Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 20 Feb 2026, 10:45 pm IST
आगरा: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए आम बजट (Union Budget) को लेकर व्यापारिक और औद्योगिक जगत में जहां एक तरफ कुछ राहतों को लेकर खुशी है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नए और कड़े नियमों ने करदाताओं (Taxpayers) की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स (चैम्बर) ने बजट तैयार होने से पहले वित्त मंत्री को जो सुझाव भेजे थे, उनमें से 4 प्रमुख सुझावों को सरकार ने मान लिया है। इसके लिए चैम्बर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, बजट के कुछ प्रावधानों, विशेषकर ‘बैक डेट’ (Retrospective) से टैक्स लगाने और पेनाल्टी को फीस में बदलने के नियमों पर चैम्बर ने कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई है और इसके समाधान के लिए सरकार को एक ‘पोस्ट-बजट मेमोरेंडम’ (Post Budget Memorandum) भेजा है।

आयकर प्रकोष्ठ की बैठक में हुआ मंथन शुक्रवार को चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल की अध्यक्षता में चैम्बर भवन में आयकर प्रकोष्ठ (Income Tax Cell) की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का नेतृत्व पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा ने किया। बैठक में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर अधिवक्ताओं और प्रमुख व्यापारियों ने बजट की बारीकियों, इसके दूरगामी परिणामों और करदाताओं पर पड़ने वाले इसके सीधे असर पर विस्तार से चर्चा की।
इन 4 सुझावों को मिली मंजूरी, व्यापारियों ने ली राहत की सांस आयकर प्रकोष्ठ की बैठक में इस बात पर हर्ष व्यक्त किया गया कि सरकार ने चैम्बर के प्री-बजट मेमोरेंडम (Pre-Budget Memorandum) को गंभीरता से लिया और उसके चार महत्वपूर्ण सुझावों को इस बार के बजट में शामिल कर लिया है।
- रिवाइज्ड रिटर्न की मियाद बढ़ी: करदाताओं के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) दाखिल करने की अंतिम तिथि (Due Date) जो पहले दिसंबर तक सीमित थी, उसे बढ़ाकर अब मार्च कर दिया गया है। इससे करदाताओं को अपनी गलतियां सुधारने का अतिरिक्त समय मिलेगा।
- अपील के लिए जमा राशि आधी हुई: पहले आयकर विभाग की किसी डिमांड पर स्टे (Stay of Demand) लेने के लिए करदाता को विवादित राशि का 20 प्रतिशत जमा करना पड़ता था। अब इस शर्त को आसान करते हुए इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे व्यापारियों की वर्किंग कैपिटल (Working Capital) ब्लॉक नहीं होगी।
- धारा 115 BBE में बड़ी राहत: आयकर अधिनियम की धारा 115 बीबीई (115 BBE) के तहत अघोषित आय या बेहिसाब नकदी पर लगने वाले भारी-भरकम 60 प्रतिशत टैक्स को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। यह व्यापारिक समुदाय के लिए एक बहुत बड़ी राहत मानी जा रही है।
- ट्रस्ट रिटर्न (ITR 7) का सरलीकरण: चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाओं द्वारा भरे जाने वाले आयकर रिटर्न फॉर्म (ITR 7) की प्रक्रिया को काफी हद तक सरल (Simplify) कर दिया गया है, जिससे अनुपालन का बोझ कम होगा।

पोस्ट बजट मेमोरेंडम: इन मुद्दों पर सरकार से की गई मांग राहत के बावजूद, चैम्बर का मानना है कि बजट में कुछ ऐसे संशोधन किए गए हैं जो व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) के बिल्कुल विपरीत हैं। इसके लिए चैम्बर ने एक ‘पोस्ट बजट मेमोरेंडम’ तैयार कर वित्त मंत्रालय को भेजा है।
इस मेमोरेंडम में सबसे पहली मांग यह की गई है कि सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न भरने की अंतिम तिथि (मार्च तक) तो बढ़ा दी है, लेकिन इसके साथ जो विलंब शुल्क या भारी ‘फीस’ (Late Fees) जोड़ी गई है, उसे पूरी तरह से हटाया जाए। व्यापारियों का तर्क है कि जब सरकार समय दे रही है, तो उस पर पेनाल्टी के रूप में फीस वसूलना न्यायसंगत नहीं है।

‘बैक डेट’ से टैक्स: वित्त मंत्री के वादे के खिलाफ बताया बैठक में सबसे ज्यादा आक्रोश ‘पूर्व तिथि’ (Retrospective Amendment) से लागू किए गए कर नियमों को लेकर देखा गया। आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा और अन्य सदस्यों ने बताया कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) ने कुछ मामलों में करदाताओं के पक्ष में निर्णय दिए थे। इन मामलों की अपील माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में लंबित थी। लेकिन, सरकार ने अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार किए बिना ही बजट में उन धाराओं में बदलाव कर दिया है।
सबसे ज्यादा आपत्तिजनक बात यह है कि ये बदलाव 01.04.2019 और 01.04.2021 जैसी पुरानी तारीखों (Back Dates) से लागू किए गए हैं। चैम्बर ने याद दिलाया कि खुद वित्त मंत्री ने अपने पुराने उद्बोधनों में देश के निवेशकों और व्यापारियों को आश्वस्त किया था कि सरकार कभी भी कोई कर बदलाव पूर्व की तिथियों (Retrospective effect) से नहीं करेगी। इसके बावजूद इस बजट में पुराने वादों को दरकिनार किया गया है, जो करदाताओं के लिए एक बहुत ही जटिल और तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर रहा है।
‘अपडेटेड रिटर्न’ और गोल्ड बॉन्ड पर भी उठाए सवाल चैम्बर ने मेमोरेंडम में मजबूती से यह मांग रखी है कि करदाता को अपना ‘अपडेटेड रिटर्न’ (Updated Return) 6 साल तक भरने का अधिकार मिलना चाहिए। वर्तमान समय सीमा बहुत कम है। इसके साथ ही, निवेशकों के बीच लोकप्रिय ‘सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स’ (Sovereign Gold Bonds – SGB) पर भी पूर्व तिथि से टैक्स लगाने के नए नियमों की कड़ी आलोचना की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदमों से सरकारी बॉन्ड्स पर निवेशकों का भरोसा टूटेगा।
पेनाल्टी को ‘फीस’ में बदलना: करदाता का अधिकार छिनने की साजिश बजट का एक और सबसे विवादास्पद पहलू पेनाल्टी (Penalty) को फीस (Fees) के रूप में परिवर्तित करना है। बैठक में मौजूद कर अधिवक्ताओं और सीए ने समझाया कि आयकर कानून में पेनाल्टी लगने पर करदाता के पास यह अधिकार होता है कि वह उसके खिलाफ उच्च अधिकारियों या ट्रिब्यूनल में अपील (Appeal) कर सके और अपनी सुनवाई का मौका पा सके।
लेकिन, सरकार ने चालाकी से पेनाल्टी का नाम बदलकर उसे ‘फीस’ कर दिया है। कानूनन ‘फीस’ का भुगतान अनिवार्य (Mandatory) होता है और इसके विरुद्ध कोई सुनवाई (Hearing) या अपील नहीं की जा सकती। इसके अतिरिक्त, असेसमेंट (Assessment) और पेनाल्टी दोनों एक साथ लगाने के ऐलान से आने वाले दिनों में आम करदाताओं और व्यापारियों पर कर का एक बहुत बड़ा और अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है, जो उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ सकता है।
इस महत्वपूर्ण आयकर समीक्षा बैठक में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल, पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, अशोक गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता राजकिशोर खंडेलवाल, सीए प्रार्थना जालान सहित कई अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे और सभी ने एक स्वर में सरकार से इन विसंगतियों को दूर करने की पुरजोर अपील की है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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