लोकल डेस्क, Taj News | Edited by: Thakur Pawan Singh | tajnews.in I 18 Feb 2026, 8:45 pm IST
अवैध अतिक्रमण पर चला प्रशासन का हंटर: शहरों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बन चुके हैं। भूमाफिया और कुछ असामाजिक तत्व अक्सर सरकारी और परिषदीय जमीनों पर अपना अवैध साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं, जिससे न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगता है, बल्कि भविष्य की विकास योजनाएं भी अधर में लटक जाती हैं। लेकिन अब प्रशासन ने इन भूमाफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपना ली है। इसी कड़ी में दिनांक 18 फरवरी को आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। सेक्टर-11 में स्थित परिषद की बेशकीमती भूमि को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से आज़ाद करा लिया गया है। इस ‘ऑपरेशन बुलडोजर’ ने पूरे इलाके के भूमाफियाओं में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

अधिकारियों की सख्त निगरानी में चला अभियान: प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) अतुल कुमार के सख्त निर्देशों पर की गई। उनके आदेश के बाद निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) सूरजपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसे सेक्टर-11 में पनप रहे अवैध अतिक्रमण को जड़ से उखाड़ फेंकने का जिम्मा सौंपा गया था। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य खसरा संख्या 964 और 969 पर स्थित आवास विकास परिषद की वह करोड़ों रुपये कीमत की जमीन थी, जिस पर लंबे समय से अवैध कब्जेदार अपनी जड़ें जमा चुके थे।
इस वृहद अतिक्रमण हटाओ अभियान में निर्माण खंड की टीम के साथ-साथ परिषदीय प्रवर्तन दल (Enforcement Squad) ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रवर्तन दल के जवानों की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रकार का विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए। इस पूरी कार्रवाई के दौरान अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह के साथ सहायक अभियंता (Assistant Engineer) मयंक और अवर अभियंता (Junior Engineer) सुनील भी मौके पर मुस्तैदी से डटे रहे और एक-एक इंच जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की।

क्या चल रहा था इस बेशकीमती जमीन पर? जब अधिकारियों की टीम दलबल और भारी-भरकम जेसीबी (JCB) मशीनों के साथ मौके पर पहुंची, तो वहां का नज़ारा देखकर हर कोई हैरान था। सेक्टर-11 की इस सरकारी जमीन का इस्तेमाल पूरी तरह से एक अवैध कमर्शियल हब के रूप में किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जमीन पर वीरेंद्र जैन, मुकेश दिवाकर, और पप्पू पंडित नामक व्यक्तियों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था।
यहां बालू (Sand), बजरी (Gravel), ईंट (Bricks) और सीमेंट (Cement) जैसे निर्माण सामग्रियों के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए थे। मानो यह कोई अधिकृत बिल्डिंग मटेरियल का गोदाम हो। इसके अलावा यहां भूसे का भी अवैध कारोबार किया जा रहा था। इन अतिक्रमणकारियों ने न केवल परिषद की जमीन पर कब्जा जमाया था, बल्कि यहां से रोजाना लाखों रुपये का अवैध व्यापार भी धड़ल्ले से कर रहे थे। इससे न केवल इलाके में धूल और प्रदूषण फैल रहा था, बल्कि भारी वाहनों की आवाजाही से स्थानीय निवासियों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी: प्रशासनिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था। आवास विकास परिषद द्वारा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया गया था। संबंधित व्यक्तियों—वीरेंद्र जैन, मुकेश दिवाकर और पप्पू पंडित आदि को पूर्व में कई बार आधिकारिक नोटिस (Official Notices) जारी किए गए थे। इन नोटिसों में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि वे सरकारी जमीन से अपना अवैध कब्जा और कारोबार तुरंत हटा लें।
लेकिन, इन कब्जेदारियों ने प्रशासन के नोटिसों को हल्के में लिया और लगातार नियमों की अवहेलना करते रहे। उन्हें शायद यह गुमान था कि उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन की इस नरमी को जब कमजोरी समझा जाने लगा, तो अंततः उच्चाधिकारियों ने सख्त रुख अख्तियार किया और प्रवर्तन दल के साथ मिलकर सीधा ‘एक्शन’ लेने का फैसला किया।
गरजी जेसीबी, मिनटों में ढहा अवैध साम्राज्य: बुधवार, 18 फरवरी की सुबह जब प्रशासन का भारी अमला बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ सेक्टर-11 पहुंचा, तो अतिक्रमणकारियों के होश उड़ गए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या कोई सिफारिश लगा पाता, अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह के इशारे पर जेसीबी मशीनें गरजने लगीं। कुछ ही घंटों के भीतर बालू, बजरी और ईंटों के ढेरों को वहां से हटा दिया गया। अवैध रूप से बनाए गए अस्थायी ढांचों को नेस्तनाबूद कर दिया गया।
कार्रवाई इतनी तेज और सुनियोजित थी कि किसी को भी विरोध करने का मौका नहीं मिला। जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करके न केवल अतिक्रमण हटाया गया, बल्कि उस पूरी जगह को समतल (Leveling) और साफ भी करा दिया गया, ताकि वहां दोबारा कोई कब्जा न कर सके।
23000 वर्ग मीटर की विशाल जमीन हुई मुक्त: इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि प्रशासन ने एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 23,000 वर्ग मीटर (लगभग 5.68 एकड़) के विशाल भूखंड को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। शहरी क्षेत्र में इतनी बड़ी जमीन की कीमत खुले बाजार में अरबों रुपये आंकी जाती है। इस जमीन के खाली होने से न केवल आवास विकास परिषद की संपत्ति सुरक्षित हुई है, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास के लिए एक बड़ा रास्ता भी खुल गया है।
जल्द शुरू होंगे विकास कार्य: कार्रवाई के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अधीक्षण अभियंता अतुल कुमार ने मीडिया और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए एक बहुत ही सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और प्रशासन की कार्यप्रणाली में किसी ने बाधा नहीं डाली।
भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए अतुल कुमार ने बताया कि सेक्टर-7 और सेक्टर-11 की इस विशाल परिषदीय भूमि को अब खाली नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन द्वारा इस जमीन पर विकास कार्यों का एक विस्तृत खाका तैयार किया गया है। शासन स्तर से प्रस्ताव को जल्द ही स्वीकृत कराकर यहां अत्याधुनिक और जनोपयोगी विकास कार्य (Development Works) प्रारंभ किए जाएंगे। इससे न केवल इस पूरे सेक्टर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि आसपास के निवासियों को बेहतर सुविधाएं और एक स्वच्छ वातावरण भी मिलेगा।
भूमाफियाओं के लिए एक सख्त संदेश: सेक्टर-11 की यह कार्रवाई शहर के अन्य अतिक्रमणकारियों और भूमाफियाओं के लिए एक बहुत बड़ा और कड़ा संदेश है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे कब्जा करने वाला कितना भी रसूखदार क्यों न हो, अगर उसने सरकारी जमीन पर ईंट भी रखी है, तो उस पर बुलडोजर चलना तय है। आम जनता ने भी प्रशासन की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जमकर सराहना की है, क्योंकि ऐसे अवैध कब्जों से सबसे ज्यादा परेशानी आम नागरिकों को ही उठानी पड़ती है।
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Thakur Pawan Singh
Editor in Chief, Taj News
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