48 साल बाद खुला जगन्नाथ मंदिर का ‘रहस्यमयी’ रत्न भंडार: 3D मैपिंग से हो रही अथाह सोने-चांदी की गिनती

National Desk, tajnews.in | Monday, April 13, 2026, 07:55:30 PM IST

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पुरी: भारत दुनिया भर में अपने प्राचीन मंदिरों और अथाह धार्मिक आस्था के लिए बहुत प्रसिद्ध है। दरअसल, हमारे देश में कई ऐसे रहस्यमयी और प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों की मजबूत दीवारों के पीछे अरबों-खरबों रुपये का भारी खजाना छिपा हुआ है। ओडिशा के पुरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ का विश्व प्रसिद्ध मंदिर भी ऐसा ही एक पवित्र धाम है। सोमवार को इस ऐतिहासिक मंदिर से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, मंदिर के ‘भीतरी रत्न भंडार’ (Inner Ratna Bhandar) को पूरे 48 साल के एक बहुत लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खोल दिया गया है। गौरतलब है कि, यह रत्न भंडार पिछले कई दशकों से पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ था। इसलिए, इसके अंदर रखे सोने और चांदी के अथाह खजाने को लेकर कई तरह के रहस्य बने हुए थे। आज प्रशासन और विशेष अधिकारियों की टीम ने इस रहस्यमयी तिजोरी के भारी ताले खोल दिए हैं। इसके परिणामस्वरूप, अंदर से सोने-चांदी और बेशकीमती हीरों का एक बहुत बड़ा जखीरा बाहर निकला है। निश्चित रूप से, यह पूरे देश और सनातन धर्म के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली पल है। प्रशासन ने अब इस पूरे खजाने की वैज्ञानिक गिनती के लिए अपनी एक विशेष टीम मैदान में उतार दी है।

HIGHLIGHTS
  1. 48 साल बाद उठा पर्दा: पुरी के विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार को 48 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद खोल दिया गया है।
  2. मिला अथाह खजाना: तिजोरियां खुलते ही अंदर से सोने के भारी मुकुट, चांदी के बर्तन और बेशकीमती हीरे-जवाहरात का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है।
  3. 3D मैपिंग से हो रही गिनती: ASI और RBI की विशेष टीम आधुनिक 3D मैपिंग और लेजर स्कैनिंग के जरिए आभूषणों की डिजिटल गिनती कर रही है।
  4. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: पूरे मंदिर परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और खजाने की निगरानी के लिए विशेष कमांडो तैनात किए गए हैं।

48 साल का लंबा इंतजार और रहस्यमयी तिजोरी का खुला ताला

भगवान जगन्नाथ का यह रत्न भंडार हमेशा से ही लोगों के लिए एक बहुत बड़े रहस्य का विषय रहा है। दरअसल, साल 1978 में आखिरी बार इस भीतरी रत्न भंडार को खोला गया था। उस समय भी अधिकारियों को अंदर से भारी मात्रा में सोना और चांदी मिला था। हालांकि, उसके बाद से किन्हीं विशेष कारणों और कड़े प्रशासनिक नियमों के चलते यह दरवाजा हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप, करोड़ों भक्तों के मन में हमेशा यह जानने की भारी उत्सुकता रहती थी कि उनके भगवान का खजाना आखिर कितना बड़ा है और वह किस हाल में है।

पिछले कुछ सालों से इस रत्न भंडार को खोलने की बहुत जोरदार और राष्ट्रव्यापी मांग उठ रही थी। कई हिंदू संगठनों और मंदिर के सेवायतों ने सरकार पर इस मामले में भारी दबाव बनाया था। अंततः, राज्य सरकार और उच्च न्यायालय (High Court) ने सभी पहलुओं की जांच करने के बाद इसे खोलने के कड़े आदेश जारी कर दिए। सोमवार की सुबह जब अधिकारियों ने एक विशेष अनुष्ठान के बाद इस रत्न भंडार के ताले तोड़े, तो वहां मौजूद हर शख्स की धड़कनें तेज हो गई थीं। 48 साल के इस लंबे इंतजार का खत्म होना अपने आप में एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक घटना बन गया है।

आधुनिक 3D मैपिंग और लेजर स्कैनिंग का हो रहा है इस्तेमाल

चूंकि, यह खजाना बहुत प्राचीन, ऐतिहासिक और बेशकीमती है, इसलिए इसकी गिनती करना कोई आसान काम बिल्कुल नहीं है। प्रशासन ने इस भारी खजाने की पूरी तरह से सुरक्षित और सटीक गिनती के लिए सबसे आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बहुत बड़ी टीम मौके पर मौजूद है। अधिकारियों ने खजाने की गिनती के लिए विशेष 3D मैपिंग (3D Mapping) तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

इसके अलावा, लेजर स्कैनिंग (Laser Scanning) मशीनों के जरिए हर एक आभूषण और मुकुट की बहुत ही सूक्ष्म डिजिटल जांच की जा रही है। ताकि, भविष्य में खजाने की कोई भी हेराफेरी या चोरी बिल्कुल न हो सके। यह आधुनिक तकनीक हर एक गहने का सटीक वजन, उसकी शुद्धता और उसका 3D आकार तुरंत अपने डिजिटल सर्वर में सेव कर लेती है। इसलिए, यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही ज्यादा पारदर्शी, तेज और सुरक्षित बन गई है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस तकनीक से गिनती का काम बिना किसी मानवीय त्रुटि के पूरा हो जाएगा। हालांकि, खजाना इतना अधिक विशाल है कि इस पूरी गिनती की प्रक्रिया में कई हफ्तों का लंबा समय लग सकता है।

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लकड़ी के बक्सों से निकला करोड़ों का अनमोल खजाना

रत्न भंडार के अंदर का अद्भुत नजारा देखकर वहां मौजूद अधिकारियों की आंखें पूरी तरह से फटी रह गईं। दरअसल, अंदर के कमरे में धूल और मकड़ी के जालों के बीच कई पुरानी और लोहे की भारी तिजोरियां रखी हुई थीं। इसके अलावा, सागौन की लकड़ी के कई बड़े और नक्काशीदार बक्से भी वहां सुरक्षित मौजूद थे। अधिकारियों ने जब बहुत सावधानी से इन बक्सों को खोला, तो अंदर से सोने के भारी और विशाल मुकुट बाहर निकले। वहीं दूसरी ओर, चांदी के बड़े-बड़े बर्तन, सोने की मालाएं और हीरे-जवाहरात से जड़े हुए कई अनमोल आभूषण भी वहां सहेज कर रखे हुए थे।

गौरतलब है कि, भगवान जगन्नाथ को पुराने समय में कई महान राजा-महाराजाओं और धनवान भक्तों ने ये सभी बेशकीमती चीजें दान में दी थीं। इसलिए, इन आभूषणों का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक मूल्य आज के बाजार भाव से कहीं ज्यादा है। लगातार 48 सालों से बंद रहने और नमी के कारण कुछ पुराने बक्सों पर जंग जरूर लग चुका था। हालांकि, बक्सों के अंदर रखा हुआ सोना और हीरा आज भी पूरी तरह से अपनी आभा बिखेर रहा है और चमक रहा है। प्रशासन इन सभी ऐतिहासिक आभूषणों को बहुत सावधानी के साथ निकाल कर नए और सुरक्षित बक्सों में शिफ्ट कर रहा है। निश्चित रूप से, यह एक बहुत बड़ा और बेहद थका देने वाला कड़ा काम है।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और कमांडो का सख्त पहरा

चूंकि, यह पूरा मामला अरबों-खरबों रुपये के भारी खजाने से सीधा जुड़ा हुआ है, इसलिए मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से बहुत ज्यादा कड़ा कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने भीतरी रत्न भंडार के चारों तरफ भारी पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से तैनात कर दिया है। दरअसल, राज्य पुलिस के स्पेशल कमांडो (Special Commandos) की एक पूरी हथियारबंद टुकड़ी वहां चौबीसों घंटे अपना कड़ा पहरा दे रही है। किसी भी बाहरी या अनधिकृत व्यक्ति को उस परिसर के अंदर जाने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं है।

इसके अलावा, जो भी अधिकारी या सेवायत अंदर गिनती करने के लिए जा रहे हैं, उनकी गेट पर ही कई स्तरों पर बहुत सघन चेकिंग की जा रही है। अधिकारियों को अपने साथ कोई भी धातु की वस्तु, पेन, डायरी या मोबाइल फोन ले जाने की सख्त और कड़ी मनाही है। उन्हें अंदर जाने के लिए खास बिना जेब वाले कपड़े दिए गए हैं। गौरतलब है कि, पूरी गिनती की प्रक्रिया की दर्जनों सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के जरिए एचडी क्वालिटी में लाइव रिकॉर्डिंग की जा रही है। इसलिए, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या चोरी की कोई भी गुंजाइश नहीं बची है। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी बारीक नजर रखने के लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष निगरानी समिति (Monitoring Committee) भी बना दी है।

भक्तों की अटूट आस्था और पुजारियों की विशेष पूजा

भगवान जगन्नाथ में करोड़ों हिंदुओं की बहुत गहरी और बिल्कुल अटूट आस्था बसती है। दरअसल, यह सारा खजाना उन असंख्य भक्तों और पुराने राजाओं द्वारा भगवान के श्रीचरणों में पूरे प्रेम से अर्पित किया गया था। इसलिए, इस पूरे खजाने पर सिर्फ और सिर्फ महाप्रभु जगन्नाथ का ही पूर्ण अधिकार है। 48 साल बाद जब इस खजाने का दरवाजा दोबारा खुला है, तो दुनिया भर के भक्तों के मन में एक बहुत बड़ी खुशी और भारी उत्साह है। लोग अपने भगवान की महिमा और उनके ऐश्वर्य के गुणगान गा रहे हैं।

इस पूरी ऐतिहासिक प्रक्रिया के दौरान मंदिर के पुजारियों (Sevayats) की भी एक बहुत ही अहम और मुख्य भूमिका रही है। दरअसल, रत्न भंडार खोलने से ठीक पहले मुख्य पुजारियों ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की बहुत विशेष पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने भगवान से इस बड़े और कठिन काम के लिए खास अनुमति और अपना पवित्र आशीर्वाद मांगा था। चूंकि, यह एक बहुत पुरानी और पवित्र धार्मिक परंपरा है, इसलिए इसका पूरी निष्ठा से पालन करना प्रशासन के लिए बेहद जरूरी था। अंततः, पूरे देश की निगाहें अब पुरी के इस पवित्र मंदिर और 3D मैपिंग के बाद आने वाले अंतिम आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। यह अद्भुत घटना भारतीय इतिहास के सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो जाएगी।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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