
Published: Thursday, 01 January 2026, 06:15 PM IST | Agra
वीर गोकुला सिंह जाट (Veer Gokula Singh Jat) का 356वां बलिदान दिवस आगरा के गांव सुनारी चौराहे पर ऐतिहासिक उत्साह के साथ मनाया गया। औरंगजेब के अत्याचारों के खिलाफ पहली संगठित हुंकार भरने वाले, हिंदू धर्म रक्षक अमर शहीद वीर गोकुला सिंह जाट के बलिदान को याद कर लोगों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर श्रीमती हेमलता दिवाकर ने उनके संघर्ष को नमन किया।

वीर गोकुला सिंह जाट: शौर्य और शहादत का घटनाक्रम (Timeline)
वक्ताओं ने वीर गोकुला के संघर्ष की समयरेखा (Timeline) को विस्तार से बताया:
- वर्ष 1669: मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ वीर गोकुला ने सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया और सिहोरा के युद्ध में मथुरा के फौजदार अब्दुल-उल-नवी को मार गिराया।
- नवंबर 1669: औरंगजेब की शाही सेना के साथ उनका भीषण संघर्ष जारी रहा।
- दिसंबर 1669: लंबे संघर्ष के बाद, उन्हें उनके चाचा उदय सिंह के साथ धोखे से गिरफ्तार कर आगरा लाया गया।
- 1 जनवरी 1670: आगरा कोतवाली के सामने उन्हें इस्लाम कबूलने का प्रस्ताव दिया गया। जिसे ठुकराते ही उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए।
आगरा में गूंजा ‘फुव्वारा’ का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, आगरा कोतवाली के सामने जिस चबूतरे पर उन्हें यातनाएं दी गईं, वहां उनके बलिदान के समय रक्त की तेज धाराएं फूट पड़ी थीं। इसी कारण वह स्थान आज भी ‘फुव्वारा’ नाम से जाना जाता है। महापौर हेमलता दिवाकर ने घोषणा की कि आगामी मार्च माह तक सुनारी चौराहे पर वीर गोकुला सिंह जाट की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
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