Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 04:30 pm IST
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नोएडा (Noida): स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहने का एक बेहद खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला दिल्ली-एनसीआर के नोएडा (Noida) से सामने आया है। ताज न्यूज़ (Taj News) की एजुकेशन डेस्क की रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा के सेक्टर 44 स्थित प्रतिष्ठित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल (Amity International School) की भारी लापरवाही के चलते एक 6 साल का मासूम बच्चा अपनी ही स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहा। यूकेजी (UKG) में पढ़ने वाला यह छात्र सुबह स्कूल जाते समय बस की सीट पर सो गया था। बस के ड्राइवर और अटेंडेंट (Conductor) ने बिना बस चेक किए उसे स्कूल कैंपस से करीब 25 किलोमीटर दूर एक यार्ड में पार्क कर दिया। बंद बस में घुटन और गर्मी के बीच बच्चा घंटों तक रोता और तड़पता रहा। जब दोपहर में माता-पिता उसे बस स्टॉप पर लेने पहुंचे और वह नहीं मिला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शिक्षा जगत और परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली इस स्कूल बस में 7 घंटे कैद की घटना ने पूरे देश के माता-पिता की नींद उड़ा दी है और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्कूल बस में 7 घंटे कैद: सुबह घर से निकलने के बाद क्या हुआ था?
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी दिल दहला देने वाली घटना गुरुवार की है। छह साल का वह मासूम यूकेजी (UKG) का छात्र है। सुबह के समय उसके माता-पिता ने रोजमर्रा की तरह उसे अपनी हाउसिंग सोसाइटी (Housing Society) से स्कूल बस में बिठाया था। पिता का कहना है कि उन्होंने खुद बच्चे को बस में चढ़ाया और उसे मुस्कुराते हुए अलविदा कहा। लेकिन उस वक्त उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका लाड़ला आज स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहने वाला है और मौत के मुहाने तक पहुंच जाएगा।
बताया जा रहा है कि बस के सफर के दौरान बच्चा अपनी सीट पर गहरी नींद में सो गया। जब बस नोएडा सेक्टर 44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के कैंपस में पहुंची, तो सारे बच्चे उतर गए, लेकिन वह मासूम अपनी सीट पर ही सोता रह गया। नियम के मुताबिक, हर स्कूल बस के अटेंडेंट (Caregiver) की यह जिम्मेदारी होती है कि वह अंतिम सीट तक जाकर यह सुनिश्चित करे कि कोई बच्चा या उसका सामान बस में नहीं छूटा है। लेकिन यहां इतनी बड़ी लापरवाही हुई कि बिना जांच किए ही ड्राइवर ने बस को वहां से निकाल लिया और स्कूल से करीब 25 किलोमीटर दूर एक सुनसान पार्किंग यार्ड में ले जाकर खड़ा कर दिया। इस स्कूल बस में 7 घंटे कैद होने की पूरी दास्तान यहीं से शुरू हुई, जब बस के दरवाजे लॉक कर दिए गए और बच्चा अंदर ही रह गया।
माता-पिता की दहशत: स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहने के बाद कैसे मिला मासूम?
दोपहर के समय जब स्कूल की छुट्टी हुई और बस वापस हाउसिंग सोसाइटी के स्टॉप पर लौटी, तो बच्चे के माता-पिता उसे लेने के लिए वहां खड़े थे। बस रुकी, बच्चे उतरे, लेकिन उनका 6 साल का बेटा बस से बाहर नहीं आया। माता-पिता ने बदहवास होकर अटेंडेंट से पूछा, तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। अनहोनी की आशंका से कांपते हुए पैरेंट्स तुरंत एमिटी स्कूल के सेक्टर 44 कैंपस की ओर भागे। जब वे स्कूल पहुंचे और प्रशासन से सवाल किया, तब जाकर स्कूल प्रबंधन की नींद टूटी।
इसके बाद बस के ड्राइवर से संपर्क किया गया और बस को यार्ड में खोजा गया। जब वे पार्किंग यार्ड में पहुंचे और बस का दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य देखकर माता-पिता की रूह कांप गई। उनका 6 साल का बेटा स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहने के कारण गर्मी, घुटन और प्यास से बुरी तरह तड़प रहा था। वह पसीने से पूरी तरह लथपथ था और दहशत के मारे रो-रोकर उसकी आंखें सूज गई थीं। एक 6 साल के बच्चे के लिए यह मानसिक और शारीरिक आघात (Trauma) कितना गहरा हो सकता है, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस स्कूल बस में 7 घंटे कैद रहने के दौरान उस बच्चे ने बंद बस की खिड़कियों से बाहर झांककर मदद की गुहार लगाई होगी, लेकिन दूर-दूर तक कोई सुनने वाला नहीं था।
एमिटी इंटरनेशनल स्कूल प्रशासन का स्पष्टीकरण और परिवहन सुरक्षा के नियम
इतनी बड़ी और अक्षम्य लापरवाही सामने आने के बाद एमिटी इंटरनेशनल स्कूल (Amity International School) ने अपना स्पष्टीकरण (Clarification) जारी किया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया यह ट्रांसपोर्ट स्टाफ (ड्राइवर और अटेंडेंट) की घोर लापरवाही का मामला है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से इस तरह पल्ला झाड़ सकता है? शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की स्पष्ट गाइडलाइंस हैं कि स्कूल बस में सफर करने वाले बच्चों की पूर्ण सुरक्षा स्कूल प्रबंधन की ही जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, हर स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे (CCTV Cameras), जीपीएस ट्रैकिंग (GPS Tracking) और एक प्रशिक्षित अटेंडेंट का होना अनिवार्य है। यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाता, तो स्कूल बस में 7 घंटे कैद होने की यह खौफनाक नौबत कभी नहीं आती। अगर स्कूल प्रशासन ने उपस्थिति (Attendance) रजिस्टर को क्रॉस-चेक किया होता कि जो बच्चा सुबह बस में चढ़ा था, वह क्लास में क्यों नहीं पहुंचा, तो भी समय रहते उसे खोजा जा सकता था। इस स्कूल बस में 7 घंटे कैद के मामले ने स्कूल की आंतरिक संचार व्यवस्था (Internal Communication) की भी पोल खोल कर रख दी है।
भविष्य की चेतावनी: अभिभावकों और स्कूलों के लिए एक बड़ा सबक
नोएडा के इतने बड़े और नामी स्कूल में घटी यह स्कूल बस में 7 घंटे कैद की घटना पूरे देश के स्कूलों और अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी (Wake-up call) है। आज हर माता-पिता को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि क्या उनके बच्चे स्कूल के भरोसे सुरक्षित हैं? यह केवल एक अटेंडेंट की नौकरी जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह सिस्टम के उस फेलियर का परिणाम है जो लाखों बच्चों की जान हर दिन जोखिम में डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर (Transport Contractor) के साथ-साथ सीधे तौर पर स्कूल के प्रिंसिपल और प्रबंधन के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि स्कूल बस में 7 घंटे कैद जैसी कोई दूसरी घटना भविष्य में दोहराई न जा सके। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों के स्कूल बैग में कोई स्मार्ट जीपीएस ट्रैकर (GPS Tracker) रखें और स्कूल के साथ लगातार संपर्क में रहें। एक 6 साल के बच्चे ने उस बंद बस में जो दहशत झेली है, उसका मुआवजा कोई स्कूल प्रबंधन नहीं दे सकता। प्रशासन को अब इस मामले में सख्त नजीर पेश करनी होगी।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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