वृन्दावन देवालय समिति के सदस्य यमुना प्रदूषण पर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की रणनीति बनाते हुए।

ब्रज की परंपराओं पर संकट: यमुना प्रदूषण को लेकर राष्ट्रपति से गुहार, वृन्दावन देवालय समिति ने उठाई निर्मल धारा की मांग

उत्तर प्रदेश

Agra News Desk, tajnews.in | Thursday, March 19, 2026, 12:39:45 AM IST

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वृन्दावन: कान्हा की पटरानी यमुना की दुर्दशा और ब्रज के मंदिरों की सदियों पुरानी परंपराओं पर मंडराते खतरे को लेकर संतों, सेवायतों और प्रबुद्ध नागरिकों ने अब निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रज वृन्दावन देवालय समिति ने यमुना के बढ़ते प्रदूषण और उसकी अवरुद्ध धारा पर अत्यंत गंभीर चिंता व्यक्त की है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, रंगजी मंदिर के बड़े बगीचे में आयोजित एक विशेष बैठक में यमुना जल की निर्मलता बहाल करने के लिए सीधे महामहिम राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गई है। वक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यमुना की अविरलता वापस नहीं लौटी, तो ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। परिणामस्वरूप, समिति ने अब दिल्ली से लेकर लखनऊ तक दस्तक देने का निर्णय लिया है।

HIGHLIGHTS
  • राष्ट्रपति से गुहार: वृन्दावन आगमन पर देवालय समिति यमुना की मुक्ति के लिए सौंपेगी ज्ञापन।
  • परंपराओं पर प्रहार: दूषित जल के कारण मंदिरों में विग्रहों के अभिषेक और सेवा में आ रही भारी कठिनाई।
  • उच्च स्तरीय वार्ता: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल।
  • आस्था बनाम विकास: विकास योजनाओं को यमुना की अविरल धारा में बाधक न बनने देने की पुरजोर मांग।

धार्मिक पीड़ा और परंपराओं का निर्वहन: जब आस्था पर भारी पड़ा प्रदूषण

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, आलोक गोस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्रज की आध्यात्मिक परंपराओं पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने पुरजोर तरीके से कहा कि वृन्दावन और मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की साक्षात लीलास्थली हैं। परिणामस्वरूप, यहाँ की प्रत्येक परंपरा सदियों से यमुना के पावन जल से जुड़ी रही है। प्राचीन मंदिरों में ठाकुर जी का अभिषेक हो या मंदिरों की रसोई का भोग, सब कुछ पारंपरिक रूप से यमुना जल से ही संपन्न होता रहा है। इसी तरह, वर्तमान में बढ़ता प्रदूषण इन धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वहन में दीवार बनकर खड़ा हो गया है। संक्षेप में कहें तो, यमुना की धारा में आए अवरोधों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुँचाई है।

बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस कड़वे सच को उजागर किया कि श्रद्धालु आज भी गहरी आस्था के कारण यमुना के दूषित जल से आचमन करने को बाध्य हो जाते हैं। यह न केवल धार्मिक पीड़ा का विषय है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए, तो विकास की योजनाएं यमुना की अविरल धारा में बाधा बन रही हैं। इसी तरह, बैठक में यह मांग की गई कि ब्रज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए यमुना के संरक्षण और शुद्धिकरण को सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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बैठक में उपस्थित ब्रज के गणमान्य नागरिकों और संतों ने यमुना की अविरलता के लिए एक सुर में अपनी आवाज बुलंद की। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, बैठक का प्रभावी संबोधन आलोक गोस्वामी, कांतानाथ चतुर्वेदी और गोस्वामी कृष्णानंद भट्ट ने किया। उनके साथ ही श्रीमती अनघा श्रीनिवासन, दीपक गोस्वामी और विजय किशोर गोस्वामी ने यमुना की महत्ता पर प्रकाश डाला।

इसके अतिरिक्त, चर्चा में जगन्नाथ पोद्दार, लक्ष्मीनारायण तिवारी, महंत गोविंद शर्मा, मनीष पारीख, गोपाल कृष्ण गोस्वामी और सिद्धार्थ शुक्ला जैसे प्रबुद्ध नागरिक शामिल रहे। संक्षेप में कहें तो, इन सभी वक्ताओं ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि महामहिम राष्ट्रपति के वृन्दावन आगमन पर उन्हें पत्र लिखकर और मीडिया के माध्यम से पटरानी यमुना को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की अपील की जाएगी। परिणामस्वरूप, संतों के इस आह्वान ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

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Pawan Singh

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Chief Editor, Taj News

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