Stray bulls fighting at Gulistan parking Fatehpur Sikri Agra causes panic among tourists, stray cattle menace in UP

फतेहपुर सीकरी में आवारा सांडों का तांडव: गुलिस्तां पार्किंग में हुई भिड़ंत, बाल-बाल बचे विदेशी पर्यटक; प्रशासन की लापरवाही से दांव पर पर्यटन

आगरा समाचार

Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 21 Feb 2026, 1:15 pm IST

फतेहपुर सीकरी (आगरा): विश्व धरोहर (World Heritage Site) के रूप में विख्यात और मुगलों की पूर्व राजधानी रहा फतेहपुर सीकरी (Fatehpur Sikri) आज अपनी ऐतिहासिक इमारतों से ज्यादा आवारा गोवंश (Stray Cattle) और खूंखार सांडों के आतंक के लिए चर्चा में है। पर्यटन नगरी में आवारा पशुओं का खौफ इस कदर बढ़ चुका है कि यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की जान हर समय सांसत में रहती है। विगत दिवस यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए विकसित की गई ‘गुलिस्तां पार्किंग’ (Gulistan Parking) में आवारा गोवंश की एक ऐसी ही खौफनाक और उग्र लड़ाई देखने को मिली, जिसने पूरे परिसर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। दो विशालकाय सांडों की इस खूनी भिड़ंत में वहां मौजूद कई विदेशी और घरेलू पर्यटक बाल-बाल बचे। इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका और गौशाला प्रबंधन की घोर लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है।

Stray bulls fighting at Gulistan parking Fatehpur Sikri Agra causes panic among tourists, stray cattle menace in UP
HIGHLIGHTS
  1. पार्किंग में खूनी भिड़ंत: फतेहपुर सीकरी की गुलिस्तां पार्किंग में दो खूंखार सांडों की लड़ाई से मची भारी अफरा-तफरी, टूटी बैरिकेडिंग।
  2. बाल-बाल बचे पर्यटक: घटना के वक्त गोल्फ कार्ट का इंतजार कर रहे विदेशी और घरेलू पर्यटक बाल-बाल बचे, टला बड़ा हादसा।
  3. गौशालाओं के दावों की हवा निकली: करोड़ों के फंड और नई गौशालाओं के बावजूद सड़कों और बाजारों में मंडरा रहे हैं गोवंश के झुंड।
  4. किसानों की उड़ी नींद: आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए फतेहपुर सीकरी के किसान कड़ाके की ठंड में रात-भर पहरा देने को मजबूर।

गुलिस्तां पार्किंग में मची अफरा-तफरी, टूटी बैरिकेडिंग प्रत्यक्षदर्शियों और टूरिस्ट गाइडों के अनुसार, विगत दिवस गुलिस्तां पार्किंग क्षेत्र में हमेशा की तरह पर्यटकों की भारी भीड़ थी। लोग अपनी गाड़ियों से उतरकर गोल्फ कार्ट (Golf Cart) का इंतजार कर रहे थे और कुछ लोग पास ही बनी कैंटीन पर बैठे थे। तभी अचानक दो खूंखार सांड आपस में बुरी तरह भिड़ गए। यह लड़ाई इतनी उग्र और भयानक थी कि दोनों सांड लड़ते-लड़ते पर्यटकों की भीड़ की तरफ आ गए।

अपनी जान बचाने के लिए पर्यटकों और स्थानीय गाइड्स में भारी अफरा-तफरी (Stampede-like situation) मच गई। सांडों के इस तांडव के बीच गोल्फ कार्ट के समीप लगाई गई लोहे की बैरिकेडिंग (Barricading) बुरी तरह टूट गई। पास ही कैंटीन के बाहर रखी कुर्सियां और टेबल तितर-बितर हो गए। गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई पर्यटक या स्थानीय व्यक्ति इन सांडों की चपेट में नहीं आया और एक बहुत बड़ी जनहानि (Casualty) होने से टल गई। यदि कोई बच्चा या विदेशी नागरिक इस भिड़ंत का शिकार हो जाता, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और आगरा के पर्यटन की भारी बदनामी होती।

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सड़कों से लेकर खेतों तक आवारा गोवंश का कब्जा फतेहपुर सीकरी में आवारा गोवंश की यह समस्या केवल पार्किंग या पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों का जीवन नर्क बना दिया है। कस्बे का मुख्य बाजार हो, सब्जी मंडी बाईपास हो, किराया से लेकर तेरहमोरी तक का रास्ता हो या फिर अनाज मंडी का इलाका—हर जगह आवारा सांडों और गायों के बड़े-बड़े झुंड सड़कों के बीचों-बीच खड़े या बैठे नजर आते हैं।

इन पशुओं की आपसी लड़ाई में अब तक कई राहगीर, स्कूली बच्चे, महिलाएं और दुकानदार गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी हालात बदतर हैं। किसान अपनी खून-पसीने से सींची गई फसलों को बचाने के लिए कड़ाके की ठंड और बारिश में भी रात-भर खेतों में पहरा (Night Guarding) देने को मजबूर हैं। जरा सी आंख लगते ही ये आवारा झुंड पूरी की पूरी फसल चट कर जाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

गौशालाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, सिस्टम की खुली पोल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (UP Government) ने सड़कों को गोवंश मुक्त करने और पशुओं के संरक्षण के लिए ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को ‘गौशाला निर्माण’ (Gaushala Construction) के लिए करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। फतेहपुर सीकरी और इसके आसपास के ब्लॉक क्षेत्रों में कई नई गौशालाएं भी बनकर तैयार हुई हैं। इसके अलावा, ब्लॉक स्तर पर आवारा गोवंश को पकड़ने के लिए विशेष वाहन (Cattle Catching Vehicles) और बजट भी उपलब्ध कराया गया है।

बावजूद इसके, जमीनी हकीकत इन सरकारी दावों को मुंह चिढ़ा रही है। गोवंश के खुलेआम विचरण पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। प्रशासन और संबंधित विभागों की नींद तभी टूटती है जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है या कोई मामला मीडिया की सुर्खियों में आ जाता है। तब अधिकारी औपचारिकता (Formality) के नाम पर दो-चार पशुओं को पकड़कर गौशाला भेज देते हैं और फिर से कुंभकर्णी नींद सो जाते हैं। यदि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपना काम ईमानदारी से किया होता और इन गोवंशों को सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाया होता, तो आज पर्यटन स्थली की सड़कों पर यह खौफनाक नजारा नहीं दिखता।

पर्यटन पर मंडरा रहा खतरा, ‘नो-कैटल ज़ोन’ की उठी मांग फतेहपुर सीकरी एक वैश्विक पर्यटन केंद्र (Global Tourist Hub) है। यहां हर रोज हजारों की संख्या में विदेशी और घरेलू पर्यटक आते हैं। पर्यटन स्थलों पर सांडों की इस लड़ाई ने पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय व्यापारियों, हैंडीक्राफ्ट शोरूम संचालकों और टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो पर्यटकों के बीच असुरक्षा की भावना फैलेगी, जिसका सीधा और नकारात्मक असर आगरा के पर्यटन उद्योग (Tourism Industry) और स्थानीय व्यापार पर पड़ेगा।

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों ने मांग की है कि:

  1. फतेहपुर सीकरी के सभी स्मारकों, पार्किंग क्षेत्रों और मुख्य बाजारों को तत्काल प्रभाव से ‘नो-कैटल ज़ोन’ (No-Cattle Zone) घोषित किया जाए।
  2. आवारा सांडों को पकड़ने के लिए नियमित और सघन अभियान (Catching Drive) चलाया जाए।
  3. क्षेत्र की मौजूदा गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए और वहां चारे-पानी के प्रबंधन में सुधार किया जाए।
  4. जिन अधिकारियों या विभागों की जिम्मेदारी इन पशुओं को पकड़ने की है, उनकी जवाबदेही (Accountability) तय कर उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह है कि फतेहपुर सीकरी में हुए इस ताजा बवाल और विदेशी पर्यटकों की जान खतरे में पड़ने के बाद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग जागता है, या फिर किसी बड़े और जानलेवा हादसे का इंतजार करता है।

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Thakur Pawan Singh Editor in Chief Taj News

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