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Agra Metro: एमजी रोड पर दो पुल बनाएगा मेट्रो; ट्रैफिक डायवर्जन और मार्ग बंद की तैयारी, रेलवे को भेजी गई डिजाइन

आगरा समाचार

City Desk, Taj News | Published by: ठाकुर पवन सिंह | Updated: Sat, 07 Feb 2026 12:14 AM IST

आगरा मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर पर निर्माण गति तेज हो गई है। एमजी रोड पर रावली और हरीपर्वत लोकेशंस के निकट रेलवे लाइन को पार कराने के लिए दो स्टील गर्डर पुल तैयार किए जाने की योजना को औपचारिक रूप दिया जा चुका है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने प्रत्येक 60 मीटर लंबाई और 10 मीटर चौड़ाई वाले पुलों की विस्तृत डिजाइन रेलवे को भेज दी है। रेलवे की तकनीकी टीम इस डिजाइन का साइट‑सर्वे, क्लीयरेंस प्रोफाइल, लोड पैरामीटर्स और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के आधार पर परीक्षण करेगी। मंजूरी (NOC) मिलते ही पुलों के गर्डर सेक्शन मेट्रो डिपो में फेब्रिकेट कर चरणबद्ध लांचिंग के जरिए साइट पर स्थापित किए जाएंगे। इस दौरान एमजी रोड पर कुछ समय के लिए अस्थायी ट्रैफिक बंदी और डायवर्जन लागू करना पड़ सकता है, जिसकी विस्तृत योजना ट्रैफिक पुलिस और यूपीएमआरसी संयुक्त रूप से जारी करेंगे। तिथि फिलहाल घोषित नहीं है, लेकिन तैयारी और अनुमोदन प्रक्रियाएं प्रगति पर हैं।

Agra Metro MG Road Steel Girder Bridge Construction Plan
HIGHLIGHTS
  1. एमजी रोड पर दो 60 मीटर लंबे स्टील गर्डर पुल प्रस्तावित।
  2. यूपीएमआरसी ने डिजाइन रेलवे को भेजी; तकनीकी टीम करेगी सर्वे और परीक्षण।
  3. इंस्टॉलेशन के दौरान MG रोड पर ट्रैफिक डायवर्जन और आंशिक बंदी संभव।
  4. दूसरा मेट्रो कॉरिडोर 16 किमी लंबा, कुल 14 एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे।
दो लोकेशन पर 60–60 मीटर के स्टील गर्डर पुल; 10 मीटर चौड़ाई

रावली और हरीपर्वत वे महत्वपूर्ण बिंदु हैं जहाँ एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक को रेलवे लाइन के ऊपर से सुरक्षित ऊँचाई पर ले जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दो स्टील गर्डर पुल प्रस्तावित हैं—प्रत्येक 60 मीटर स्पैन का, ताकि रेलवे ऑपरेशन में शून्य हस्तक्षेप रहे। 10 मीटर चौड़ाई एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक और आवश्यक सुरक्षा/मेंटेनेंस क्लियरेंस के लिए पर्याप्त रखी गई है।

दूसरा कॉरिडोर: आगरा कैंट से कालिंदी विहार, 16 किमी में 14 एलिवेटेड स्टेशन

यूपीएमआरसी के अनुसार दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक करीब 16 किमी में विकसित हो रहा है, जिसमें 14 एलिवेटेड स्टेशन शामिल होंगे। यह कॉरिडोर घनी आबादी और वाणिज्यिक इलाकों को जोड़ते हुए शहर के यातायात दबाव को कम करेगा। एमजी रोड, रावली और हरीपर्वत जैसे पॉइंट्स पर इंजीनियरिंग‑इंटेंसिव स्ट्रक्चर (जैसे स्टील गर्डर ब्रिज) आवश्यक हैं ताकि रेलवे और मेट्रो के बीच सुरक्षा मानक अनुकूलित किए जा सकें।

डिजाइन रेलवे को भेजी, तकनीकी परीक्षण के बाद NOC

मेट्रो ने डिटेल्ड डिजाइन पैकेज रेलवे को प्रेषित किया है। अब रेलवे की तकनीकी टीम साइट‑निरीक्षण (survey), ड्रा‑इंग वैलिडेशन, लोड‑टेस्टिंग पैरामीटर्स, विंड/सीस्मिक कंसिडरेशंस और OHE (Overhead Equipment) क्लियरेंस सहित सभी पहलुओं का परीक्षण करेगी। आवश्यकता होने पर सुधार/संशोधन की संस्तुति जारी होगी। अंतिम NOC के बाद फील्ड में लांचिंग शेड्यूल तय होगा।

इंस्टॉलेशन चरण: डिपो में फेब्रिकेशन, नाइट‑लांचिंग और चरणबद्ध ट्रैफिक

गिर्डर्स का फेब्रिकेशन मेट्रो डिपो में होगा ताकि साइट पर समय कम लगे और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित रहे। लांचिंग के दौरान बड़े क्रेन्स/लांचिंग गैन्ट्री का प्रयोग हो सकता है। ट्रैफिक पर असर न्यूनतम रखने के लिए नाइट‑शिफ्ट लांचिंग, फेज़‑वाइज़ बैरिकेडिंग और अंतरिम डायवर्जन लागू होंगे। प्रत्येक फेज़ के पहले जनता को अग्रिम सूचना दी जाएगी।

ट्रैफिक डायवर्जन: वैकल्पिक मार्ग, इमरजेंसी लेन और लोकल एक्सेस

एमजी रोड पर कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कराया जाएगा। मेडिकल इमरजेंसी, फायर/पुलिस मूवमेंट और स्थानीय निवासियों के लोकल एक्सेस के लिए समर्पित गलियारा (Dedicated Access Lane) चिन्हित किया जाएगा। साइनएज, रिफ्लेक्टर, ट्रैफिक मार्शल और रियल‑टाइम अपडेट (नगर निगम/ट्रैफिक पुलिस सोशल चैनल) से ड्राइवरों को मार्गदर्शन मिलेगा।

सुरक्षा प्रोटोकॉल: रेल ऑपरेशन सेफ्टी, OHE क्लियरेंस और साइट कंट्रोल

रेलवे ट्रैक के ऊपर किसी भी स्ट्रक्चर की स्थापना में रेल ऑपरेशन सेफ्टी सर्वोपरि है। ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) के क्लियरेंस, ब्लॉक परमिट, स्पीड‑नॉर्म्स और फ्लैगिंग स्टैंडर्ड्स का पालन कराया जाएगा। साइट पर टूल‑बॉक्स टॉक्स, वर्क‑परमिट सिस्टम, PPE अनुपालन, फॉल‑अरेस्ट सिस्टम, और इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान अनिवार्य होंगे।

शहर के लिए लाभ: निर्बाध कनेक्टिविटी, समय‑बचत और प्रदूषण में कमी

ब्रिज सेक्शंस के बन जाने से दूसरा कॉरिडोर बाधारहित कनेक्टिविटी देगा। मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद यात्रा समय में कमी, रोड जाम में राहत और वाहन उत्सर्जन घटने की उम्मीद है। व्यावसायिक इलाकों के साथ आवासीय सेक्टर्स के जुड़ने से लास्ट‑माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

फिलहाल तारीख तय नहीं; जनता के लिए परामर्श

NOC और कार्य‑अनुसूची के बाद ही अस्थायी बंदी की निश्चित तारीख, अवधि और डायवर्जन मैप जारी होंगे। तब तक नागरिकों से अनुरोध है कि आधिकारिक एडवाइजरी पर नज़र रखें, अनावश्यक यात्रा टालें और वैकल्पिक मार्ग/समय का चयन करें।

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✍️ संपादन: ठाकुर पवन सिंह
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