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Bangladesh Election: 17 साल का वनवास और अब प्रधानमंत्री की कुर्सी; तारिक रहमान ने कैसे पलटा पूरा खेल?

अंतरराष्ट्रीय

International Desk, Taj News Reported by: Abhimanyu Singh | Updated: Fri, 13 Feb 2026 10:30 AM IST

ढाका: बांग्लादेश की सियासत में पिछले दो महीनों में जो हुआ, वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 17 साल के लंबे वनवास के बाद वतन लौटे तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने देश का चुनावी नक्शा ही बदल दिया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को चुनाव में बहुमत मिलने के साथ ही अब तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, इस जीत के पीछे उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन का दुखद पहलू भी जुड़ा है।

Abhimanyu Singh Reporter Taj News

Abhimanyu Singh

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🇧🇩 बांग्लादेश का नया अध्याय (Key Highlights)

  • ✈️ वतन वापसी: 17 साल लंदन में रहने के बाद दिसंबर में ढाका लौटे तारिक।
  • 🥀 भावुक पल: वापसी के कुछ ही दिन बाद मां खालिदा जिया का निधन (30 दिसंबर 2025)।
  • 🗳️ बड़ी जीत: BNP को मिला बहुमत, तारिक रहमान PM पद के सबसे प्रबल दावेदार।
Tarique Rahman BNP Leader Bangladesh
बांग्लादेश की राजनीति के ‘राजकुमार’ तारिक रहमान 17 साल बाद सत्ता के शीर्ष पर।

मां की बीमारी ने खींचा वतन, फिर संभाली कमान

तारिक रहमान अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ पिछले साल दिसंबर में ढाका लौटे थे। उस वक्त उनकी मां और पूर्व पीएम खालिदा जिया अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही थीं। बेटे के लौटने के कुछ ही दिनों बाद 30 दिसंबर 2025 को खालिदा जिया का निधन हो गया। मां के जाने के बाद तारिक ने बीएनपी (BNP) की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली और सहानुभूति की लहर ने चुनावी नतीजों को उनकी झोली में डाल दिया।

क्यों देश छोड़कर भागे थे तारिक?

तारिक रहमान, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। 2007 में सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में जमानत मिलने पर वह इलाज के लिए लंदन चले गए और वहीं से 2018 से पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे थे।

शेख हसीना सरकार के दौरान उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले (जिसमें 20 लोग मारे गए थे) जैसे गंभीर आरोप लगे। उन्हें डर था कि देश लौटते ही उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। लेकिन 2024 में हुए छात्र आंदोलन ने शेख हसीना की सत्ता उखाड़ फेंकी और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने तारिक पर लगे सभी केस खारिज कर दिए, जिससे उनकी वापसी का रास्ता साफ हुआ।

📸 चुनाव प्रचार की झलकियाँ

‘मेरे पास सपना नहीं, योजना है’

वापसी के बाद एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर का हवाला देते हुए कहा, “मेरे पास सिर्फ सपना नहीं, एक योजना है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एक ऐसे बांग्लादेश का निर्माण करना चाहते हैं जहां हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई सभी सुरक्षित रहें। उनका यह बयान भारत के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि ‘बैटल ऑफ बेगम’ (हसीना vs खालिदा) के अंत के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश को किस दिशा में ले जाते हैं।

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(डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण बांग्लादेश के चुनावी नतीजों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

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