Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in | 22 Feb 2026, 09:58 pm IST
Taj News City Desk
विशेष खोजी रिपोर्ट – आगरा
आगरा (Agra): ताजनगरी आगरा में नगर निगम की घोर उदासीनता, हटधर्मिता और जानलेवा लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शहर की विकास व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। जगदीशपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक बस्ती आज विकास की राह देखने के बजाय नर्क से भी बदतर हालात में जीने को मजबूर है। इसका सबसे बड़ा कारण तीन वार्डों—वार्ड 3, वार्ड 7 और वार्ड 81—के बीच का अंतहीन सीमा विवाद है। इस विवाद ने यहां के निवासियों, विशेषकर मुस्लिम बाहुल्य इलाके के लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। पवित्र माह-ए-रमजान के दौरान भी लोग गंदगी के बीच से गुजरकर इबादत करने को विवश हैं। हालात इतने भयावह हैं कि एक गली पूरी तरह नाले में तब्दील हो चुकी है, जिसमें गिरकर एक 10 साल की मासूम बच्ची अपनी जान तक गवां चुकी है।
- सीमा विवाद का दंश: वार्ड 3, 7 और 81 के बीच फंसे जगदीशपुरा क्षेत्र में विकास कार्य पूरी तरह ठप, पार्षद झाड़ रहे पल्ला।
- जानलेवा लापरवाही: नाले में तब्दील हो चुकी गली में गिरकर दो साल पहले हो चुकी है एक 10 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत।
- इबादत में खलल: रमजान के पवित्र महीने में भी मस्जिद के सामने गंदे नाले से गुजरने को मजबूर हैं नमाजी, कपड़े हो जाते हैं नापाक।
- 30 साल का दर्द: स्थानीय बुजुर्गों का दावा, पिछले 30 वर्षों से नर्क जैसे हालात में जी रहे हैं, कोई सुनने वाला नहीं।
गली नहीं, गंदा नाला है यह: 30 साल से नर्क भोग रही जनता
जगदीशपुरा क्षेत्र के इस मुस्लिम बाहुल्य इलाके में स्थिति इतनी विकट है कि एक मुख्य गली, जो लोगों के घरों और मस्जिद तक जाने का एकमात्र रास्ता है, वह पूरी तरह एक गंदे और उफनते नाले में बदल चुकी है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं, बल्कि पिछले 30 सालों से बनी हुई है। लोग इस गंदगी और बदबू के बीच जीने को अभिशप्त हैं। एक स्थानीय निवासी अजीजश ने बताया कि “आने-जाने का कोई रास्ता ही नहीं बचा है। रमजान का महीना चल रहा है, नमाज पढ़ने जाने में बहुत परेशानी होती है। कपड़ों पर छींटें आ जाती हैं और फिर दोबारा नहाना पड़ता है। पिछले दो-तीन सालों से हालात बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं।”
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(Video Credit: Taj News Digital)
एक माँ का दर्द: “मेरी 10 साल की बेटी इसी नाले में समा गई”
नगर निगम की इस लापरवाही का सबसे खौफनाक पहलू एक माँ के दर्द में झलकता है। क्षेत्र की एक महिला ने रोते हुए बताया कि “दो साल पहले मेरी 10 साल की पली-पलाई बेटी इसी नाले में गिर गई थी। ऊपर से दीवार भी ढह गई, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। मेरा भेजा निकल गया, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।” यह घटना प्रशासन की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां अक्सर बच्चे और बुजुर्ग गिरकर चोटिल होते रहते हैं। हाल ही में एक और लड़का गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
तीन पार्षदों का ‘पासिंग द पार्सल’ गेम: जनता पिस रही बीच में
इस पूरे मामले की जड़ तीन वार्डों—वार्ड 3, वार्ड 7 और वार्ड 81—का सीमा विवाद है। स्थानीय निवासी ताज मोहम्मद ने बताया कि यह क्षेत्र मुख्य रूप से वार्ड 3 के अंतर्गत आता है, लेकिन जब भी वे पार्षद के पास शिकायत लेकर जाते हैं, तो पार्षद साफ कह देते हैं कि “यह मेरे वार्ड में नहीं आता, वहां बहुत गंदगी रहती है।” जनता का सवाल है कि जब वोट लेने का समय आता है, तब तो सभी नेता हाथ जोड़कर आते हैं, लेकिन जीतने কুল मिला कर जनता को गंदगी में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। कोई भी पार्षद जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और इसका खामियाजा हजारों लोग भुगत रहे हैं।
रमजान में इबादत पर संकट: मस्जिद का रास्ता बंद
यह क्षेत्र एक मस्जिद से लगा हुआ है। रमजान के पवित्र महीने में, जब मुस्लिम समुदाय बढ़-चढ़कर इबादत करता है, तब मस्जिद तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद है। नमाजियों को या तो गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है या फिर लंबा चक्कर लगाकर मस्जिद पहुंचना पड़ता है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है। स्थानीय लोगों ने आगरा नगर निगम प्रशासन और उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि इस नारकीय जीवन से उन्हें मुक्ति मिल सके और सीमा विवाद को सुलझाकर विकास कार्य शुरू किए जा सकें।
Thakur Pawan Singh
Chief Editor, Taj News
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