Indian Navy Submarine Launched Cruise Missile Thakur Pawan Singh Taj News

Defense Desk, Taj News Reported by: Thakur Pawan Singh | Updated: Sat, 14 Feb 2026 07:55 AM IST

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना (Indian Navy) समंदर के अंदर से हमला करने की अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाने जा रही है। नौसेना ने अपनी पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े (Conventional Submarine Fleet) के लिए सबमरीन से लॉन्च होने वाली लैंड अटैक क्रूज मिसाइलें (LACMs) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, क्योंकि अब भारत पानी के नीचे से भी 500 किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने की क्षमता हासिल करने की तैयारी में है।

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🚀 इंडियन नेवी का ‘डेडली’ प्लान

  • 🎯 रेंज: 500 किलोमीटर तक जमीन पर हमला करने की क्षमता।
  • 🌊 लॉन्च: सबमरीन के स्टैंडर्ड 533mm टॉरपीडो ट्यूब से दागी जा सकेंगी।
  • 📡 टेक्नोलॉजी: बिना GPS के भी दुश्मन को खोजने और मारने में सक्षम।
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प्रतीकात्मक तस्वीर: समंदर के अंदर से निकलने वाली यह मिसाइल दुश्मन के लिए काल साबित होगी। (फोटो: ताज न्यूज़)

नौसेना को क्यों चाहिए ये घातक मिसाइलें?

रक्षा मंत्रालय ने इन मिसाइलों की खरीद के लिए ‘रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन’ (RFI) जारी कर दिया है। अभी तक भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियां (जैसे स्कॉर्पीन क्लास) रशियन SM39 एक्सोसेट जैसी एंटी-शिप मिसाइलों का उपयोग करती हैं। ये मिसाइलें दूसरे जहाजों को तो मार सकती हैं, लेकिन जमीन पर स्थित ठिकानों (Land Targets) को नहीं। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती हरकतों को देखते हुए नेवी को अब ऐसी मिसाइलों की सख्त जरूरत है जो पानी के अंदर से ही दुश्मन की जमीन पर तबाही मचा सकें।

पाकिस्तान और चीन की चुनौतियां

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने हाल ही में सबमरीन से लॉन्च होने वाली बाबर-3 (Babur-3) क्रूज मिसाइल का टेस्ट किया है, जिसकी रेंज करीब 450 किमी बताई जाती है। वहीं, चीन के पास पहले से ही YJ-18 जैसी खतरनाक मिसाइलें मौजूद हैं। ऐसे में भारत का यह कदम शक्ति संतुलन बनाए रखने और दुश्मनों को उनकी हद में रखने के लिए बेहद जरूरी है।

बिना GPS के भी ढूंढ निकालेगी दुश्मन को

नौसेना ने साफ कर दिया है कि उसे ऐसी स्मार्ट मिसाइलें चाहिए जो ‘टेरेन-फॉलोइंग’ क्षमता से लैस हों। यानी ये मिसाइलें जमीन की सतह के बेहद करीब उड़कर रडार को चकमा दे सकेंगी। सबसे खास बात यह है कि अगर युद्ध के दौरान दुश्मन GPS जाम कर दे, तब भी ये मिसाइलें अपने एंटी-जैमिंग फीचर्स और वेपॉइंट नेविगेशन के जरिए सटीक निशाना लगाने में सक्षम होंगी।

DRDO भी कर रहा है काम

हालांकि नेवी अभी विदेशी मिसाइलें खरीदने की योजना बना रही है, लेकिन भारत का DRDO भी शांत नहीं बैठा है। DRDO ‘निर्भय क्रूज मिसाइल’ प्लेटफॉर्म पर आधारित एक देसी सबमरीन-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल (SLCM) बना रहा है। फरवरी 2023 में इसका सफल ट्रायल हुआ था और 2028-29 तक इसके पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है।

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