USS Gerald R Ford World's Largest Aircraft Carrier Iran Conflict Abhimanyu Singh

International Desk, Taj News Reported by: Abhimanyu Singh | Updated: Sat, 14 Feb 2026 01:30 PM IST

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट (Middle East) में युद्ध के बादल घने होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की चेतावनी के बाद अब अमेरिका ने अपना सबसे खतरनाक और महंगा हथियार ईरान की तरफ रवाना कर दिया है। दुनिया का सबसे बड़ा वॉरशिप USS Gerald R. Ford अब फारस की खाड़ी (Persian Gulf) की ओर बढ़ रहा है। इसे अमेरिका का ‘तैरता हुआ किला’ कहा जाता है, जिसका वजन 400 स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के बराबर है।

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🚢 USS Gerald R. Ford: महाविनाशक की ताकत

  • ⚖️ वजन: 1 लाख टन (400 स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के बराबर)।
  • ✈️ क्षमता: एक साथ 75 फाइटर जेट्स और एयरक्राफ्ट हो सकते हैं तैनात।
  • 💰 कीमत: 13 बिलियन डॉलर (दुनिया का सबसे महंगा वॉरशिप)।
  • 👥 क्रू: 4,660 नौसैनिक एक साथ रह सकते हैं, 15,000 लोगों का खाना रोज बनता है।
USS Gerald R Ford World's Largest Aircraft Carrier Abhimanyu Singh
ईरान की तरफ बढ़ता अमेरिका का सबसे खतरनाक वॉरशिप USS Gerald R. Ford। (फोटो: ताज न्यूज़)

ट्रंप का अल्टीमेटम और ‘मौत’ की रवानगी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जनवरी को ईरान को न्यूक्लियर प्रोग्राम पर समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर ईरान पर अगला हमला “पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक” होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अब अपना अगला कदम बढ़ा दिया है और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना कर दिया है। यह वॉरशिप पहले वेनेजुएला पर दबाव बनाने के लिए कैरेबियन सागर में तैनात था।

5 एकड़ का फ्लाइट डेक, 220 उड़ानें रोज

इस वॉरशिप की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका फ्लाइट डेक 5 एकड़ में फैला है। युद्ध के समय इससे रोजाना 220 उड़ानें भरी जा सकती हैं। इसके सिस्टम को लेजर रेज से अपग्रेड किया जा सकता है। इसमें 1 करोड़ फीट वायर का इस्तेमाल हुआ है। यह 1106 फीट लंबा, 256 फीट चौड़ा और 250 फीट ऊंचा है। इसने अमेरिका के पुराने ‘निमित्ज-क्लास’ करियर को रिप्लेस किया है।

16 हजार करोड़ बढ़ गई थी लागत

गेराल्ड आर. फोर्ड को जुलाई 2017 में आधिकारिक तौर पर अमेरिकी नेवी में शामिल किया गया था। इसकी लॉन्चिंग 2015 में तय थी, लेकिन लॉजिस्टिक कारणों से दो साल की देरी हुई, जिससे इसकी लागत 16 हजार करोड़ रुपये बढ़ गई। इसकी कुल लागत लगभग 13 बिलियन डॉलर (83,928 करोड़ रुपये) है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत बनाती है।

समुद्र में एक चलता-फिरता शहर

यह वॉरशिप जून 2025 से समुद्र में है। इसमें 4,660 कर्मचारी एक साथ रह सकते हैं। यहां रोज 15,000 लोगों का खाना बनाया जा सकता है। अब यह वॉरशिप USS Abraham Lincoln के साथ फारस की खाड़ी में शामिल होगा, जहां अमेरिका ने पहले से ही गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स और फाइटर जेट्स तैनात कर रखे हैं।

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(डिस्क्लेमर: यह खबर अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

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