आगरा भाजपा महानगर कार्यकारिणी में असंतोष की विस्तृत रपट।

आगरा भाजपा में घमासान: जनप्रतिनिधियों ने बांटी ‘रेवड़ियां’, पुराने दिग्गज दरकिनार; वरिष्ठ नेता मोहन सिंह लोधी काmember पद से इस्तीफा

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आगरा समाचार (Agra News) Desk, Taj News | Wednesday, March 18, 2026, 06:15:20 AM IST

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आगरा: ताजनगरी भाजपा में सोमवार को घोषित हुई महानगर कार्यकारिणी के बाद अंतर्कलह का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, नवगठित टीम में संगठन के समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। इसके विपरीत, स्थानीय सांसदों और विधायकों के करीबियों पर ‘रेवड़ियां’ बांटी गई हैं। ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, इस अनदेखी से क्षुब्ध होकर पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व पार्षद और उपनेता पार्षद दल रहे मोहन सिंह लोधी ने कार्यकारिणी सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए जनप्रतिनिधियों पर अपने ‘गुर्गे’ सेट करने और मूल कार्यकर्ताओं के अपमान का आरोप लगाया है। यह असंतोष आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

HIGHLIGHTS
  • नेताओं के करीबियों की लॉटरी: महानगर टीम में सांसद-विधायकों के चहेतों को रसूखदार पदों से नवाजा गया।
  • पुराने दिग्गज दरकिनार: 30 साल से सेवा कर रहे वरिष्ठों की अनदेखी, संगठन में असंतोष चरम पर।
  • मोहन सिंह लोधी का इस्तीफा: लोधी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सदस्य पद को ठुकराया।
  • गुर्गे सेट करने का आरोप: लोधी ने पत्र जारी कर ‘सबका साथ-सबका विकास’ पर खड़े किए सवाल।

जनप्रतिनिधियों के दरबार में हाजिरी लगाने वालों की ‘चांदी’, जमीन पर काम करने वाले ‘बेगानी’

ताज न्यूज़ की रपट के अनुसार, भाजपा जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की घोषणा के एक साल बाद कार्यकारिणी का गठन हुआ है। सोमवार को जब यह बहुप्रतीक्षित सूची जारी हुई, तो इसे देखकर पार्टी के पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं के पैरों तले जमीन खिसक गई। तुलनात्मक रूप से, सूची में अधिकतर नाम जनप्रतिनिधियों के चहेतों के हैं। संगठन ने कई पुराने नामों और दिग्गजों को दरकिनार कर उन नये चेहरों को समिति में स्थान दिया है, जिनका संगठन में योगदान नगण्य है। इसके अतिरिक्त, पार्टी के कार्यक्रमों में बढ़चढ़ हिस्से लेने वाले कार्यकर्ता लगाता रहे उपेक्षा का आरोप।

उदाहरण के लिए, महानगर कार्यकारिणी में मंत्री से उपाध्यक्ष पद पर प्रमोट हुए नवीन गौतम सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसी तरह, महानगर कार्यकारिणी में महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण और रसूखदार पद पर सीधे एंट्री पाने वाले नितेश शिवहरे एमएलसी विजय शिवहरे के भांजे हैं। नितेश शिवहरे इससे पहले महानगर की कार्यकारिणी में किसी पद पर नहीं रहे। परिणामस्वरुप, संगठन की मजबूती के लिए जमीन पर काम करने वालों की जगह उन लोगों को पद बांटे गए हैं जो केवल चुनाव के समय या बड़े नेताओं के दरबार में सक्रिय दिखते हैं।

किस गुट को क्या मिला? जातीय समीकरण साधने में फेल रहा संगठन

भाजपा ने इस सूची के जरिए शहर की चारों विधानसभाओं में जातीय समीकरणों को साधने का दावा किया है, लेकिन अंदरूनी कलह कुछ और ही बयाँ कर रही है। ताज न्यूज़ की विशेष रपट के अनुसार, महामंत्री बने महेश शर्मा आगरा कैंट से विधायक डा. जीएस धर्मेश के करीबी हैं। उपाध्यक्ष बने मनवीर चौहान को एत्मादपुर के विधायक डा. धर्मपाल सिंह का करीबी बताया जाता है। उपाध्यक्ष पद पर जगह बनाने में कामयाब रहे दीपू जादौन की पहुंच सीधे लखनऊ कार्यालय तक है। बताया जा रहा है कि वे प्रदेश महामंत्री संगठन के सहयोगी के करीबी हैं। वहीं, मंत्री पद पर कार्यकारिणी में जगह पाने वाले अनिल सारस्वत और नेहा गुप्ता को राज्यसभा सदस्य नवीन जैन का करीबी माना जाता है।

हालांकि, संगठन के सबसे रसूखदार महामंत्री पद पर किसी भी महिला को स्थान नहीं मिला है। 8 मंत्रियों की सूची में केवल 3 महिलाओं को स्थान देकर आधी आबादी को साधने का औपचारिक प्रयास किया गया है। इसके अलावा, अतुल गर्ग को कोषाध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस कार्यकारिणी के गठन में संगठन से ज्यादा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पसंद को तरजीह मिली है। यही कारण है कि समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच उपेक्षा का स्वर गूंजने लगा है।

वरिष्ठ नेता मोहन सिंह लोधी का पत्र: जनप्रतिनिधियों ने ‘अपनों को बांटी रेवड़ियां’

पार्टी में उभरने लगा विरोध, जब वरिष्ठ नेता व पूर्व पार्षद मोहन सिंह लोधी ने कार्यकारिणी में सिर्फ सदस्य बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पत्र जारी कर कहा है- आपने मुझे महानगर कार्यकारिणी में सदस्य बनाया है, आपका धन्यवाद। 30 साल लगातार पार्टी की सेवा करने पर भारी-भरकम पद देकर समाज को अपमान करने का काम किया है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि जब पार्टी सत्ता में नहीं थी, तब दिन-रात कढ़ी मेहनत की थी। आज लोधी समाज को एक भी पदाधिकारी नहीं बनाया गया है। जबकि आगरा जिले में लगभग 3.50 लाख वोट लोधी समाज का है।

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समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं: लोधी ने सदस्य पद को ठुकराया

मोहन सिंह लोधी ने पत्र में अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए लिखा है कि वे पार्टी में वार्ड उपाध्यक्ष से लेकर युवा मोर्चा, मंडी प्रभारी, मंडल महामंत्री, मंडल अध्यक्ष, दो बार पार्षद, नगर निगम सदन में सचेतक, मुख्य सचेतक एवं उपनेता पार्षद दल रह चुका हूं। इतने वरिष्ठ नेता को सिर्फ कार्यकारिणी सदस्य बनाना उनका और समाज का अपमान है। उन्होंने पत्र में सीधे जनप्रतिनिधियों पर प्रहार करते हुए कहा कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपने गुर्गे सेट करने और अपनों को रेवड़ी बांट दी है। मूल कार्यकर्ताओं का अपमान किया है। इससे क्षुब्ध होकर महानगर कार्यकारिणी से त्यागपत्र देता हूं। परिणामस्वरुप, लोधी समाज भाजपा से ठगा हुआ महसूस कर रहा है। (1000+ शब्दों की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ समाप्त होती है…)

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Pawan Singh

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