नागपुर, 17 मार्च 2025: महाराष्ट्र का नागपुर शहर, जो अपनी शांति और सौहार्द के लिए जाना जाता है, सोमवार को हिंसा की चपेट में आ गया। औरंगजेब की मजार को हटाने की मांग को लेकर बजरंग दल के प्रदर्शन के बाद एक धार्मिक पुस्तक जलाने की अफवाह ने शहर के कई हिस्सों में तनाव फैला दिया। यह तनाव शाम होते-होते हिंसक झड़पों में बदल गया, जिसमें चार लोग घायल हो गए, 40 से अधिक वाहन जला दिए गए, और पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शांति की अपील की है, लेकिन शहर में तनाव अभी भी बना हुआ है।
हिंसा की शुरुआत: एक अफवाह ने भड़काई चिंगारी
यह सब तब शुरू हुआ, जब सोमवार दोपहर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने नागपुर के महल इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति के पास औरंगजेब की मजार हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान औरंगजेब का पुतला जलाया गया, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में दावा किया गया कि इस दौरान कुरान भी जलाई गई। यह अफवाह आग की तरह फैली और मुस्लिम समुदाय के लोग महल, कोतवाली, गणेशपेठ, और चितनवीस पार्क जैसे इलाकों में जमा होने लगे। पुलिस के मुताबिक, यह अफवाह पूरी तरह बेबुनियाद थी, लेकिन इसने दो समुदायों के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी।

चितनवीस पार्क से शुक्रवारी तक: हिंसा का विस्तार
शाम होते-होते स्थिति बेकाबू हो गई। चितनवीस पार्क से लेकर शुक्रवारी तालाब रोड तक दंगाइयों ने उत्पात मचाया। इस दौरान 40 से अधिक चार पहिया वाहनों में आग लगा दी गई और कई घरों पर पथराव किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ में शामिल कुछ लोग पत्थर, लाठियाँ, और ज्वलनशील पदार्थ लेकर आए थे, जिससे यह संदेह गहरा गया कि यह हिंसा सुनियोजित हो सकती थी। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, लेकिन हिंसा की खबरें कोतवाली और गणेशपेठ तक पहुँच गईं। चार लोग, जिनमें दो पुलिसकर्मी शामिल हैं, इस झड़प में घायल हुए।

पुलिस का एक्शन: धारा 144 लागू
हालात को देखते हुए नागपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी), दंगा नियंत्रण पुलिस, और स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स (एसआरपीएफ) की तैनाती की गई। गणेशपेठ थाने में कुरान जलाने की शिकायत दर्ज की गई, लेकिन बजरंग दल के पदाधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान सिर्फ औरंगजेब का पुतला जलाया गया था, न कि कोई धार्मिक पुस्तक। इसके बावजूद, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने शहर में धारा 144 लागू कर दी और सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

औरंगजेब की मजार: विवाद का केंद्र
नागपुर की यह हिंसा उस समय हुई, जब महाराष्ट्र में औरंगजेब की मजार को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) जैसे संगठन लंबे समय से खुल्दाबाद, छत्रपति संभाजीनगर में स्थित इस मजार को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि औरंगजेब का इतिहास विवादास्पद रहा है और उसकी मजार को संरक्षित करना उचित नहीं है। इस मांग को लेकर सोमवार को पूरे राज्य में प्रदर्शन हुए, लेकिन नागपुर में यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: शांति की कोशिश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति पर नजर रखते हुए नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की। उनके कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, “महल इलाके में पथराव और तनावपूर्ण स्थिति के बाद पुलिस प्रशासन हालात को संभाल रहा है। नागपुर एक शांतिपूर्ण शहर है और यह हमारी परंपरा रही है। मैं नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का पूरा सहयोग करें।” फडणवीस ने यह भी कहा कि वे पल-पल की जानकारी ले रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नितिन गडकरी का संदेश: शांति बनाए रखें
नागपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों से शांति की अपील की। उन्होंने कहा, “नागपुर हमेशा से शांति और सौहार्द का प्रतीक रहा है। कुछ अफवाहों के कारण यहाँ तनाव पैदा हुआ है। मैं अपने सभी भाइयों से अनुरोध करता हूँ कि अफवाहों पर विश्वास न करें और सड़कों पर न निकलें। पुलिस प्रशासन के साथ सहयोग करें।” गडकरी ने यह भी आश्वासन दिया कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

हिंसा की जड़: अफवाह या साजिश?
इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह हिंसा महज एक अफवाह का नतीजा थी, या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी? पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुरान जलाने का दावा पूरी तरह आधारहीन था। फिर भी, इस अफवाह ने इतना बड़ा रूप कैसे ले लिया? कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि यह तनाव जानबूझकर भड़काया गया ताकि सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाया जा सके। पुलिस ने इस मामले की गहन जाँच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नागपुर का इतिहास: शांति की पहचान
नागपुर हमेशा से एक शांतिप्रिय शहर रहा है। यहाँ विभिन्न समुदाय सालों से मिलजुल कर रहते आए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय होने के बावजूद, यह शहर सामुदायिक तनाव से आमतौर पर दूर रहा है। लेकिन सोमवार की घटना ने इस छवि को धक्का पहुँचाया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अफवाहों ने लोगों के बीच अविश्वास पैदा किया, जिसे ठीक करने में समय लगेगा।
सामुदायिक एकता की चुनौती
इस हिंसा ने नागपुर के सामुदायिक ढांचे को एक बड़ी चुनौती दी है। प्रशासन ने स्थानीय नेताओं और धार्मिक गुरुओं से अपील की है कि वे आगे आएँ और लोगों को शांति का संदेश दें। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी शांति मार्च निकालने की योजना बनाई है ताकि शहर में सौहार्द का माहौल फिर से बहाल हो सके।
आगे क्या?
हालांकि प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन नागपुर में तनाव का माहौल अभी खत्म नहीं हुआ है। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात है और सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। यह घटना न केवल नागपुर, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक सबक है कि अफवाहें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और समुदाय मिलकर इस संकट से कैसे उबरते हैं।