Reported by: Taj News Network | Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 09:45 pm IST
Taj News National & Legal Desk
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प्रयागराज (Prayagraj): शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुत बड़ी कानूनी राहत दी है। दरअसल, यौन उत्पीड़न के एक गंभीर केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ताज न्यूज़ (Taj News) की लीगल डेस्क के अनुसार, जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने यह अहम आदेश सुनाया है। इसके अलावा, कोर्ट ने अग्रिम जमानत पर अपना फैसला पूरी तरह सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि फैसला आने तक पुलिस कोई गिरफ्तारी नहीं करेगी। साथ ही, कोर्ट ने शंकराचार्य को जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अतः, इस मामले की अगली सुनवाई अब सीधे मार्च के तीसरे हफ्ते में होगी।
अदालत में दोनों पक्षों ने रखी अपनी जोरदार दलीलें
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के अंदर जोरदार बहस देखने को मिली। सबसे पहले, शंकराचार्य का पक्ष मशहूर वकील पीएन मिश्रा ने मजबूती से रखा। इसके विपरीत, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल कोर्ट में पेश हुए। इसी बीच, शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी अपनी दलीलें रखीं। सरकारी वकील ने कोर्ट में कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोपी को बहुत ताकतवर बताया। उन्होंने अदालत से कहा कि आरोपी गवाहों और केस को आसानी से प्रभावित करेंगे। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी नहीं करने का स्पष्ट आदेश दिया।
▲ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रकरण से जुड़ी एक तस्वीर।
फैसले के बाद शंकराचार्य ने दिया अपना बड़ा बयान
हाईकोर्ट से फौरी राहत मिलने के बाद शंकराचार्य ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक पवित्र संस्था को बदनाम करने की बहुत गहरी साजिश रची गई। आज समाज में हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अपने भाई पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। इसके बावजूद, उन्हें देश की न्यायपालिका (Judiciary) पर पूरा भरोसा है। उनका दृढ़ता से मानना है कि सारा सरकारी अमला कभी भ्रष्ट नहीं हो सकता है। इसलिए, सच्चाई को सामने लाने के लिए यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा। इस झूठे मुकदमे से पूरे देश का हिंदू समुदाय काफी आशंकित हो गया था।
▲ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रकरण से जुड़ी एक तस्वीर।
▲ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रकरण से जुड़ी एक तस्वीर।
बटुकों के उत्पीड़न का आरोप और शिकायतकर्ता का दावा
इस पूरे विवाद की असली जड़ प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ी हुई है। दरअसल, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन और शंकराचार्य के बीच एक बड़ा विवाद हुआ था। इसके आठ दिन बाद आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से एक बहुत गंभीर शिकायत की। उन्होंने 2025 महाकुंभ के दौरान बच्चों के यौन शोषण का सीधा आरोप लगाया। इसके परिणामस्वरूप, 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। अंततः, स्पेशल कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने की पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज की। इधर, शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें धर्म की विजय होने का पूरा विश्वास है।
▲ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रकरण से जुड़ी एक तस्वीर।
सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट कराने की खुली मांग
अदालत में सुनवाई से ठीक पहले शंकराचार्य ने मीडिया से बहुत खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा कि सच को सामने लाने के लिए उनका नार्को टेस्ट भी होना चाहिए। झूठ की उम्र दुनिया में कभी भी लंबी नहीं होती है। वे अदालत में अपने सभी प्रमाण पूरी मजबूती के साथ पेश करेंगे। अगर फैसला उनके पक्ष में नहीं आया, तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद उनके विद्यामठ में समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया। वहां अब रंगभरी एकादशी मनाने की भव्य तैयारी भी जोरों पर चल रही है।
▲ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रकरण से जुड़ी एक तस्वीर।
वकील को मिली थी बम से उड़ाने की धमकी, छात्र गिरफ्तार
इस पूरे मामले में एक और नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। दरअसल, पुलिस ने शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी को पकड़ लिया है। पुलिस ने वाराणसी कचहरी में प्रैक्टिस करने वाले लॉ के एक छात्र को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना अजीबोगरीब जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि अपने एक पड़ोसी को झूठे केस में फंसाने के लिए उसने यह धमकी भरा मैसेज भेजा था। बुधवार देर रात वकील के मोबाइल पर कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी आई थी।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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