Agra News Desk, [tajnews.in] | Friday, March 20, 2026, 04:15:10 AM IST
आगरा: ताजनगरी के बहुचर्चित राजू गुप्ता हिरासत मौत (Custodial Death) मामले में सात साल, तीन महीने और 27 दिन बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, एडीजे-17 नितिन कुमार ठाकुर की कोर्ट ने तत्कालीन दरोगा अनुज सिरोही को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, कोर्ट ने मृतक के पड़ोसी अंशुल प्रताप सिंह को भी 7 साल की कैद की सजा दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने पुलिस की दोषपूर्ण विवेचना पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए हैं। परिणामस्वरूप, आगरा पुलिस के उन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं जिन्होंने इस संवेदनशील मामले की जांच में लापरवाही बरती थी।
- दरोगा को जेल: सिकंदरा थाने के तत्कालीन एसआई अनुज सिरोही को 10 साल और पड़ोसी अंशुल को 7 साल की सजा।
- अफसरों पर गाज: कोर्ट ने तत्कालीन सीओ चमन सिंह चावड़ा और इंस्पेक्टर राजेश कुमार पांडेय के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए।
- क्या था मामला: 2018 में चोरी के शक में पुलिस राजू गुप्ता को थाने ले गई थी, जहाँ प्रताड़ना के कारण उसकी मौत हो गई थी।
- सीआईडी की भूमिका: मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद सीआईडी ने 17 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
हवालात में मौत का खौफनाक सच: बेरहमी से पिटाई ने ली थी राजू की जान
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, घटना 21 नवंबर 2018 की है जब नरेंद्र एन्क्लेव निवासी राजू गुप्ता को पड़ोसी अंशुल प्रताप की शिकायत पर पुलिस थाने ले गई थी। तुलनात्मक रूप से देखें तो, चोरी के मामूली शक ने पुलिस को इतना हैवान बना दिया कि राजू की मां रेनू गुप्ता के सामने ही उसे बेरहमी से पीटा गया। संक्षेप में कहें तो, हवालात में रात भर चली प्रताड़ना के बाद अगले दिन राजू की तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया। परिणामस्वरूप, वैश्य समाज ने इस हत्या के खिलाफ आगरा में जबरदस्त आंदोलन किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजू के शरीर पर मिले दर्जनों चोटों के निशान पुलिसिया बर्बरता की गवाही दे रहे थे।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने 82 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि राजू की मौत पुलिस अभिरक्षा में शारीरिक प्रताड़ना के कारण हुई थी। संक्षेप में कहें तो, तत्कालीन विवेचक राजेश कुमार पांडेय और क्षेत्राधिकारी चमन सिंह चावड़ा ने साक्ष्यों के साथ न्याय नहीं किया। तुलनात्मक रूप से देखें तो, कोर्ट ने गृह सचिव और पुलिस कमिश्नर को इन अधिकारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है। परिणामस्वरूप, वर्तमान में जसराना के थाना प्रभारी राजेश पांडेय और भदोही में तैनात चमन सिंह चावड़ा की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग गए हैं।
दोषी दरोगा गिरफ्तार, अफसरों पर गिरेगी गाज: सीआईडी की चार्जशीट बनी आधार
ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, जमानत पर चल रहे दोषी दरोगा अनुज सिरोही को सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। संक्षेप में कहें तो, सीआईडी की विवेचना इस मामले में सबसे अहम कड़ी साबित हुई। तुलनात्मक रूप से देखें तो, सीआईडी ने तत्कालीन इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह सहित 17 पुलिसकर्मियों को अवैध हिरासत और गैर-इरादतन हत्या का आरोपी माना था। परिणामस्वरूप, कोर्ट ने उन सभी पुलिसकर्मियों की संलिप्तता को पुख्ता माना जो घटना के समय थाना सिकंदरा में मौजूद थे।
इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की साख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने साक्ष्यों के साथ न्याय नहीं किया। संक्षेप में कहें तो, एडीजे नितिन कुमार ठाकुर के इस फैसले ने संदेश दिया है कि वर्दी की आड़ में कानून से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। परिणामस्वरूप, आगरा के पुलिस गलियारों में इस फैसले के बाद से भारी खामोशी और डर का माहौल है। संक्षेप में कहें तो, पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, हम इस मामले में होने वाली अगली विभागीय कार्रवाई पर भी पैनी नजर बनाए रखेंगे।
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Pawan Singh
Chief Editor, Taj News













