Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 18 Feb 2026, 6:45 pm IST
मुंबई/बांद्रा: बॉलीवुड के सबसे सम्मानित लेखकों में से एक और सुपरस्टार सलमान खान के पिता सलीम खान के स्वास्थ्य को लेकर पिछले 24 घंटों से चल रहा अटकलों का बाज़ार अब शांत हो गया है। मुंबई के प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल में भर्ती 90 वर्षीय दिग्गज पटकथा लेखक की स्थिति को लेकर अस्पताल प्रशासन ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। बुधवार शाम वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जलील पारकर ने उन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सलीम खान की कोई बड़ी सर्जरी हुई है या वे अत्यंत गंभीर स्थिति में हैं।

संक्षेप में
- सर्जरी नहीं हुई: डॉ. जलील पारकर ने अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि केवल छोटा प्रोसीजर हुआ है।
- हालत स्थिर: 90 वर्षीय लेखक फिलहाल आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
- अगला अपडेट: कल सुबह 11 बजे आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाएगा।
डॉक्टर का आधिकारिक बयान: अफवाहों पर लगा विराम
डॉ. जलील पारकर ने अस्पताल परिसर में मीडिया से बात करते हुए स्थिति साफ की। उन्होंने बताया, “सलीम खान जी को जब अस्पताल लाया गया, तब उन्हें बार-बार झटके (Jerks) महसूस हो रहे थे और उनका रक्तचाप (Blood Pressure) काफी अनियंत्रित था। बढ़ती उम्र और इन लक्षणों को देखते हुए हमने तत्काल जांचें शुरू कीं। आज सुबह उन पर एक छोटा मेडिकल प्रोसीजर (DSA – Digital Subtraction Angiography) किया गया है ताकि मस्तिष्क की नसों की स्थिति जांची जा सके। यह कोई बड़ी सर्जरी नहीं थी।”
डॉक्टर ने आगे कहा कि उन्हें एहतियात के तौर पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है ताकि उनके शरीर को रिकवरी के लिए पूरा आराम मिल सके। कल सुबह 11 बजे परिवार की सहमति के बाद एक विस्तृत मेडिकल बुलेटिन साझा किया जाएगा।
इंदौर का वो ‘प्रिंस’ जो एक्टर बनने मुंबई आया था
सलीम खान की कहानी केवल एक लेखक की नहीं, बल्कि एक ऐसे जुनून की है जिसने भारतीय सिनेमा की परिभाषा बदल दी। 24 नवंबर 1935 को इंदौर के एक रईस परिवार में जन्मे सलीम खान के पिता पुलिस अधिकारी थे। इंदौर में उन्हें ‘प्रिंस’ कहा जाता था। उनके पास उस दौर में भी महंगी कारें और आलीशान जीवन था, लेकिन एक्टिंग का कीड़ा उन्हें मुंबई खींच लाया।
शुरुआती दौर में उन्होंने ‘तीसरी मंजिल’ और ‘सरहदी लुटेरा’ जैसी फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए। ‘सरहदी लुटेरा’ के सेट पर ही उनकी मुलाकात जावेद अख्तर से हुई थी, जो उस समय वहां क्लैपर बॉय और डायलॉग असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे। यहीं से उस ऐतिहासिक दोस्ती की नींव पड़ी जिसने बाद में ‘सलीम-जावेद’ के नाम से तूफान खड़ा कर दिया।
‘सलीम-जावेद’ की वो जोड़ी जिसने लेखकों को ‘स्टार’ बनाया
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1970 का दशक ‘सलीम-जावेद’ के नाम रहा। इससे पहले बॉलीवुड में लेखकों को उतनी पहचान नहीं मिलती थी, लेकिन इस जोड़ी ने परंपरा तोड़ी। वे पहले लेखक थे जिन्होंने फिल्म के पोस्टरों पर अपना नाम मांगा और उस दौर के बड़े-बड़े सितारों के बराबर फीस वसूलना शुरू किया।
उनकी कुछ कालजयी फिल्में जिन्होंने इतिहास रचा:
- जंजीर (1973): इस फिल्म ने न केवल ‘एंग्री यंग मैन’ का जन्म दिया, बल्कि संघर्ष कर रहे अमिताभ बच्चन को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया।
- शोले (1975): भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्म। गब्बर सिंह से लेकर जय-वीरू तक, हर किरदार सलीम खान की कलम का जादू था।
- दीवार (1975): “मेरे पास मां है”—यह संवाद आज भी सिनेमाई इतिहास का सबसे ताकतवर डायलॉग माना जाता है।
- डॉन और त्रिशूल: इन फिल्मों ने साबित किया कि एक अच्छी स्क्रिप्ट किसी भी सितारे की किस्मत बदल सकती है।
संघर्ष और सफलता के बीच का पारिवारिक संतुलन
सलीम खान केवल एक महान लेखक ही नहीं, बल्कि एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपने परिवार के साथ खड़े रहे। उन्होंने दो शादियां कीं—सुशीला चरक (सलमा खान) और मशहूर डांसर हेलन। उन्होंने न केवल दोनों परिवारों को एक साथ रखा, बल्कि अपने बच्चों (सलमान, अरबाज, सोहेल, अलवीरा और अर्पिता) को ऐसे संस्कार दिए कि आज पूरा ‘खान खानदान’ एक मिसाल माना जाता है।
सलीम खान ने एक बार साझा किया था कि उन्होंने सलमान खान के लिए कभी स्क्रिप्ट क्यों नहीं लिखी। उनका मानना था कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को अलग रखना ही बेहतर है। उन्होंने कहा था, “अगर फिल्म हिट हुई तो क्रेडिट सलमान को मिलेगा, लेकिन अगर फ्लॉप हुई तो सारा दोष मेरी कलम पर आएगा। मैं अपने बेटे के करियर के साथ कोई प्रयोग नहीं करना चाहता था।”

Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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