Ceiling collapse at TTE Rest House Agra Fort Railway Station raises questions on construction quality, Indian Railways NCR

आगरा फोर्ट स्टेशन पर बड़ा हादसा टला: 2020 में बने नवनिर्मित TTE विश्राम गृह की गिरी सीलिंग, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 19 Feb 2026, 8:15 pm IST

आगरा: भारतीय रेलवे (Indian Railways) एक तरफ देश भर में स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत विश्वस्तरीय बनाने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही साल पहले हुए निर्माण कार्यों की परतें अब उधड़ने लगी हैं। रेलवे के निर्माण कार्यों में किस स्तर की लापरवाही और भ्रष्टाचार होता है, इसकी एक बानगी ऐतिहासिक आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन (Agra Fort Railway Station) पर देखने को मिली है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ‘चल टिकट परीक्षक एवं अधीनस्थ विश्राम गृह’ (TTE and Subordinate Rest House) की सीलिंग (छत का अंदरूनी हिस्सा) भरभरा कर गिर गई। गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह सीलिंग गिरी, उस समय उसके ठीक नीचे कोई मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बहुत बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता था। इस घटना ने रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दी है।

Ceiling collapse at TTE Rest House Agra Fort Railway Station raises questions on construction quality, Indian Railways NCR
HIGHLIGHTS
  1. आगरा फोर्ट में लापरवाही: 6 मार्च 2020 को बड़े उत्साह के साथ उद्घाटित हुए नवनिर्मित ‘TTE विश्राम गृह’ की सीलिंग भरभरा कर गिरी।
  2. टला बड़ा हादसा: गनीमत रही कि घटना के वक्त नीचे कोई रेलवे कर्मचारी मौजूद नहीं था, अन्यथा जा सकती थी जान।
  3. गुणवत्ता पर गंभीर सवाल: महज कुछ ही वर्षों में करोड़ों की लागत से बनी इमारत के दरकने से भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका।
  4. उच्चस्तरीय जांच की मांग: कर्मचारियों ने पूछा- क्या रेलवे प्रशासन ठेकेदार और जिम्मेदार इंजीनियरों पर कार्रवाई कर उच्चस्तरीय जांच कराएगा?

मार्च 2020 में हुआ था भव्य उद्घाटन, बड़े-बड़े किए गए थे दावे आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों और विशेषकर लंबी दूरी से ड्यूटी करके आने वाले टीटीई (TTE) स्टाफ की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस नए विश्राम गृह का निर्माण कराया गया था। 6 मार्च 2020 को बड़े ही गाजे-बाजे और उत्साह के साथ इस नवनिर्मित विश्राम गृह का उद्घाटन किया गया था। उस समय रेलवे के आला अधिकारियों ने फीता काटते हुए इसे यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सुविधाओं के विस्तार में एक “महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम” बताया था।

उद्घाटन के समय यह दावा किया गया था कि इस विश्राम गृह में आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं और इसके निर्माण में बेहतरीन सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, ताकि थके-हारे रेल कर्मचारियों को ड्यूटी के बाद एक सुरक्षित और आरामदायक माहौल मिल सके। लेकिन उद्घाटन के महज कुछ ही वर्षों बाद, इस इमारत की सीलिंग गिरने की घटना ने उन सभी दावों की हवा निकाल दी है। यह सोचने वाली बात है कि जो इमारत कम से कम 50-60 साल तक मजबूती से खड़ी रहनी चाहिए थी, वह 6 साल के भीतर ही क्यों दरकने लगी?

टल गया बड़ा हादसा, लेकिन टला नहीं है खतरा चल टिकट परीक्षक (TTE) दिन-रात ट्रेनों में सफर करते हैं और अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद इन्हीं विश्राम गृहों (Running Rooms/Rest Houses) में आकर आराम करते हैं। जिस वक्त आगरा फोर्ट के इस विश्राम गृह की फॉल्स सीलिंग और प्लास्टर का भारी भरकम हिस्सा नीचे गिरा, संयोगवश कोई कर्मचारी वहां सो नहीं रहा था। यदि यह मलबा किसी सोते हुए कर्मचारी के ऊपर गिरता, तो निश्चित रूप से यह एक जानलेवा दुर्घटना साबित हो सकती थी।

भले ही इस घटना में कोई जनहानि या बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन इसने वहां रुकने वाले तमाम रेलवे कर्मचारियों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया है। अब कर्मचारी इस विश्राम गृह में जाने और सोने से कतराने लगे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि इमारत का कोई अन्य हिस्सा भी कभी भी गिर सकता है। यह सीधे तौर पर रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ एक भद्दा खिलवाड़ है।

करोड़ों की लागत और गुणवत्ता से समझौता: जांच का है विषय इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री (Construction Material) की गुणवत्ता को लेकर उठ रहा है। रेलवे के किसी भी प्रोजेक्ट में जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। जब कोई टेंडर पास होता है, तो निर्माण कार्य की निगरानी के लिए रेलवे के जूनियर इंजीनियर से लेकर सीनियर इंजीनियर तक की पूरी एक फौज तैनात होती है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि:

  • ठेकेदार ने निर्माण के दौरान किस स्तर का घटिया मटीरियल इस्तेमाल किया?
  • निर्माण कार्य के दौरान रेलवे के इंजीनियरों ने गुणवत्ता की जांच (Quality Check) ठीक से क्यों नहीं की?
  • क्या कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के चलते सीलिंग और प्लास्टर के काम में लीपापोती कर दी गई?

यदि करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए सरकारी निर्माण कार्य कुछ ही वर्षों में इस तरह से जवाब देने लगें, तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य (Criminal Negligence) की श्रेणी में आता है, जिसकी निष्पक्ष और कड़ी जांच होनी चाहिए।

क्या रेलवे कराएगा उच्चस्तरीय जांच? आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर हुई इस घटना के बाद अब सभी की निगाहें उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के महाप्रबंधक और आगरा मंडल के डीआरएम (DRM) पर टिकी हैं। स्थानीय रेलकर्मियों और यूनियन नेताओं ने मांग की है कि इस मामले को रफा-दफा करने के बजाय इसकी एक उच्चस्तरीय तकनीकी जांच (High-level Enquiry) कराई जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय रेलवे इस पूरे मामले की गंभीरता को समझेगा? क्या उस ठेकेदार (Contractor) को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा जिसने यह घटिया निर्माण किया? और क्या उन रेलवे अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी, जिनकी देखरेख में यह काम पास हुआ था? यह घटना रेलवे प्रशासन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है। यदि समय रहते इस तरह के घटिया निर्माण कार्यों का ऑडिट (Audit) नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी त्रासदी होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

#AgraFortStation #IndianRailways #CeilingCollapse #RailwayNews #AgraNews #TajNews #ConstructionScam

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Editor in Chief, Taj News

एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) का वायरल वीडियो पर बड़ा स्पष्टीकरण: ‘भ्रामक है खबर, मरीज को दिया गया पूरा इलाज और सम्मान’
GRP Agra Cantt Action: आगरा कैंट स्टेशन से दो शातिर मोबाइल चोर गिरफ्तार, जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने कसा शिकंजा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *