Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 06 March 2026, 09:30 pm IST
Taj News International Desk
दुनिया भर की सबसे बड़ी खबरें, युद्ध और कूटनीतिक हलचल
नई दिल्ली (New Delhi): रायसीना डायलॉग में ईरान के उप-विदेश मंत्री ने अपना बहुत ही कड़ा बयान दिया है। दरअसल, सईद खतीबजादेह ने अमेरिका और इजराइल को एक बहुत बड़ी और खुली चुनौती दी है। ताज न्यूज़ (Taj News) की इंटरनेशनल डेस्क के अनुसार, उन्होंने कहा कि ईरान अपनी रक्षा के लिए आखिरी गोली तक लड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप, पूरी दुनिया में उनके इस आक्रामक बयान की बहुत भारी चर्चा हो रही है। इसलिए, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर भी अपना बहुत तीखा और सीधा हमला बोला है। अंततः, उन्होंने साफ कहा कि ट्रम्प न्यूयॉर्क का मेयर नहीं चुन सकते, वो हमारा लीडर क्या खाक तय करेंगे।
ईरान जंग का बड़ा असर: रसोई गैस की किल्लत रोकने के लिए सरकार ने लागू की इमरजेंसी पावर, तेल कंपनियों को सख्त आदेश
आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक लड़ेगा ईरान का हर नागरिक
मुख्य रूप से, दिल्ली में इस समय ‘रायसीना डायलॉग 2026’ का बहुत शानदार आयोजन चल रहा है। इसके अलावा, शुक्रवार को ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह भी इसमें प्रमुखता से शामिल हुए। दूसरी ओर, उन्होंने अमेरिकी-इजराइली हमले पर अपने देश का बहुत कड़ा और स्पष्ट रुख सबके सामने रखा। अतः, उन्होंने कहा कि तेहरान के पास बहादुरी से लड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प बिल्कुल नहीं है। इसलिए, हमने अपने देश की रक्षा के लिए आखिरी गोली तक लड़ने की पक्की कसम खाई है। अंततः, ईरान का हर एक सैनिक अपने देश के लिए अपनी जान पूरी तरह से कुर्बान कर देगा।
डोनाल्ड ट्रम्प पर बोला बहुत ही तीखा, सीधा और करारा हमला
ईरानी मंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अपना बहुत ही करारा और तीखा जवाब दिया है। दरअसल, ट्रम्प हमेशा ईरान में नेतृत्व बदलने की बहुत बड़ी-बड़ी और खोखली बातें करते रहते हैं। इसके विपरीत, खतीबजादेह ने उनकी इस बात का बहुत ही कड़ा मजाक दुनिया के सामने उड़ाया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि ट्रम्प अपने ही देश में न्यूयॉर्क का मेयर तक नियुक्त बिल्कुल नहीं कर सकते हैं। अतः, वे हमारे महान देश का लीडर और नेतृत्व क्या खाक तय करेंगे। इसलिए, उन्होंने ट्रम्प की इस खराब सोच को एक बहुत ही घटिया और औपनिवेशिक नजरिया बताया है। अंततः, अमेरिका केवल ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को पूरी तरह से गिराना चाहता है।
अमेरिका-इजराइल के भारी हमलों और युद्ध से गुजर रहा है ईरान
न्यूज एजेंसी से बातचीत में खतीबजादेह ने ईरान की वर्तमान और बहुत ही भयानक स्थिति खुलकर बताई। मुख्य रूप से, उन्होंने कहा कि ईरान इस समय पूरी तरह से एक भयंकर युद्ध से गुजर रहा है। इसके अलावा, हमारे निर्दोष साथी नागरिकों पर अमेरिका और इजराइल लगातार अपने भारी हमले कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान के लिए अभी सबसे जरूरी बात इन खूंखार हमलावरों का पूरा और कड़ा विरोध करना है। अतः, देश के सभी नागरिक अपनी अंतरराष्ट्रीय (International) मातृभूमि को बचाने के लिए पूरी तरह एकजुट हैं। इसलिए, हम अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
यह हमारे अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई है, हम पीछे नहीं हटेंगे
रायसीना डायलॉग के विशेष सेशन में उनसे युद्ध को लेकर कई बहुत तीखे और बड़े सवाल पूछे गए। दरअसल, खतीबजादेह ने इस संघर्ष को सीधे ईरान के अस्तित्व की बहुत बड़ी लड़ाई बताया। इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी ताकतें ईरान को पूरी तरह खत्म करना चाहती हैं। हालांकि, हम हमलावरों को पीछे धकेलने के लिए अपने देश की रक्षा की भारी लड़ाई पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। अतः, जब किसी देश के शीर्ष नेता को निशाना बनाया जाता है, तो यह बहुत खतरनाक बात होती है। इसलिए, अगर यह नया सामान्य बन गया, तो पूरी दुनिया के लिए बहुत गंभीर और बड़ा खतरा होगा।
इजराइल की मोसाद और फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन का बहुत बड़ा डर
ईरान कभी भी इस भयंकर और खूनी संघर्ष को दूसरे देशों तक बिल्कुल भी नहीं फैलाना चाहता है। मुख्य रूप से, खतीबजादेह ने स्पष्ट किया कि हम हर तरफ शांति बनाए रखने की अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर कई बहुत गंभीर और बड़े आरोप लगाए। दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि मोसाद कई जगहों पर अपने ‘फॉल्स-फ्लैग’ ऑपरेशन की भारी कोशिश कर रहा है। अतः, वे किसी तेल रिफाइनरी या साइप्रस को अपना बहुत बड़ा निशाना आसानी से बना सकते हैं। अंततः, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भी स्पष्ट माना है कि इन खतरनाक घटनाओं की शुरुआत ईरान से बिल्कुल नहीं हुई।
खाड़ी देशों में भी पकड़ी गई हैं संदिग्ध और खतरनाक गतिविधियां
इस युद्ध के बीच कई नई और बहुत ही डरावनी रिपोर्टें भी दुनिया के सामने आई हैं। दरअसल, इन रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब और कतर में कुछ खतरनाक गतिविधियां अचानक पकड़ी गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, वहां कुछ मोसाद समूहों को फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। हालांकि, ईरान का ऐसा कोई भी बुरा या हिंसक इरादा बिल्कुल भी नहीं है। अतः, हम बिल्कुल नहीं चाहते कि यह विनाशकारी संघर्ष दूसरे खाड़ी देशों तक बहुत तेजी से फैले। इसलिए, ईरान बहुत ही ज्यादा सतर्कता और अपनी पूरी समझदारी के साथ अपना हर एक कदम आगे बढ़ा रहा है।
कूटनीति ही है विवाद सुलझाने का एकमात्र, सही और अच्छा रास्ता
युद्ध को रोकने के अहम सवाल पर भी उप-विदेश मंत्री ने अपना बहुत ही सीधा जवाब मंच पर दिया। मुख्य रूप से, उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से आक्रमण करने वाले पक्ष पर ही निर्भर करता है। इसके अलावा, अगर वे आज अपना हमला पूरी तरह रोक दें, तो युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए रुक जाएगा। दूसरी ओर, हम कोई आक्रमण बिल्कुल नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल अपनी आत्मरक्षा कर रहे हैं। अतः, किसी भी देश के लिए कूटनीति ही विवाद सुलझाने का सबसे अच्छा और बिल्कुल सही रास्ता है। अंततः, मुझे शक है कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन कूटनीति की असली अहमियत को ठीक से समझता भी है या नहीं।
हिंद महासागर में डूबे ईरानी जहाज को भारत ने ही खास बुलाया था
खतीबजादेह ने हिंद महासागर में डूबे एक ईरानी जहाज पर भी अपना बहुत बड़ा बयान दिया। दरअसल, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जहाज भारत के विशेष निमंत्रण पर ही यहां आया था। इसके परिणामस्वरूप, यह जहाज एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में पूरे सम्मान के साथ भाग लेने आया था। साथ ही, वह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम के लिए था, और उस पर कोई भी हथियार बिल्कुल नहीं थे। अतः, इस दुखद घटना में कई युवा और होनहार ईरानी नाविकों की बहुत दर्दनाक मौत हुई। इसलिए, उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सभी को पूरा और सच्चा सम्मान हमेशा करना चाहिए।
भारत और ईरान के बीच हैं बहुत ही पुराने और काफी गहरे संबंध
इस बड़े कार्यक्रम के दौरान खतीबजादेह की भारत के विदेश मंत्री से एक बहुत संक्षिप्त मुलाकात हुई। मुख्य रूप से, उन्होंने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर अपना पूरा और खास जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ईरान और भारत के बीच बहुत ही पुराने और सभ्यतागत गहरे संबंध हैं। दूसरी ओर, दोनों देश इन गहरे रिश्तों को हमेशा काफी ज्यादा और अपना खास महत्व देते हैं। अतः, रायसीना डायलॉग जैसे मंच इन आपसी रिश्तों को और भी ज्यादा मजबूत बनाते हैं। अंततः, कुर्द समुदाय को भी उन्होंने ईरान की पहचान का एक बहुत ही अहम हिस्सा बताया।
क्या है रायसीना डायलॉग 2026 और आखिर इसका मुख्य उद्देश्य?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च को ही ‘रायसीना डायलॉग 2026’ का बहुत शानदार उद्घाटन किया था। दरअसल, इस बड़े कार्यक्रम को भारत का विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन मिलकर हमेशा आयोजित करते हैं। इसके अलावा, इस बार रायसीना डायलॉग का यह 11वां संस्करण बहुत ही भव्य तरीके से आयोजित किया जा रहा है। दूसरी ओर, यह बहुत खास सम्मेलन 5 से 7 मार्च तक नई दिल्ली में लगातार चलेगा। अतः, इसमें 110 देशों के लगभग 2700 विदेशी प्रतिनिधियों ने अपना शानदार और अहम हिस्सा लिया है। इसलिए, यहां वैश्विक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अर्थव्यवस्था जैसे कई बड़े मुद्दों पर गहरी चर्चा हो रही है। अंततः, यह सिंगापुर के ‘शांगरी-ला डायलॉग’ की तर्ज पर ही शुरू किया गया है।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
अपनी खबर सीधे WhatsApp पर भेजें:
7579990777










1 thought on “रायसीना डायलॉग 2026 में ईरान की खुली चुनौती: ‘आखिरी गोली तक लड़ेंगे, ट्रम्प क्या खाक हमारा लीडर तय करेंगे’”