहुंची, तो वहां उसका सघन परीक्षण किया गया।
बता दें कि, विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ओपीडी में जांच के बाद तुरंत उसका सीटी स्कैन करवाया। जांच रिपोर्ट आते ही डॉक्टरों को बीमारी की असली जड़ का पता चल गया। दरअसल, सीटी स्कैन में यह साफ तौर पर दिखाई दिया कि महिला के मस्तिष्क और नाक की गुहा के बीच की हड्डी में एक बड़ा छेद (Bone Defect) हो गया है। इसी सुराख के कारण उसके मस्तिष्क का मेरु द्रव (CSF – Cerebrospinal Fluid) लगातार रिसकर नाक के रास्ते बाहर आ रहा था। गौरतलब है कि, यह स्थिति मरीज के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकती थी। दरअसल, इस खुले रास्ते से दिमाग में भयानक इंफेक्शन या दिमागी बुखार (मेनिन्जाइटिस) होने का भारी खतरा हर समय बना रहता है। इसलिए, इसका तुरंत और सटीक ऑपरेशन करना बेहद जरूरी हो गया था।
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दूरबीन विधि का चमत्कार: बिना किसी बाहरी चीरे के किया गया सुराख बंद
एसएन मेडिकल कॉलेज के अनुभवी डॉक्टरों ने इस मामले में जरा भी समय नहीं गंवाया। बीते 13 मार्च, 2026 को प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार और उनकी कुशल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन का बीड़ा उठाया। गौरतलब है कि, उन्होंने इस जटिल सर्जरी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक एंडोस्कोप (दूरबीन) का सफलतापूर्वक उपयोग किया। सबसे बड़ी और अहम बात यह रही कि डॉक्टरों ने मरीज के चेहरे या सिर पर कोई भी बाहरी चीरा बिल्कुल नहीं लगाया। नतीजतन, मरीज के शरीर पर टांकों का कोई भी निशान नहीं आया और खून का बहाव भी बेहद कम हुआ। डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने इस पूरी अत्याधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि ‘सीएसएफ राइनोरिया रिपेयर’ एक अत्यंत संवेदनशील और बेहद बारीक सर्जरी होती है।
दरअसल, इस ऑपरेशन में सर्जन को सीधे मस्तिष्क की झिल्ली और नाक के बीच के संकरे मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित करना होता है। एक छोटी सी भी चूक मरीज की जान ले सकती है या उसे हमेशा के लिए अपाहिज बना सकती है। लेकिन, डॉ. धर्मेंद्र कुमार की टीम ने पूरी सटीकता के साथ उस हड्डी के दोष को सफलता से पहचान कर उसे ग्राफ्ट (Patch) के जरिए पूरी तरह से सील कर दिया। इसी बीच, इस सफल और ऐतिहासिक ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम की भी बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका रही। गौरतलब है कि, एनेस्थीसिया टीम का कुशल नेतृत्व डॉ. अर्पिता द्वारा किया गया था। उनके साथ इस टीम में डॉ. पल्लिका, डॉ. काजल और डॉ. अनुभव भी पूरी मुस्तैदी के साथ शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर, ईएनटी टीम में डॉ. धर्मेंद्र कुमार के साथ डॉ. सौम्याता नीरज और डॉ. रोहिणी ने भी अपना बेहद शानदार और सराहनीय योगदान दिया।
प्रिंसिपल का संदेश: अब जटिल से जटिल ऑपरेशन होंगे आगरा में ही संभव
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, वर्तमान में यह महिला मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी है। ऑपरेशन के बाद उसे लगातार डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया था। नतीजतन, कोई जटिलता न दिखने पर उसे अस्पताल से सकुशल और खुशी-खुशी डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। महिला और उसके परिजनों ने एसएन मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टरों का हृदय से भारी आभार व्यक्त किया है। गौरतलब है कि, निजी अस्पतालों में इस तरह की जटिल दूरबीन सर्जरी का खर्च कई लाख रुपये तक आता है। लेकिन, एसएन मेडिकल कॉलेज में यह विश्व स्तरीय सुविधा उन्हें लगभग मुफ्त में प्रदान की गई है। इस शानदार और ऐतिहासिक सफलता पर संस्थान के प्रिंसिपल एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने पूरी सर्जिकल टीम को अपनी हार्दिक बधाई दी है।
उन्होंने इस गौरवशाली अवसर पर एक बहुत ही कड़ा और सकारात्मक संदेश भी दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसएन मेडिकल कॉलेज अब पहले जैसा नहीं रहा है। दरअसल, यह अस्पताल अब अत्याधुनिक उपकरणों, मशीनों और विशेषज्ञ सर्जनों की टीम से पूरी तरह सुसज्जित हो चुका है। डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अस्पताल प्रशासन का अब एक ही मुख्य लक्ष्य है। वे चाहते हैं कि ब्रज क्षेत्र की आम जनता को जटिल से जटिल ऑपरेशन की सुविधा इसी संस्थान में आसानी से उपलब्ध कराई जाए। गौरतलब है कि, पहले ऐसे गंभीर और जटिल ऑपरेशनों के लिए मरीजों को मजबूरन दिल्ली या जयपुर जैसे बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता था। इसके कारण, गरीब मरीजों का भारी पैसा और कीमती समय दोनों बुरी तरह बर्बाद होते थे। ईएनटी विभाग ने यह भरोसा दिलाया है कि वे भविष्य में भी ऐसी सभी जटिल सर्जरी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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