दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए बरी

दिल्ली शराब नीति केस: आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सभी आरोपों से बरी

दिल्ली/NCR

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 27 Feb 2026, 03:30 pm IST

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Taj News National & Political Desk

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नई दिल्ली (New Delhi): दिल्ली शराब नीति केस (Delhi Liquor Policy Case) में आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक की सबसे बड़ी कानूनी और राजनीतिक जीत हासिल हुई है। कई महीनों की लंबी कानूनी लड़ाई, जेल यात्राओं और भारी राजनीतिक उठापटक के बाद, अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को इस बहुचर्चित मामले में सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है। ताज न्यूज़ (Taj News) की राजनीतिक डेस्क के अनुसार, यह फैसला न केवल आम आदमी पार्टी के लिए एक ‘संजीवनी’ के रूप में आया है, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में चल रही सीबीआई (CBI) की याचिकाओं और निचली अदालत के घटनाक्रमों के बाद आए इस ऐतिहासिक फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच एजेंसियां इन शीर्ष नेताओं के खिलाफ कोई भी पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रही हैं। दिल्ली शराब नीति केस में मिली इस क्लीन चिट ने विपक्ष के उन सभी दावों को धराशायी कर दिया है जो पिछले तीन सालों से ‘आप’ नेताओं को घेरने के लिए किए जा रहे थे।

HIGHLIGHTS
  • ‘आप’ की बड़ी जीत: दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अदालत से मिली पूरी तरह क्लीन चिट।
  • केजरीवाल की प्रतिक्रिया: फैसले के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा— “मैं भ्रष्ट नहीं हूं, कोर्ट ने साबित कर दिया कि हम ईमानदार हैं।”
  • सीबीआई की याचिकाएं खारिज: सबूतों के अभाव में जांच एजेंसियों (CBI/ED) के सभी दावे और आरोप अदालत में टिक नहीं सके।
  • सियासी भूचाल: इस फैसले के बाद दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी जश्न का माहौल है।

दिल्ली शराब नीति केस: कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और सीबीआई का झटका

इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2021-22 में लागू की गई नई आबकारी नीति (Excise Policy) में छिपी हुई थीं। हाल ही में, दिल्ली शराब नीति केस के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को सीबीआई की उस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत में जस्टिस रविंदर डुडेजा (Justice Ravinder Dudeja) की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

अदालत की लंबी बहसों और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और भ्रष्टाचार के जो आरोप आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर लगाए गए थे, उनका कोई सीधा और दस्तावेजी सबूत (Documentary Evidence) जांच एजेंसियों के पास नहीं था। सीबीआई और ईडी (ED) कई महीनों की हिरासत और पूछताछ के बावजूद मनी ट्रेल (Money Trail) साबित करने में नाकाम रहीं। इसी आधार पर न्यायालय ने न्याय के पक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए इन दिग्गज नेताओं को दिल्ली शराब नीति केस के हर आरोप से मुक्त कर दिया। यह सीबीआई के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया: “मैं भ्रष्ट नहीं हूं, अदालत ने मुहर लगा दी”

अदालत से क्लीन चिट मिलने के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जनता को संबोधित किया। उनका यह संबोधन भावुक होने के साथ-साथ बेहद आक्रामक भी था। दिल्ली शराब नीति केस में बरी होने पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा, “मैंने हमेशा कहा था कि मैं भ्रष्ट नहीं हूं। आज देश की सबसे बड़ी अदालत ने यह कह दिया है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार हैं। हमारी ईमानदारी पर जो कीचड़ उछाला गया था, आज न्यायपालिका ने उसे पूरी तरह से साफ कर दिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि इस दिल्ली शराब नीति केस को पूरी तरह से एक राजनीतिक साजिश के तहत गढ़ा गया था ताकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के शिक्षा और स्वास्थ्य के सफल मॉडल को रोका जा सके। मनीष सिसोदिया, जिन्होंने शिक्षा मंत्री के रूप में दिल्ली के स्कूलों की कायापलट की थी, उन्हें फर्जी आरोपों में जेल में रखकर देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। लेकिन सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। इस बयान के बाद दिल्ली की सड़कों पर ‘आप’ समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा और मिठाइयां बांटी जाने लगीं।

नवंबर 2021 से अब तक का सफर: आखिर क्या था यह पूरा विवाद?

पाठकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर यह दिल्ली शराब नीति केस था क्या, जिसने भारतीय राजनीति में इतना बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया। दरअसल, दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को एक नई आबकारी नीति (New Liquor Policy) लागू की थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य शराब माफियाओं के सिंडिकेट को तोड़ना, सरकारी राजस्व (Revenue) बढ़ाना और उपभोक्ता अनुभव को बेहतर बनाना था। इसके तहत सरकारी शराब के ठेकों को बंद करके निजी वेंडरों को लाइसेंस दिए गए थे।

हालांकि, इस नीति के लागू होने के कुछ महीनों बाद ही विपक्ष ने इसमें भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए। विवाद तब और गहरा गया जब दिल्ली के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) वीके सक्सेना (VK Saxena) ने मुख्य सचिव की एक रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। भारी दबाव और आरोपों के बीच दिल्ली सरकार ने सितंबर 2022 के अंत में इस नीति को वापस (Scrap) ले लिया और पुरानी नीति बहाल कर दी। लेकिन जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अंततः अरविंद केजरीवाल को लंबी न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) का सामना करना पड़ा। लेकिन अब, अदालत के इस ताजा आदेश ने साबित कर दिया है कि दिल्ली शराब नीति केस में नीतिगत फैसले हो सकते हैं, लेकिन आपराधिक नीयत या भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ।

दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर इस फैसले का व्यापक प्रभाव

दिल्ली शराब नीति केस में मिली यह विजय आम आदमी पार्टी के लिए केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक वापसी (Political Comeback) है। इस फैसले ने अरविंद केजरीवाल की उस छवि को फिर से ‘कट्टर ईमानदार’ के रूप में स्थापित कर दिया है, जिस पर विपक्ष लगातार प्रहार कर रहा था। आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों और अन्य राज्यों के राजनीतिक समीकरणों पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है।

विपक्षी दल, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (BJP), जो दिल्ली शराब नीति केस को अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाए हुए थी, उसके लिए अब दिल्ली में नया नैरेटिव (Narrative) गढ़ना एक बड़ी चुनौती होगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के कैडर का मनोबल अब सातवें आसमान पर है। मनीष सिसोदिया की प्रशासनिक क्षमता और अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक दूरदर्शिता के साथ, पार्टी अब ‘विक्टिम कार्ड’ के बजाय ‘विनर कार्ड’ खेलकर जनता के बीच जाएगी। कुल मिलाकर, न्यायपालिका के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में अंतिम जीत हमेशा सत्य और सबूतों की होती है, राजनीतिक आख्यानों (Political Narratives) की नहीं।

Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

Thakur Pawan Singh

Chief Editor, Taj News

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